
📜 पंचतंत्र
विष्णु शर्मा की अमर नीति-कथाएं
99 कहानियाँ
📜 पंचतंत्र1. बंदर और लकड़ी का खूंटा — बिना बुलाए मेहमान और बेवकूफी का परिणाम
एक बंदर ने बढ़ई के छोड़े हुए आधे चिरे लट्ठे में फंसे खूंटे को निकालने की कोशिश की। खूंटा निकलते ही लकड़ी के दोनों हिस्से जुड़ गए और बंदर की पूंछ दबकर उसकी मृत्यु हो गई।
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📜 पंचतंत्र2. सियार और युद्ध का ढोल — अनजाने डर का सामना और हकीकत
एक सियार ने युद्ध के मैदान में पड़े ढोल की आवाज़ सुनकर डरकर भागने की सोची, परंतु जब उसने साहस करके देखा तो पाया कि वह केवल एक खोखला ढोल था जिस पर टहनियाँ टकरा रही थीं।
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📜 पंचतंत्र3. बगुला और केकड़ा — लालच का अंत और केकड़े की समझदारी
एक बूढ़े बगुले ने मछलियों को धोखा देकर उन्हें एक काल्पनिक तालाब में ले जाने का वादा किया। लेकिन चालाक केकड़े ने बगुले की पतली गर्दन को अपने पंजों से कसकर जकड़ लिया और उसकी हत्या करके सबको बचा लिया।
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📜 पंचतंत्र4. चतुर खरगोश और मूर्ख शेर — बुद्धि का बल और कुएं की परछाई
एक खूंखार शेर रोज़ जानवरों को मारता था। खरगोश ने उसे एक कुएं में ले जाकर दिखाया कि वहाँ 'दूसरा शेर' है। शेर ने अपनी ही परछाई को दूसरा शेर समझकर उस पर झपटा और कुएं में गिरकर मर गया।
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📜 पंचतंत्र5. खटमल और जूं की कहानी — बिना सोचे-समझे दी गई शरण और मौत
एक समझदार जूं राजा के बिस्तर पर चुपचाप रहती थी। एक खटमल ने जूं को बहकाया और बिस्तर पर शरण मांगी, फिर राजा को दर्दनाक डंक मार दिया। सेवकों ने बिस्तर छाना, खटमल तो नहीं मिला, लेकिन बेचारी जूं मारी गई।
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📜 पंचतंत्र6. नीला सियार — झूठा दिखावा और असलियत का पर्दाफाश
एक सियार नीले रंग में नहाकर जंगल का राजा बन गया। उसने दूसरे सियारों को तिरस्कार किया। एक रात अपनी बिरादरी की आवाज़ सुनकर उसने सियारों की तरह रेंकना शुरू कर दिया और शेर उसकी असलियत जानकर उसे मार डाला।
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📜 पंचतंत्र7. तीन मछलियां — भविष्य की सोच और समय का फैसला
तीन मछलियों की अलग-अलग सोच। पहली मुसीबत आने से पहले निकल गई, दूसरी ने मौके पर हाज़िरजवाबी से बचाई जान, और तीसरी जो किस्मत के भरोसे बैठी रही, वह मारी गई।
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📜 पंचतंत्र8. बातूनी कछुआ और दो हंस — बिना मांगे सलाह और मूर्खता
एक बातूनी कछुए ने दो हंसों की मदद से लकड़ी की छड़ी पकड़कर उड़ने की योजना बनाई। गाँव वालों को डांटने के लिए मुँह खोलते ही वह नीचे गिरकर मर गया।
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📜 पंचतंत्र9. टिटहरी का जोड़ा और समुद्र — अहंकार का नाश और अदम्य साहस
समुद्र ने टिटहरी के अंडे बहा लिए। नर टिटहरी ने चोंच से पानी निकालकर समुद्र सुखाने की ज़िद की। गरुड़ के डर से समुद्र ने अंडे वापस कर दिए।
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📜 पंचतंत्र10. शेरनी और सियार का बच्चा — स्वभाव की सच्चाई और परवरिश
शेरनी ने सियार के बच्चे को अपने बच्चों के साथ पाला। जब हाथी आया तो सियार का बच्चा कायरता दिखाकर भाग गया, जबकि शेर के बच्चे दहाड़े। शेरनी ने सियार को बता दिया कि वह शेर नहीं है और उसे भाग जाने की सलाह दी।
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📜 पंचतंत्र11. कबूतरों का राजा और बहेलिया — एकता की उड़ान
कबूतरों ने अनाज देखकर लालच में राजा की बात नहीं मानी। बहेलिये के जाल में फंसे। राजा ने एकता से उड़ने की योजना बनाई और सैकड़ों कबूतरों ने जाल उठाकर उड़ गए। चूहे ने जाल कुतरकर उन्हें आज़ाद किया।
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📜 पंचतंत्र12. चार सच्चे मित्र — चूहा, कौवा, हिरण और कछुआ (मित्रता की ताकत)
चार दोस्तों ने मिलकर हिरण को शिकारी के जाल से बचाया। फिर शिकारी आया तो चारों ने एक साथ योजना बनाकर कछुए को भी थैले से आज़ाद करा लिया।
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📜 पंचतंत्र13. ब्राह्मण और नेवला — बिना सोचे-समझे किया गया काम (क्रोध का परिणाम)
नेवले ने बच्चे को सांप से बचाने के लिए सांप को मार डाला। ब्राह्मण की पत्नी ने नेवले का खून से सना मुँह देखकर समझा कि उसने बच्चे को मारा, और उसे घड़े से मार डाला।
