
📖 मुहावरों की कहानियाँ
मुहावरों पर आधारित कहानियाँ
50 कहानियाँ
📖 मुहावरों की कहानियाँ1. "नाच न जाने आँगन टेढ़ा"
अपनी कमी छिपाने के लिए दूसरों पर या परिस्थितियों पर दोष मढ़ना।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ2. "अंधों में काना राजा"
मूर्खों के बीच थोड़ा सा पढ़ा-लिखा या ज्ञानी इंसान भी बहुत महान माना जाता है।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ3. "अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत"
समय निकल जाने के बाद पछताने से या रोने से कोई फायदा नहीं होता, इसलिए हर काम समय पर करना चाहिए।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ4. "जिसकी लाठी उसकी भैंस"
जिसके पास ताक़त या सत्ता होती है, जीत उसी की होती है और उसी का कब्ज़ा मान लिया जाता है।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ5. "बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद"
मूर्ख या अज्ञानी इंसान किसी मूल्यवान या गुणवान चीज़ की कद्र नहीं कर सकता, क्योंकि उसे उसकी परख नहीं होती।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ6. "थोथा चना बाजे घना"
'थोथा' मतलब खाली। जिस इंसान में गुण या ज्ञान कम होता है, वह अपनी अहमियत दिखाने के लिए दिखावा बहुत ज़्यादा करता है और बहुत बड़ी-बड़ी डिंगें मारता है।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ7. "काला अक्षर भैंस बराबर"
बिल्कुल अनपढ़ होना। जब किसी व्यक्ति को पढ़ना-लिखना बिल्कुल न आता हो, तो उसके लिए किताब का लिखा हुआ हर अक्षर किसी काली भैंस के समान होता है।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ8. "ऊँट के मुँह में ज़ीरा"
जब किसी की ज़रूरत या खुराक बहुत ज़्यादा हो, लेकिन उसे कोई चीज़ बहुत ही कम मात्रा में दी जाए, तो वह 'ऊँट के मुँह में ज़ीरा' के समान होती है।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ9. "एक म्यान में दो तलवारें"
एक ही जगह पर दो समान अधिकार वाले या दो अत्यधिक ताक़तवर/अहंकारी लोग एक साथ शांति से नहीं रह सकते।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ10. "दूर के ढोल सुहावने"
दूर से चीज़ें बहुत अच्छी और आकर्षक लगती हैं, लेकिन जब इंसान उनके पास जाता है, तब उसे असलियत और संघर्ष का पता चलता है।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ11. "धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का"
जो इंसान लालच या स्वार्थ के कारण दो नावों में सवारी करता है, उसका कहीं भी एक ठिकाना नहीं रहता और उसे हर जगह से दुत्कार मिलती है।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ12. "नौ नकद न तेरह उधार"
उधार में ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने से अच्छा है कि नकद में थोड़ा कम मुनाफ़ा कमा लिया जाए। व्यापार में नकद पैसा ही सबसे सुरक्षित होता है।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ13. "जल में रहकर मगर से बैर"
जिस स्थान पर रहना हो, वहाँ के सबसे ताक़तवर या प्रभावशाली व्यक्ति से दुश्मनी मोल लेना बहुत बड़ी मूर्खता है।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ14. "बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय"
इंसान जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल मिलता है। अगर कोई बुरे कर्म करता है, तो उसे अंत में अच्छे परिणाम की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ15. "आसमान से गिरा खजूर में अटका"
एक बहुत बड़ी मुसीबत से मुश्किल से जान बचाकर निकलना, लेकिन तुरंत ही किसी दूसरी नई मुसीबत में फँस जाना।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ16. "चोर की दाढ़ी में तिनका"
जो इंसान दोषी या अपराधी होता है, वह हमेशा डरा हुआ रहता है और अपने व्यवहार से अपना दोष खुद ही साबित कर देता है।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ17. "लातों के भूत बातों से नहीं मानते"
जो लोग स्वभाव से बहुत ज़िद्दी, नीच या ढीठ होते हैं, वे प्यार और शराफत की भाषा नहीं समझते; उन्हें सुधारने के लिए सख़्ती (डंडे या सज़ा) का ही इस्तेमाल करना पड़ता है।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ18. "घर की मुर्गी दाल बराबर"
