बुद्धिमान व्यापारी और मरा हुआ चूहा — शून्य से शिखर तक का सफर

एक नगर में एक बहुत ही प्रसिद्ध और धनवान व्यापारी रहता था। एक दिन वह अपने मुनीम पर बहुत गुस्सा हो रहा था क्योंकि मुनीम ने व्यापार में भारी नुकसान कर दिया था।
व्यापारी ने गुस्से में सड़क पर पड़े एक 'मरे हुए चूहे' की तरफ इशारा करते हुए कहा: "तू बिल्कुल मूर्ख है! अगर किसी इंसान के पास असली बुद्धि और व्यापार करने की समझ हो, तो वह इस 'मरे हुए चूहे' से भी व्यापार शुरू करके लाखों कमा सकता है!"
चूहे से व्यापार की शुरुआत: उसी समय वहाँ से एक बहुत ही गरीब लेकिन बेहद चतुर और अक्लमंद लड़का गुज़र रहा था। उसने व्यापारी की वह बात सुन ली। उसने तुरंत वह 'मरा हुआ चूहा' उठाया और बाज़ार की तरफ चल दिया।
रास्ते में एक सराय थी, जहाँ सराय के मालिक की 'बिल्ली' को बहुत ज़ोरों की भूख लगी थी। लड़के ने सराय के मालिक को वह मरा हुआ चूहा बिल्ली के खाने के लिए बेच दिया और बदले में उसे 'दो ताँबे के सिक्के' मिल गए।
लड़के ने उन दो सिक्कों से थोड़ा सा 'गुड़' और पानी का एक घड़ा खरीदा। वह नगर के बाहर उस रास्ते पर जाकर बैठ गया जहाँ से बहुत सारे लकड़हारे जंगल से भारी लकड़ियाँ काटकर लौटते थे। थके-हारे लकड़हारों को लड़के ने मीठा पानी और गुड़ पिलाया। खुश होकर हर लकड़हारे ने उसे अपनी गठरी में से 'एक-एक लकड़ी' दे दी।
लड़के ने उन लकड़ियों को बाज़ार में बेचा और उस पैसे से और गुड़-पानी खरीद कर अगले दिन फिर लकड़हारों को पिलाया। धीरे-धीरे उसके पास अच्छे-खासे पैसे जमा हो गए।
चतुराई का अगला कदम: एक दिन नगर में भयंकर आंधी-तूफान आया, जिससे राजा के बगीचे में बहुत सारे पेड़ और डालियाँ टूट कर गिर गईं। राजा का माली बगीचे की सफाई को लेकर बहुत परेशान था।
लड़के ने माली से कहा: "अगर आप ये टूटी हुई लकड़ियाँ मुझे दे दें, तो मैं पूरे बगीचे की सफाई करवा दूँगा।" माली मान गया। लड़के ने पास खेल रहे बच्चों को थोड़ा-थोड़ा गुड़ दिया और बच्चों ने खेल-खेल में पूरा बगीचा साफ कर दिया। लड़के ने उन सारी लकड़ियों को इकट्ठा किया और उन्हें 'राजा के कुम्हार' को बेच दिया, जिसे भट्टी जलाने के लिए बहुत सारी लकड़ी चाहिए थी। इस सौदे से लड़के को बहुत सारे 'सोने के सिक्के' मिले।
अब लड़के के पास अच्छी-खासी पूँजी हो गई थी। एक दिन उसे पता चला कि बंदरगाह पर एक बहुत बड़ा समुद्री जहाज़ माल लेकर आया है। लड़का तुरंत वहाँ गया और उसने अपनी अक्ल लगाकर, व्यापारियों के एक बड़े समूह को अपने साथ मिलाया और जहाज़ के 'पूरे माल' का सौदा सबसे पहले कर लिया।
जब शहर के अन्य बड़े व्यापारी माल खरीदने आए, तो उन्हें उस लड़के से माल खरीदना पड़ा। इस एक व्यापार से वह लड़का नगर का सबसे अमीर इंसान बन गया!
अपनी इस अपार सफलता के बाद, लड़के ने सोने का एक 'चूहा' बनवाया और उस पहले व्यापारी के पास गया, जिसकी बात सुनकर उसने व्यापार शुरू किया था।
लड़के ने वह सोने का चूहा व्यापारी को भेंट करते हुए कहा: "सेठ जी, यह आपकी ही प्रेरणा थी कि मैंने एक मरे हुए चूहे से व्यापार शुरू करके यह मुकाम हासिल किया है। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।" व्यापारी उस लड़के की बुद्धि और ईमानदारी से इतना प्रभावित हुआ कि उसने अपनी बेटी की शादी उस लड़के से कर दी।
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