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📜 पंचतंत्र14. बंदर और मगरमच्छ — जामुन की मिठास और धोखेबाज़ दोस्त
बंदर ने मगरमच्छ को जामुन खिलाए और दोस्ती हो गई। मगरमच्छ की पत्नी ने बंदर का कलेजा खाने की ज़िद की। मगरमच्छ धोखा देकर बंदर को नदी के बीच ले गया, परंतु बंदर ने चालाकी से बचा ली जान।
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📜 पंचतंत्र15. गधा और बाघ की खाल — दिखावे की हकीकत और असली आवाज़
धोबी ने बाघ की खाल गधे को पहना दी। गधा रात को खेतों में जाकर घास खाने लगा। एक रात असली गधी की आवाज़ सुनकर उसने रेंकना शुरू कर दिया और किसानों ने उसकी पिटाई कर दी।
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📜 पंचतंत्र16. संगीतकार गधा — बेवकूफी का राग और डंडों की ताल
गधे को पेट भर खीरे खाने के बाद गाने का मन किया। सियार ने समझाया परंतु गधा नहीं माना। उसने गाना गाया तो किसानों ने उसकी पिटाई की और गले में पत्थर बांधकर भगाया।
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📜 पंचतंत्र17. ब्राह्मण, चोर और राक्षस — दुश्मनों का झगड़ा और जान की सलामती
ब्राह्मण को दो बछड़े दिए गए। चोर उन्हें चुराने आया और राक्षस ब्राह्मण को खाने आया। दोनों आपस में झगड़ पड़े कि पहले कौन अपना काम करे। शोर से ब्राह्मण जाग गया और मंत्र पढ़कर दोनों को भगा दिया।
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📜 पंचतंत्र18. दो सिर वाला पक्षी (भारुंड पक्षी) — आपसी फूट और प्रतिशोध का ज़हर
भारुंड पक्षी के दो सिर एक ही पेट के साथ रहते थे। पहले सिर ने फल खाकर दूसरे सिर को नहीं दिया। दूसरे सिर ने प्रतिशोध में ज़हरीला फल खा लिया और दोनों मर गए।
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📜 पंचतंत्र19. मूर्ख ब्राह्मण और ठग — झूठ का मायाजाल और कानों का कच्चापन
तीन ठगों ने ब्राह्मण से बकरी चुराने के लिए झूठ बोला कि वह कुत्ता, मरा बछड़ा या गधा है। ब्राह्मण ने अपनी आँखों पर भरोसा न करके झूठ सुन लिया और बकरी फेंककर भाग गया।
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📜 पंचतंत्र20. चतुर चूहा और बिल्ली — संकट की दोस्ती और चालाकी का दांव
चूहे को उल्लू और नेवले ने घेर लिया था। बिल्ली शिकारी के जाल में फंसी हुई थी। चूहे ने बिल्ली से सौदा किया कि वह जाल कुतरेगा और बिल्ली उसे शरण देगी। चूहे ने आखिरी सेकंड पर जाल काटकर दोनों को बचाया।
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📜 पंचतंत्र21. गौरैया और हाथी — कमज़ोरों की एकता और घमंड का अंत
एक घमंडी हाथी ने गौरैया के घोंसले को नीचे गिरा दिया और उसके अंडे तोड़ दिए। गौरैया, कठफोड़वा, मक्खी और मेंढक ने मिलकर हाथी की आँखें फोड़कर उसे सूखे गड्ढे में गिराकर मार डाला।
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📜 पंचतंत्र22. लोहे की तराजू — जैसे को तैसा और चूहे का कमाल
लक्ष्मण ने जीर्णधन की लोहे की तराजू बेच दी और झूठ बोला कि चूहों ने खा ली। जीर्णधन ने उसी की भाषा में जवाब दिया कि बाज़ ने उसके बेटे को उड़ा लिया। राजा को सच्चाई समझ में आई और लक्ष्मण को सज़ा मिली।
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📜 पंचतंत्र23. मूर्ख मित्र — बंदर और राजा की तलवार (चापलूसी का अंत)
राजा ने अपनी तलवार बंदर को सौंपी थी। एक मक्खी राजा की गर्दन पर बैठी, बंदर ने मक्खी मारने के लिए तलवार से वार किया। मक्खी तो उड़ गई, लेकिन राजा की गर्दन कट गई।
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📜 पंचतंत्र24. लालची सियार और धनुष की डोरी — अत्यधिक लालच का अंत
एक शिकारी ने सूअर मारने के लिए तीर चलाया, दोनों एक-दूसरे को मारकर मर गए। एक सियार ने उन्हें देखा। लालच में उसने पहले धनुष की डोरी खाने की सोची। डोरी काटते ही धनुष ने उसकी छाती में छेद कर दिया और वह भी मर गया।
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📜 पंचतंत्र25. चार ब्राह्मण और मरा हुआ शेर — किताबी ज्ञान बनाम व्यावहारिक बुद्धि
तीन विद्वान ब्राह्मणों ने मरे हुए शेर की हड्डियों को जोड़कर मांस चमड़ी और जान डाली। चौथा अनपढ़ दोस्त समझदार था, वह पेड़ पर चढ़ गया। शेर ज़िंदा होकर तीनों विद्वानों को खा गया, चौथा बच गया।
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📜 पंचतंत्र26. मेंढक और सांप — प्राकृतिक शत्रु की सवारी और राजा का अंत