जो व्यक्ति या चीज़ हमारे घर में या आसानी से हमारे पास उपलब्ध होती है, हम उसकी कोई कद्र नहीं करते, भले ही वह कितनी ही मूल्यवान या गुणवान क्यों न हो।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ19. "रस्सी जल गई पर ऐंठन नहीं गई"
सब कुछ बर्बाद हो जाने या कंगाल हो जाने के बाद भी झूठा घमंड और अकड़ न छोड़ना।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ20. "सौ सुनार की, एक लोहार की"
कमज़ोर या छोटे आदमी की सौ छोटी-छोटी चोटों (या बातों) के बराबर, ताक़तवर आदमी की केवल एक ही बड़ी चोट काफी होती है।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ21. "आम के आम, गुठलियों के दाम"
जब किसी एक ही काम या चीज़ से 'दोहरा लाभ' हो जाए। यानी मुख्य चीज़ से तो फायदा हो ही, साथ ही उसके बेकार समझे जाने वाले हिस्से से भी पैसे कमा लिए जाएँ।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ22. "खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे"
जब कोई इंसान किसी काम में नाकाम हो जाता है या उसे शर्मिंदगी उठानी पड़ती है, तो वह अपनी झल्लाहट और अपना गुस्सा किसी बेजान या बेकसूर चीज़ पर निकालता है।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ23. "मुँह में राम बगल में छुरी"
ऊपर से बहुत मीठी और धर्म-कर्म की बातें करना, लेकिन मन में कपट रखना और पीठ पीछे धोखा देने या नुकसान पहुँचाने की तैयारी करना।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ24. "भैंस के आगे बीन बजाना"
किसी मूर्ख, अज्ञानी या नासमझ इंसान को बहुत ही ज्ञान की या काम की बात समझाना बिल्कुल बेकार है, क्योंकि उसे कुछ समझ नहीं आता। यह अपना समय बर्बाद करना है।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ25. "एक अनार सौ बीमार"
जब कोई चीज़ मात्रा में बहुत कम हो, लेकिन उसे माँगने वाले या उसकी ज़रूरत वाले लोग बहुत ज़्यादा हों।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ26. "उल्टा चोर कोतवाल को डांटे"
जब कोई इंसान खुद बहुत बड़ी गलती या अपराध करे, और पकड़े जाने पर माफ़ी माँगने के बजाय सामने वाले (या पुलिस) को ही धमकाने और डांटने लगे।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ27. "नेकी कर दरिया में डाल"
किसी के साथ भलाई या उपकार करने के बाद बदले में कुछ पाने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, बल्कि उस नेकी को भूल जाना चाहिए।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ28. "अंत भला तो सब भला"
अगर किसी काम या संघर्ष का अंतिम परिणाम अच्छा और सुखद हो, तो बीच में झेली गई सारी मुश्किलें और कष्ट इंसान भूल जाता।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ29. "दूध का जला छाछ भी फूँक कर पीता है"
जब इंसान को एक बार किसी चीज़ या इंसान से बहुत बड़ा धोखा या नुकसान मिलता है, तो वह इतना डर जाता है कि अगली बार वह बिल्कुल सुरक्षित चीज़ में भी हद से ज़्यादा सावधानी बरतने लगता है।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ30. "हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और"
बाहर से बहुत बड़ा और रसूखदार दिखावा करना, लेकिन अंदर से असलियत बिल्कुल उल्टी (कंजूसी या खोखली) होना।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ31. "अपनी डफली अपना राग"
जब किसी समूह या जगह पर लोगों में बिल्कुल भी एकता न हो, सब अपनी-अपनी मनमानी करें और एक-दूसरे की बात सुने बिना अपना ही बेतुका सुझाव दें।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ32. "डूबते को तिनके का सहारा"
जब कोई इंसान घोर संकट या बर्बादी के कगार पर हो, तब उसे अगर कोई बहुत ही छोटी सी मदद या उम्मीद मिल जाए, तो वह उसके लिए जीवनरक्षक बन जाती है।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ33. "चिराग तले अँधेरा"
जहाँ ज्ञान या प्रकाश बाँटा जा रहा हो, ठीक उसी जगह (या उसी के घर में) अज्ञानता या बुराई का होना।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ34. "आ बैल मुझे मार"
