सोने का हंस — अत्यधिक लालच और जादुई पंखों का रहस्य

बहुत समय पहले की बात है, एक गाँव में एक गरीब औरत अपनी दो बेटियों के साथ रहती थी। उनके पास न तो पैसे थे और न ही खाने के लिए पर्याप्त भोजन। वे बहुत ही मुश्किल से अपना जीवन बिता रही थीं।
उसी गाँव के पास एक बहुत ही सुंदर और जादुई 'सोने का हंस' रहता था। उस हंस के सारे पंख शुद्ध सोने के थे।
एक दिन हंस उस गरीब परिवार के घर के ऊपर से उड़ रहा था। उसने उस गरीब विधवा और उसकी बेटियों की दयनीय हालत देखी। हंस को उन पर बहुत दया आई।
हंस का नेक इरादा: हंस उड़कर उनके घर के आँगन में उतरा। उसे देखकर वे तीनों बहुत हैरान हुईं।
हंस ने इंसानों की आवाज़ में कहा: "नेक औरत, मुझे तुम्हारी गरीबी देखकर बहुत दुख हुआ है। मैं तुम्हारी मदद करना चाहता हूँ। मैं तुम्हें अपना एक 'सोने का पंख' दे रहा हूँ। तुम इसे बाज़ार में बेचकर अपनी ज़रूरत का सामान ले आना। मैं हर कुछ दिनों बाद आऊँगा और तुम्हें अपना एक पंख दे जाया करूँगा, ताकि तुम लोग आराम से रह सको।"
यह कहकर हंस ने अपना एक सोने का पंख गिराया और वहाँ से उड़ गया। औरत ने उस पंख को बाज़ार में बेचा, जिससे उसे बहुत सारे पैसे मिले। अब उनके दिन बदलने लगे। वे अच्छा खाना खाने लगे और अच्छे कपड़े पहनने लगे।
लालच का जन्म: हंस अपने वादे के अनुसार हर कुछ दिनों में आता और एक सोने का पंख दे जाता। धीरे-धीरे वह गरीब परिवार बहुत अमीर हो गया।
परंतु, जैसे-जैसे औरत के पास पैसा आने लगा, उसके मन में 'लालच' बढ़ने लगा। उसे अब इंतज़ार करना पसंद नहीं था।
एक दिन उस औरत ने अपनी बेटियों से कहा: "यह हंस कभी भी यहाँ आना बंद कर सकता है। हम इस पर हमेशा के लिए निर्भर नहीं रह सकते। अगली बार जब यह आएगा, तो मैं इसे पकड़ लूँगी और इसके सारे सोने के पंख एक साथ नोच लूँगी! फिर हम दुनिया के सबसे अमीर लोग बन जाएँगे।"
बेटियों ने अपनी माँ को समझाया: "माँ, ऐसा मत करो। हंस ने हम पर बहुत उपकार किया है, हमें उसे चोट नहीं पहुँचानी चाहिए।" लेकिन लालच में अंधी हो चुकी माँ ने किसी की नहीं सुनी।
अगले दिन जब सोने का हंस उनके आँगन में उतरा, तो औरत ने बहुत ही प्यार से उसे अपने पास बुलाया। जैसे ही हंस पास आया, औरत ने उसे ज़ोर से दबोच लिया!
हंस फड़फड़ाने लगा, लेकिन औरत ने बेरहमी से उसके शरीर के सारे 'सोने के पंख' एक-एक करके नोच लिए।
परंतु, यह क्या! जैसे ही औरत ने लालच और ज़बरदस्ती से उन पंखों को नोचा, वे सारे सोने के पंख तुरंत 'साधारण सफेद पंखों' में बदल गए! उनका सारा जादू और चमक खत्म हो गई।
हंस ने दुखी होकर कहा: "लालची औरत! मेरे पंख केवल तभी तक सोने के रहते हैं, जब मैं उन्हें अपनी 'मर्ज़ी' से खुशी-खुशी देता हूँ। लालच और ज़बरदस्ती से छीने जाने पर ये अपना जादू खो देते हैं। तुमने अपने लालच के कारण अपना सबसे बड़ा हितैषी खो दिया है।"
चुँकि हंस के सारे पंख नोचे जा चुके थे, वह उड़ नहीं सकता था। उसने वहीं आँगन के एक कोने में शरण ली। कुछ हफ्तों बाद जब उसके नए (साधारण) पंख वापस उग आए, तो वह हमेशा के लिए वहाँ से उड़ गया और फिर कभी लौटकर नहीं आया।
औरत के पास जो पैसा था, वह धीरे-धीरे खत्म हो गया और लालच के कारण वह परिवार फिर से उसी गरीबी में पहुँच गया।
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