एक बूढ़ा सांप मेंढकों को धोखा देकर उनकी सवारी बन गया। घमंडी मेंढकों के राजा ने छोटे मेंढकों को सांप को खाने दिया। जब छोटे मेंढक खत्म हो गए, तो सांप ने राजा को भी खा लिया।
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📜 पंचतंत्र27. चतुर हंस और मूर्ख उल्लू — बुरी संगति और निर्दोष की जान
एक हंस ने उल्लू से दोस्ती की। राजा ने शिविर लगाया, उल्लू ने रात में चिल्लाया तो राजा के सैनिकों ने तीर चलाया। उल्लू तो भाग गया लेकिन हंस मारा गया।
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📜 पंचतंत्र28. कौवे और उल्लुओं का युद्ध — कूटनीति, धोखा और दुश्मन का विनाश
उल्लुओं ने रात में कौवों पर हमला करके सैकड़ों कौवों को मार दिया। स्थिरजीवी नामक चतुर मंत्री ने घायल होने का नाटक किया। उल्लुओं ने उसे अपनी गुफा में शरण दी। स्थिरजीवी ने गुफा के दरवाज़े पर लकड़ियों का ढेर लगाकर आग लगवा दी।
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📜 पंचतंत्र29. ऊंट, सियार और कौवा — दुष्टों का षड्यंत्र और झूठा बलिदान
शेर भूखा था। सियार, कौवा और तेंदुए ने मिलकर योजना बनाई। उन्होंने शेर के सामने बलिदान का नाटक किया। सीधे ऊंट ने भी अपना बलिदान देने की पेशकश की। सियार और तेंदुए ने तुरंत उस पर हमला किया और शेर ने अपना वचन भुला दिया।
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📜 पंचतंत्र30. चतुर सियार और हाथी — झूठी तारीफ और मौत का दलदल
बूढ़े सियार ने हाथी को राजा बनाने का लालच दिया। झूठी तारीफ सुनकर हाथी का अहंकार जागा। सियार उसे दलदल में ले गया। भारी हाथी धंस गया और सियारों ने उसे खा लिया।
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📜 पंचतंत्र31. बिल्ली और दो चूहे — ढोंगी साधु और विश्वासघात
दो चूहों ने बिल्ली को अपना झगड़ा सुलझाने के लिए बुलाया। बिल्ली ने साधु बनने का ढोंग किया। चूहे उसकी मीठी बातों में आ गए और बिल्ली के पास गए। बिल्ली ने दोनों को खा लिया और रोटी का टुकड़ा भी डकार गई।
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📜 पंचतंत्र32. मूर्ख साधु और ठग — लालच का बोझ और धूर्त शिष्य
साधु ने अपने सारे पैसे सोने के सिक्के खरीदकर पोटली में रखे थे। आषाढ़भूति ने शिष्य बनकर साधु को धोखा दिया। साधु ने स्नान के लिए पोटली शिष्य को दी और वह सोने की पोटली लेकर भाग गया।
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📜 पंचतंत्र33. शेर, चूहा और बिल्ली — ज़रूरत का खेल और अहमियत
शेर के बालों को चूहा कुतरता था। शेर ने बिल्ली को रख लिया। बिल्ली ने चूहे को मार डाला। शेर ने सोचा कि अब बिल्ली की कोई ज़रूरत नहीं है। शेर ने बिल्ली को भगा दिया और वह भूख से तड़पने लगी।
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📜 पंचतंत्र34. धोबी का गधा और कुत्ता — दूसरे के काम में दखल और डंडों की मार
गधा ने कुत्ते से कहा कि चोर आ गया है, भोंको। कुत्ता नहीं भोंका क्योंकि मालिक उसे खाना नहीं देता। गधा ने रेंककर मालिक को जगाया। चोर तो भाग गया, लेकिन धोबी ने गधे की पिटाई की।
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📜 पंचतंत्र35. प्यासा कौवा — मेहनत, सूझबूझ और पानी की तलाश
एक प्यासे कौवे ने घड़े में बहुत नीचे पानी देखा, जहाँ उसकी चोंच नहीं पहुँच पा रही थी। उसने चतुराई से घड़े में कंकड़-पत्थर डाले और पानी का स्तर ऊपर उठाकर अपनी प्यास बुझाई।
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📜 पंचतंत्र36. लालची कुत्ता और हड्डी — परछाई का धोखा और लालच का फल
एक लालची कुत्ते ने पुल पर अपनी परछाई को दूसरा कुत्ता समझकर भोंकने के लिए मुँह खोला, और उसकी हड्डी नीचे नदी में गिर गई। वह न तो दूसरी हड्डी पा सका और न अपनी ही।
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📜 पंचतंत्र37. शेर और चूहा — छोटी सी मदद और जान की सलामती
एक शेर ने एक चूहे को दया करके ज़िंदा छोड़ दिया। बाद में जब शेर बहेलियों के जाल में फँसा, तो उसी छोटे चूहे ने अपने तेज़ दाँतों से रस्सियाँ कुतरकर उसकी जान बचाई।
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📜 पंचतंत्र38. लोमड़ी और खट्टे अंगूर — अपनी नाकामी और झूठा बहाना
एक लोमड़ी अंगूर तोड़ने के लिए कई बार छलांग लगाई, लेकिन पहुँच नहीं पाई। हार मानकर वह वहाँ से चली गई और बहाना बनाया कि अंगूर खट्टे हैं और उसे खाने ही नहीं हैं।