जानबूझकर खुद को मुसीबत में डालना या बैठे-बिठाए किसी खतरे से पंगा लेना।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ35. "सावन के अंधे को हरा ही हरा सूझता है"
जो इंसान खुद हमेशा सुखी या अमीर होता है, उसे लगता है कि दुनिया में सब लोग सुखी हैं। अपने सुख के कारण वह दूसरों के दुख को समझ ही नहीं पाता।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ36. "आगे कुआँ पीछे खाई"
जब इंसान के सामने दोनों तरफ से मुसीबत आ जाए और बचने का कोई भी रास्ता न बचे।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ37. "ऊँची दुकान फीका पकवान"
केवल नाम बड़ा होना या बाहरी दिखावा बहुत ज़्यादा होना, लेकिन चीज़ की असलियत या गुणवत्ता बिल्कुल घटिया होना।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ38. "खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है"
संगति का असर बहुत जल्दी पड़ता है; लोग अपने आस-पास के लोगों को देखकर ही उनका स्वभाव और आदतें सीख लेते हैं।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ39. "अधजल गगरी छलकत जाए"
'गगरी' यानी मटका। आधा भरा हुआ मटका ले जाने पर पानी छलक कर बहुत आवाज़ करता है, जबकि पूरा भरा हुआ मटका शांत रहता है। इसका मतलब है कि जिस इंसान में ज्ञान या गुण कम होता है, वह दिखावा और बकवास बहुत ज़्यादा करता है।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ40. "बगल में छोरा नगर में ढिंढोरा"
कोई चीज़ बिल्कुल अपने पास ही होना, लेकिन उसे अपने पास ढूँढने के बजाय हर जगह तलाशते फिरना और हंगामा खड़ा कर देना।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ41. "एक हाथ से ताली नहीं बजती"
जब दो लोगों के बीच झगड़ा या विवाद होता है, तो गलती कभी केवल एक तरफ से नहीं होती; दोनों पक्षों की कुछ न कुछ गलती ज़रूर होती है।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ42. "खोदा पहाड़ निकली चुहिया"
बहुत ज़्यादा और कठिन मेहनत करने के बाद बहुत ही मामूली या बेकार सा फल मिलना।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ43. "घर का भेदी लंका ढाए"
जब अपने ही घर का कोई इंसान या सबसे भरोसेमंद व्यक्ति राज़ खोल देता है या धोखा देता है, तो सबसे बड़ा विनाश होता है।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ44. "जान बची तो लाखों पाए"
इंसान की जान ही उसकी सबसे बड़ी दौलत है। अगर किसी बड़े खतरे में इंसान की जान बच जाती है, तो उसे अपना सब कुछ वापस मिल जाने के बराबर समझना चाहिए।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ45. "हाथ कंगन को आरसी क्या"
'आरसी' का मतलब होता है शीशा। जो बात बिल्कुल प्रत्यक्ष या सामने हो, उसे साबित करने के लिए किसी सबूत या प्रमाण की ज़रूरत नहीं होती।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ46. "मान न मान मैं तेरा मेहमान"
जब कोई अनजान या अनचाहा व्यक्ति बिना बुलाए ज़बरदस्ती आपके गले पड़ जाए और आपके घर या चीज़ों पर अपना हक जताने लगे।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ47. "बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी"
जो इंसान लगातार बेईमानी, चोरी या कोई अपराध करता है, वह कुछ समय तक तो बच सकता है, लेकिन एक न एक दिन वह ज़रूर पकड़ा जाता है और उसे सज़ा मिलती है।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ48. "गागर में सागर भरना"
'गागर' यानी छोटा मटका और 'सागर' यानी विशाल समुद्र। बहुत ही कम शब्दों में बहुत बड़ी, गहरी और अर्थपूर्ण बात कह देना।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ49. "अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता"
'भाड़' का मतलब है वह भट्ठी जहाँ रेत गर्म करके चने भूने जाते हैं। कोई भी एक अकेला इंसान, चाहे वह कितना भी बहादुर क्यों न हो, किसी बहुत बड़ी मुसीबत से अकेले नहीं लड़ सकता या समाज में कोई बहुत बड़ा बदलाव नहीं ला सकता; उसे दूसरों के साथ की ज़रूरत होती है।
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📖 मुहावरों की कहानियाँ50. 'ईंट का जवाब पत्थर से देना'
जब कोई व्यक्ति हमारे साथ बुरा व्यवहार करे और हम भी पलटकर उतना ही बुरा या उससे भी बुरा व्यवहार करें।
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