हंस और घमंडी कौवा — उड़ान का अहंकार और मौत की चुनौती

एक नगर में एक बहुत ही अमीर व्यापारी रहता था। उसके बच्चों ने एक 'कौवे' को पाल रखा था। व्यापारी के घर में बहुत ही स्वादिष्ट और छप्पन प्रकार के भोजन बनते थे। बच्चे रोज़ उस कौवे को अपने भोजन का 'बचा हुआ स्वादिष्ट खाना' खिलाते थे।
घी, मलाई और मिठाइयाँ खा-खाकर कौवा बहुत ही 'मोटा-ताज़ा' हो गया था। उसे लगने लगा कि वह दुनिया का सबसे ताक़तवर और तेज़ उड़ने वाला पक्षी है। उसका अहंकार सातवें आसमान पर था।
एक दिन, मानसरोवर से कुछ बेहद सुंदर और श्वेत 'हंसों' का एक झुंड उस नगर के पास एक झील पर आकर रुका। हंस अपनी लंबी और बिना थके उड़ान भरने की क्षमता के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध थे।
घमंडी कौवे की चुनौती: घमंडी कौवे ने जब उन सुंदर हंसों को देखा, तो वह उनके पास गया और उनका मज़ाक उड़ाते हुए बोला: "अरे ओ सफेद पक्षियो! तुम लोग खुद को बहुत बड़ा उड़ने वाला मानते हो ना? लेकिन क्या तुम मेरी तरह कलाबाज़ियाँ खा सकते हो? मैं हवा में '101 अलग-अलग तरीकों' से उड़ सकता हूँ— कभी गोल-गोल, कभी ऊपर-नीचे, कभी टेढ़ा-मेढ़ा! तुम तो बस एक ही तरीके से उड़ते हो। आओ, मेरे साथ उड़ान की शर्त लगाओ!"
हंस बहुत ही शांत और समझदार थे। उन्होंने कहा: "भाई कौवे! हम मानसरोवर के पक्षी हैं। हम तुम्हारी तरह हवा में करतब नहीं दिखाते। हम तो बस समुद्र और पहाड़ों को पार करने वाली अपनी 'स्वाभाविक लंबी उड़ान' भरते हैं। तुम हमारे साथ मुकाबला मत करो।"
लेकिन कौवा अपनी ज़िद पर अड़ा रहा और उन्हें नीचा दिखाने लगा। अंततः, एक युवा हंस ने उस घमंडी कौवे का अहंकार तोड़ने के लिए उसकी चुनौती स्वीकार कर ली।
मुकाबला शुरू हुआ। तय हुआ कि वे दोनों उड़ते हुए सामने विशाल 'समुद्र' को पार करेंगे।
उड़ान शुरू होते ही कौवे ने अपने '101 तरीके' दिखाना शुरू कर दिया। वह कभी हंस के ऊपर से उड़ता, कभी गोता लगाता, कभी गोल-गोल घूमता और ज़ोर-ज़ोर से काँव-काँव करके हंस का मज़ाक उड़ाता। दूसरी तरफ, हंस बिना कोई आवाज़ किए, अपनी पूरी ताक़त से एक 'सीधी रेखा' में लगातार उड़ता रहा।
कुछ ही देर में दोनों उड़ते-उड़ते गहरे और अनंत 'समुद्र' के ठीक बीचों-बीच पहुँच गए। जहाँ तक नज़र जाती, केवल पानी ही पानी था। न कोई ज़मीन थी, न कोई पेड़!
अब तक हवा में करतब दिखा-दिखाकर कौवा बुरी तरह 'थक चुका था'। उसके पंख भारी होने लगे थे और उसकी साँस फूलने लगी थी। चूँकि नीचे विश्राम करने के लिए कोई पेड़ नहीं था, इसलिए कौवा तेज़ी से समुद्र की उफनती लहरों की तरफ गिरने लगा।
कौवे को अपनी मौत सामने नज़र आने लगी। उधर हंस अपनी स्वाभाविक गति से बिना थके उड़ता जा रहा था।
कौवे ने लहरों से टकराने से ठीक पहले रोते हुए आवाज़ दी: "हे हंस भाई! मुझे बचा लो! मैं डूब रहा हूँ। मैं तो लोगों का बचा हुआ जूठा खाना खाने वाला एक मामूली कौवा हूँ। मुझे माफ़ कर दो, मेरा सारा घमंड टूट गया है।"
हंस बहुत दयालु था। उसे उस मूर्ख कौवे पर दया आ गई। हंस तुरंत नीचे आया, उसने डूबते हुए कौवे को अपनी 'पीठ' पर बिठाया और उसे सुरक्षित वापस ज़मीन पर लाकर छोड़ दिया। कौवे ने फिर कभी जीवन में अपनी उड़ान का घमंड नहीं किया।
📚 शिक्षाप्रद कहानियाँ की और कहानियाँ
अंधा गिद्ध और बिलाव — झूठे अजनबियों पर विश्वास का भयंकर परिणाम
एक अंधे गिद्ध ने एक धूर्त बिलाव की मीठी बातों में आकर उसे पनाह दे दी। बिलाव ने पक्षियों के बच्चों को खाकर गिद्ध को फंसा दिया, जिसका परिणाम बेकसूर गिद्ध की मौत के रूप में सामने आया।
पढ़ें →बूढ़ा बाघ और लालची राहगीर — लालच का दलदल और मौत का फंदा
एक बूढ़े और शातिर बाघ ने सोने के कंगन का लालच देकर एक राहगीर को दलदल में फंसा लिया। राहगीर बाघ के धर्म-कर्म के दिखावे में आकर अपनी जान गँवा बैठा।
पढ़ें →हिरण, कौवा और सियार — सच्चे मित्र की चेतावनी और स्वार्थी का अंत
एक सीधे हिरण ने कौवे की चेतावनी को नज़रअंदाज़ कर एक धूर्त सियार से दोस्ती कर ली। सियार ने हिरण को किसान के जाल में फंसा दिया, लेकिन सच्चे मित्र कौवे ने उसकी जान बचाई और सियार अपने ही बुने जाल में मारा गया।
पढ़ें →सोने का हंस — अत्यधिक लालच और जादुई पंखों का रहस्य
एक जादुई सोने का हंस एक गरीब की मदद करने के लिए उसे सोने के पंख देता था। लेकिन उस औरत के लालच ने उसे सब कुछ छीनकर उसे वापस उसी गरीबी में धकेल दिया।
पढ़ें →बुद्धिमान व्यापारी और मरा हुआ चूहा — शून्य से शिखर तक का सफर
एक गरीब लेकिन चतुर लड़के ने एक मरे हुए चूहे से व्यापार शुरू किया और अपनी सूझ-बूझ से नगर का सबसे अमीर व्यापारी बन गया।
पढ़ें →खरगोश का खौफ: 'आसमान गिर रहा है!' — अफ़वाहों का अंधा तूफान
एक डरपोक खरगोश ने फल गिरने की आवाज़ को आसमान गिरना समझ लिया और पूरे जंगल में अफ़वाह फैलाकर भयंकर भगदड़ मचा दी। शेर ने अपनी सूझबूझ से जानवरों को सच्चाई से अवगत कराया।
पढ़ें →