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📜 पंचतंत्र39. सोने का अंडा देने वाली मुर्गी — रातों-रात अमीर बनने का लालच
एक किसान की मुर्गी रोज़ एक सोने का अंडा देती थी। लालच में आकर किसान ने मुर्गी को मारकर उसका पेट चीर डाला, लेकिन उसे अंदर एक भी सोने का अंडा नहीं मिला और वह रातोंरात गरीब हो गया।
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📜 पंचतंत्र40. लकड़हारा और जलपरी — ईमानदारी का सच्चा ईनाम
एक लकड़हारे की लोहे की कुल्हाड़ी नदी में गिर गई। जलपरी ने उसे सोने और चांदी की कुल्हाड़ी दिखाई, लेकिन उसने ईमानदारी से मना कर दिया। खुश होकर जलपरी ने उसे तीनों कुल्हाड़ियां दे दीं।
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📜 पंचतंत्र41. दर्जी और हाथी — जैसा करोगे, वैसा भरोगे (बदले की कीचड़)
एक दर्जी ने गुस्से में हाथी की सूंड में सुई चुभा दी। बदले में हाथी ने नदी से कीचड़ भरकर दर्जी की दुकान और सारे कपड़ों पर गंदा पानी फेंक दिया।
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📜 पंचतंत्र42. मूर्ख गधा और नमक का बोरा — कामचोरी की सज़ा और रुई का बोझ
एक गधा नदी में गिरकर नमक घुलने से बोझ हल्का करता रहा। व्यापारी ने एक दिन रुई के बोरे लाद दिए, जो पानी सोखकर और भी भारी हो गए और गधे को कामचोरी की कड़ी सज़ा मिली।
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📜 पंचतंत्र43. चींटी और टिड्डा — भविष्य की तैयारी और आज का आलस
एक चींटी ने गर्मियों में मेहनत करके भोजन इकट्ठा किया, जबकि टिड्डा बांसुरी बजाता रहा। सर्दियों में जब टिड्डे के पास खाने को कुछ नहीं था, तब उसे अपने आलस पर पछताना पड़ा।
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📜 पंचतंत्र44. किसान और उसके बेटे — लकड़ियों का गट्ठर और एकता का बल
एक किसान ने अपने चार लड़ने वाले बेटों को लकड़ियों का एक गट्ठर तोड़ने को दिया। चारों मिलकर नहीं तोड़ सके, लेकिन अलग-अलग लकड़ियां आसानी से टूट गईं। इससे उन्हें एकता में बल का पाठ पढ़ाया।
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📜 पंचतंत्र45. शहर का चूहा और गांव का चूहा — सादा जीवन और सच्ची शांति
एक शहर के चूहे ने अपने गांव के दोस्त को शहर की आलीशान दावत दिखाई। लेकिन पनीर और केक खाने के दौरान कुत्ते-बिल्लियों के लगातार हमले ने गांव वाले चूहे को यह समझा दिया कि सादा जीवन सबसे बेहतर है।
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📜 पंचतंत्र46. भेड़िया और मेमना — दुष्ट के बहाने और कमज़ोर की बेबसी
एक भेड़िए ने एक मेमने को खाने के लिए झूठे आरोप लगाए—पहले पानी गंदा करने का, फिर पिछले साल गाली देने का। जब मेमने ने तर्कों से जवाब दिए, तो भेड़िए ने बेटे को बाप के पापों की सज़ा देने का बहाना बनाकर उसे खा गया।
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📜 पंचतंत्र47. लोमड़ी और सारस — जैसे को तैसा और दावत का मज़ाक
एक लोमड़ी ने सारस को सूप चपटी प्लेट में देकर मज़ाक उड़ाया। जवाब में सारस ने लोमड़ी को पतले गले वाले बर्तन में सूप दिया, जिसे लोमड़ी नहीं पी सकी और भूखी रही।
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📜 पंचतंत्र48. चींटी और कबूतर — नेकी का बदला और जान की सलामती
एक कबूतर ने पत्ता गिराकर नदी में डूबती चींटी की जान बचाई। कुछ दिन बाद जब बहेलिए ने कबूतर पर निशाना लगाया, तो चींटी ने बहेलिए की एड़ी काटकर उसका निशाना चुका दिया और कबूतर की जान बचा ली।
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📜 पंचतंत्र49. खरगोश और कछुआ — घमंड का अंत और निरंतरता की जीत
एक खरगोश ने कछुए से दौड़ लगाई और बीच में सोने लग गया। कछुआ बिना रुके चलता रहा और फिनिश लाइन पर पहुँचकर माला पहनी। घमंडी खरगोश हार गया।
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📜 पंचतंत्र50. मोर और कौवा — झूठा रूप और अपनों का तिरस्कार
एक कौवे ने मोरों के गिरे हुए पंख लगाकर मोर बनने का नाटक किया और अपने कौवा दोस्तों का तिरस्कार किया। मोरों ने उसे पहचानकर भगा दिया और कौवों ने भी उसे नहीं अपनाया।
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📜 पंचतंत्र51. शेर और मच्छर — झूठा अहंकार और छोटी सूई
एक मच्छर ने शेर को नाक पर डंक मारकर परेशान किया। शेर मच्छर को मारने के चक्कर में अपने ही पंजों से खुद को लहुलुहान कर लिया और हार गया।
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📜 पंचतंत्र52. लोमड़ी और बकरी — बिना सोचे-समझे छलांग और धोखा
एक लोमड़ी गहरे कुएं में गिर गई। उसने मीठे पानी का झूठा वादा करके एक बकरी को कुएं में उतारा, फिर उसकी पीठ पर पैर रखकर बाहर निकल गई और बकरी को भूल गई।
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📜 पंचतंत्र53. भालू और दो दोस्त — संकट की घड़ी और सच्ची मित्रता की पहचान
एक भालू आने पर एक दोस्त पेड़ पर चढ़ गया और दूसरे को अकेला छोड़ गया। दूसरे ने भालू आते देख सांस रोक ली और मरा हुआ नाटक किया, तो भालू चला गया। स्वार्थी दोस्त की पहचान हो गई।
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📜 पंचतंत्र54. कंजूस और उसका सोना — धन का सही उपयोग और पत्थर की कीमत
एक कंजूस ने अपने सोने की ईंट को गड्ढे में छिपा रखा था। एक चोर ने उसे देख लिया और रात को सोना चुरा लिया। पड़ोसी ने कहा कि अगर खर्च नहीं करना था तो सोने और पत्थर में कोई फर्क नहीं है।
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📜 पंचतंत्र55. भेड़िया और सारस — दुष्ट की मदद और अजीब ईनाम
एक भेड़िए के गले में हड्डी फंस गई। उसने ईनाम का वादा करके एक सारस से हड्डी निकलवाई। हड्डी निकलने के बाद भेड़िए ने धमकी दी कि उसे ज़िंदा छोड़ देना ही ईनाम है।
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📜 पंचतंत्र56. गधा और कुत्ता — झूठी नकल और डंडों की मार
एक गधे ने अपने मालिक के कुत्ते को खूंटे से तोड़कर नकल की। वह मालिक की गोद में चढ़ने की कोशिश की, कुर्सी तोड़ दी, और नौकरों से डंडों की बुरी पिटाई खाई।
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📜 पंचतंत्र57. शेर और किसान — अंधा प्यार और ताक़त का छिन जाना
एक शेर ने एक किसान की बेटी से शादी की धमकी दी। किसान ने कहा कि अगर वह अपने नाखून और दांत निकलवा दे तो बेटी मान जाएगी। प्यार में अंधे शेर ने अपनी ताक़त खो दी और किसान ने उसे डंडों से भगा दिया।
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📜 पंचतंत्र58. कौवा और सांप — बुद्धि का बल और दुश्मन का अंत
एक कौवे की अंडे सांप खा जाता था। कौवे ने एक कीमती हार चोरी करके सैनिकों को पेड़ पर आने पर मजबूर किया। जब सैनिकों ने हार लेने के लिए सांप के बिल में लाठी डाली तो सांप ने फन फैलाया और सैनिकों ने उसे मार डाला।
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📜 पंचतंत्र59. लोमड़ी और बाघ — चालाकी का दांव और झूठा खौफ
एक बाघ ने लोमड़ी को पकड़ लिया। लोमड़ी ने कहा कि वह जंगल की राजा है और बाघ को पीछे आने को कहा। जानवर बाघ को देखकर भागे तो बाघ समझा कि लोमड़ी से डर रहे हैं और वह भी डरकर भाग गया।
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📜 पंचतंत्र60. भालू और मधुमक्खियां — एक डंक का गुस्सा और भारी नुकसान
एक भालू को शहद का छत्ता चाहिए था। एक मधुमक्खी ने उसकी नाक पर डंक मारा तो भालू ने पत्थर से छत्ता तोड़ दिया। हज़ारों मधुमक्खियों ने उसे बुरी तरह डंकों से मारा और वह पानी में कूदकर बचा।
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📜 पंचतंत्र61. चींटी और हाथी — घमंड का नाश और सूंड का दर्द
एक घमंडी हाथी ने चींटियों का घर पानी से बिगाड़ दिया। चींटी ने हाथी की सूंड में जाकर ज़ोर-ज़ोर से काटा। हाथी दर्द से पागल होकर रोने लगा और अपना घमंड छोड़कर माफ़ी मांगी।
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📜 पंचतंत्र62. चूहा और मेंढक — बेमेल दोस्ती और घातक मज़ाक
एक मेंढक ने चूहे को धागे से बांधकर तालाब में ले जाकर डुबो दिया। जब चूहे का मुर्दा तैरा तो एक बाज़ ने उसे पकड़ा और मेंढक भी उसके साथ बंधा होने के कारण बाज़ का शिकार बन गया।
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📜 पंचतंत्र63. लोमड़ी और लकड़हारा — कथनी और करनी का अंतर
एक लोमड़ी शिकारियों से भागकर एक लकड़हारे की झोपड़ी में छिपी। लकड़हारे ने मुँह से मना किया लेकिन उंगली से झोपड़ी की ओर इशारा किया। लोमड़ी ने बचने के बाद कहा कि उंगली अगर शब्दों का साथ देती तो धन्यवाद देती।
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📜 पंचतंत्र64. शेर और चार गाएं — एकता की ढाल और फूट का परिणाम
चार गाएं एकता में शेर को हरा रही थीं। शेर ने सियार के ज़रिए उनके बीच फूट डाल दी। एकता टूटने पर शेर ने चारों गायों को अकेले-अकेले मार डाला।
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📜 पंचतंत्र65. कौवा और पानी का घड़ा — जल्दबाज़ी (शॉर्टकट) और धैर्य का अंतर
एक कौवे को घड़े में पानी मिला लेकिन कंकड़ डालकर पीना पड़ता। उसने शॉर्टकट सोचकर घड़ा टेढ़ा कर दिया। घड़ा लुढ़क गया और सारा पानी मिट्टी में सोख लिया गया।
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📜 पंचतंत्र66. लोमड़ी और खरगोश — चतुर दिमाग और जान की बाज़ी
एक लोमड़ी ने खरगोश पकड़ा। खरगोश ने कहा कि वह मोटे खरगोशों की गुफा दिखाएगा। लोमड़ी लालच में आ गई। खरगोश एक संकरे बिल में घुस गया और लोमड़ी का सिर बिल में फंस गया।
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📜 पंचतंत्र67. शेर और भालू — आपसी झगड़ा और तीसरे का फायदा
एक शेर और भालू ने हिरण के बच्चे के लिए लड़ाई की। दोनों थककर और लहूलुहान होकर गिर पड़े। एक सियार आया और उनके सामने से शिकार उठाकर ले गया।
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📜 पंचतंत्र68. गधा और शेर — झूठा दिखावा और असली पहचान
शेर ने गधे को साझीदार बनाया — झाड़ी में छिपकर भयानक आवाज़ निकालो, जानवर डरकर मेरी तरफ भागेंगे। शिकार हो गया। गधा घमंड से बोला: 'क्या मेरी आवाज़ से तुम भी डरे?' शेर ने कहा: 'अगर जानता न होता कि गधा है, तो शायद डर जाता!'
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📜 पंचतंत्र69. कुत्ता और बिल्ली — पुरानी दुश्मनी और खोया हुआ समझौता
कुत्तों और बिल्लियों के बीच एक शांति समझौता था। बिल्ली ने वह दस्तावेज़ संभाला। चूहों ने रात को कागज़ कुतर दिया। कुत्तों ने बिल्ली को धोखेबाज़ समझा — और उसी दिन से दोनों की जन्मजात दुश्मनी शुरू हो गई।
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📜 पंचतंत्र70. लोमड़ी और चींटी — मेहनत का मज़ाक और छोटी चींटी का पलटवार
लोमड़ी ने मेहनती चींटी का मज़ाक उड़ाया — 'तेरी धीमी चाल किस काम की?' बारिश आई, लोमड़ी भूखी-प्यासी दर-दर भटकी। चींटी के बिल के सामने हाथ फैलाए। चींटी बोली: 'जाओ, अपनी तेज़ रफ़्तार से शिकार ढूंढो!'
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📜 पंचतंत्र71. शेर, सियार और गधा — बिना दिल और दिमाग का जानवर
सियार ने गधे को फुसलाया — जंगली गधियाँ इंतज़ार कर रही हैं! शेर का पंजा चूका, गधा भागा। सियार ने फिर झूठ बोला, गधा लौटा — इस बार शेर ने मार डाला। सियार ने दिल-दिमाग खाया। शेर ने पूछा तो बोला: 'इसके पास था ही कहाँ?'
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📜 पंचतंत्र72. भालू और लोमड़ी — फसल का बंटवारा और बुद्धि का खेल
भालू और लोमड़ी ने मिलकर खेती की। लोमड़ी बोली: ऊपर या नीचे, जो चाहो चुनो! पहली बार भालू ने ऊपर चुना — लोमड़ी ने आलू-गाजर बोए थे। दूसरी बार नीचे चुना — लोमड़ी ने गेहूँ बो दिया! भालू को हर बार जड़ें मिलीं।
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📜 पंचतंत्र73. गधा और घोड़ा — स्वार्थ का बोझ और भारी परिणाम
गधे ने घोड़े से आधा बोझ माँगा — घोड़े ने ठुकरा दिया। गधा बोझ तले दबकर मर गया। व्यापारी ने गधे का सारा बोझ और उसकी खाल भी घोड़े पर लाद दी। घोड़े को 'पूरा बोझ' ढोना पड़ा।
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📜 पंचतंत्र74. लोमड़ी और मेंढक — झूठा वैद्य और अपनी बीमारी
मेंढक ने खुद को दुनिया का महान वैद्य बताया — सब बीमारियाँ ठीक करूँगा! लोमड़ी ने पूछा: पहले अपनी झुर्रीदार त्वचा और लंगड़ापन ठीक करो! मेंढक शर्म से तालाब में छिप गया।
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📜 पंचतंत्र75. शेर और लोमड़ी — गुफा के निशान और चतुर दिमाग
बूढ़े शेर ने चाल चली — बीमार होने का नाटक किया, जानवर हालचाल पूछने आते और शेर खा जाता। लोमड़ी ने गुफा के बाहर देखा — पैरों के निशान अंदर जाते हैं, बाहर आते नहीं! लोमड़ी सुरक्षित भाग गई।
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📜 पंचतंत्र76. भालू और चींटी — बालों का घमंड और कान का दर्द
भालू ने चींटी के बिल पर लेटकर कहा — मेरे घने बालों में तुम्हारा डंक नहीं पहुँच सकता! चींटी ने बालों को छोड़ा, सीधे कान में घुस गई। भालू दर्द से पागल होकर भागा और माफ़ी मांगी।
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📜 पंचतंत्र77. गधा और भालू — झूठा खौफ और मूर्खता का अंजाम
जंगल में गधे की आवाज़ से छोटे जानवर डरकर भागते थे। गधे को अहंकार हो गया। भालू आया तो गधा रेंकते हुए डराने दौड़ा। भालू ने एक तमाचा मारा — गधा चारों खाने चित!
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📜 पंचतंत्र78. कुत्ता और सियार — गुलामी की दावत और आज़ादी की भूख
भूखे सियार को मोटे कुत्ते ने दावत का लालच दिया। सियार साथ चलने लगा। रास्ते में गर्दन पर ज़ंजीर का निशान देखा — पूछा तो कुत्ते ने माना कि दिन में बंधा रहता हूँ। सियार बोला: तुम्हारी दावत तुम्हें मुबारक, मुझे आज़ादी ज़्यादा प्रिय है!
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📜 पंचतंत्र79. लोमड़ी और बिल्ली — सौ तरकीबें बनाम एक अचूक तरकीब
लोमड़ी ने डींग मारी — मेरे पास 100 तरकीबें हैं! बिल्ली बोली — मेरे पास बस एक। शिकारी कुत्ते आए — बिल्ली पेड़ पर चढ़ गई। लोमड़ी 100 विकल्पों में उलझती रही और कुत्तों ने मार डाला।
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📜 पंचतंत्र80. शेर और कुत्ता — सुरक्षित स्थान और झूठा साहस
ऊंची छत पर बैठे कुत्ते ने शेर को गालियाँ दीं — हिम्मत है तो आ! शेर बोला: यह गालियाँ तू नहीं, तेरी सुरक्षित छत दे रही है। नीचे आकर बोल। कुत्ते की बोलती बंद हो गई।
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📜 पंचतंत्र81. भालू और कुत्ता — शिकार का शौक और असली परीक्षा
शिकारी कुत्ते ने भालू के पीछे भौंकते हुए पीछा किया — भालू थोड़ा भागा। कुत्ते का हौसला बढ़ा। भालू पलटा, पिछले पैरों पर खड़ा हुआ और दहाड़ा — कुत्ते ने पूंछ दबाई और दोगुनी रफ़्तार से भागा!
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📜 पंचतंत्र82. चींटी और टिड्डी — वर्तमान की मेहनत और कल का आराम
टिड्डी ने पूरी गर्मियां नाच-गाने में बिताईं, चींटी का मज़ाक उड़ाया। सर्दियां आईं — टिड्डी भूखी, चींटी का गोदाम भरा। टिड्डी ने भीख माँगी। चींटी बोली: गर्मियों में गाया — अब सर्दियों में नाचो!
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📜 पंचतंत्र83. लोमड़ी और सियार — बेवकूफी का राग और डंडों की मार
दोनों ने खरबूज़े के खेत में चोरी की। सियार को गाने की ज़िद चढ़ी। लोमड़ी ने मना किया — न माना। लोमड़ी झाड़ी में छिप गई। सियार ने हुआं-हुआं किया — किसान जागा, डंडों से खूब पिटाई हुई!
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📜 पंचतंत्र84. शेर और चींटी — जंगल के राजा की हार और छोटी सी मुसीबत
शेर गहरी नींद में था — चींटी नाक में घुस गई, डंक मारा। शेर दहाड़ा, लोटपोट हुआ, पेड़ से सिर टकराया — चींटी बाहर नहीं निकली। जंगल का राजा एक छोटी सी चींटी के सामने बेबस हो गया।
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📜 पंचतंत्र85. भालू और सियार — झूठी तारीफ और खोया हुआ शिकार
भालू ने सुअर का शिकार किया। भूखे सियार ने तारीफें कीं — आप महान हैं, यह शिकार तो छोटा है! उस झाड़ी में हिरण है। भालू दौड़ा — झाड़ी खाली! लौटा तो शिकार भी गया, सियार भी।
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📜 पंचतंत्र86. कुत्ता और भेड़िया — झूठा वादा और जान की बाज़ी
भेड़िए ने कुत्ते को दबोचा। कुत्ते ने कहा: अभी पतला हूँ, एक हफ्ते बाद शादी की दावत खाकर मोटा हो जाऊँगा — तब आना! भेड़िया मान गया। हफ्ते बाद आया — कुत्ता छत पर बैठा हँस रहा था!
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📜 पंचतंत्र87. लोमड़ी और भालू — बर्फ की नदी और कटी हुई पूंछ
लोमड़ी ने भालू को सिखाया — बर्फ में छेद करो, पूंछ डालो, मछली फँसेगी! भालू ने किया — पूंछ बर्फ में जम गई। झटका मारा — पूंछ बीच से टूट गई! तब से भालू की पूंछ छोटी हो गई।
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📜 पंचतंत्र88. शेर और भेड़िया — चोर के घर चोरी और न्याय का नाटक
भेड़िए ने भेड़ चुराई। रास्ते में शेर मिला — शेर ने भेड़ छीन ली। भेड़िया बोला: यह अन्याय है, मेरी संपत्ति! शेर ने पूछा: विरासत में मिली? खरीदी? उपहार? भेड़िया चुप। चोर को शिकायत का अधिकार नहीं!
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📜 पंचतंत्र89. भालू और भेड़िया — चोरी की दावत और लालच का फंदा
भेड़िए और भालू ने मिलकर किसान के गोदाम में सेंध लगाई। भेड़िया हिसाब से खाता, बीच-बीच में छेद से निकलकर जाँचता। भालू लालच में अंधा हो गया — पेट फूल गया। किसान आया — भेड़िया निकला, भालू छेद में फँसा और पिट गया!
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📜 पंचतंत्र90. गधा और भेड़िया — कांटा निकालने वाला वैद्य और दुलत्ती का वार
भेड़िया गधे को खाने आया। गधे ने पैर में कांटा चुभे होने का नाटक किया — कहा कि खाने से पहले कांटा निकाल लो, वरना गले में फँस जाएगा। भेड़िया पैर के पास झुका और गधे ने ऐसी दुलत्ती मारी कि भेड़िए के आगे के सारे दाँत टूट गए!
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📜 पंचतंत्र91. कुत्ता और बाघ — चतुर कुत्ता, मूर्ख बाघ और चुगलखोर बंदर
बूढ़े कुत्ते ने बाघ को दो बार चकमा दिया — पहले झूठ बोला कि मैंने अभी बाघ खाया, दूसरी बार बंदर की चुगली को उल्टा पलटकर बाघ को भगाया। बंदर ज़मीन पर पटका गया और बाघ जंगल छोड़ भागा!
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📜 पंचतंत्र92. सियार और मुर्गा — शांति का झूठा संदेश और शिकारी कुत्तों का खौफ
सियार ने मुर्गे को नीचे बुलाने के लिए झूठा 'शांति समझौता' बताया। मुर्गे ने पलटवार किया — बोला शिकारी कुत्ते आ रहे हैं जश्न मनाने। सियार डर के भागा। मुर्गे ने पूछा — समझौता हुआ है तो डरते क्यों हो? सियार बोला — कुत्तों को शायद समाचार नहीं मिला!
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📜 पंचतंत्र93. बिल्ली और चूहे — ढोंगी साधु और चूहों का विनाश
बूढ़ी बिल्ली ने तुलसी माला पहनकर तपस्विनी का नाटक किया। चूहे रोज़ सत्संग को आने लगे। बिल्ली हर रोज़ पीछे से एक चूहा दबोच लेती। चूहों के राजा ने मल में बाल देखे — राज़ खुला। अगले दिन सबने भागकर ढोंगी बिल्ली का खेल खत्म कर दिया!
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📜 पंचतंत्र94. गधा और सूअर — मुफ्त की दावत और कसाई का चाकू
गधा रोज़ देखता — सूअर बिना काम के स्वादिष्ट खाना खाता है। गधे को बहुत जलन होती। फिर एक दिन त्योहार आया — किसान कसाई लाया और उस मोटे सूअर को काट डाला। गधे को समझ आई — मुफ्त की दावत की असली कीमत जान ही होती है!
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📜 पंचतंत्र95. शेर और बिल्ली — स्वार्थ की दावत और उपयोगिता का अंत
शेर ने बिल्ली को चूहे भगाने के बदले शाही माँस देने का सौदा किया। बिल्ली जानबूझकर धीरे-धीरे चूहे मारती रही। एक दिन आखिरी चूहा भी मर गया। शेर ने तुरंत बिल्ली को भगा दिया — ज़रूरत खत्म, इज़्ज़त खत्म!
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📜 पंचतंत्र96. चूहों की सभा — बिल्ली के गले में घंटी और खयाली पुलाव
चूहों ने महासभा बुलाई। युवा चूहे ने सुझाया — बिल्ली के गले में घंटी बाँध दो, हमें आहट मिलेगी। सभी खुशी से नाचे। बुज़ुर्ग चूहे ने एक सवाल किया — घंटी बाँधने जाएगा कौन? पूरी सभा में सन्नाटा छा गया!
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📜 पंचतंत्र97. चिड़िया और बंदर — मूर्खों को उपदेश और अपना नुकसान
बारिश में ठंड से काँपते बंदर एक लाल दाने को आग समझकर फूँक मार रहे थे। चिड़िया ने घोंसले से दो बार समझाया। बंदरों को लगा कि चिड़िया उनका अपमान कर रही है। उन्होंने चिड़िया का सुंदर घोंसला नोचकर तबाह कर दिया!
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📜 पंचतंत्र98. हाथी और सियार — झूठी प्रशंसा और कीचड़ का जाल
सियार ने हाथी को राजा बनाने का लालच दिया। घमंडी हाथी बिना सोचे पीछे चल दिया। सियार उसे जानबूझकर दलदल में ले गया — खुद निकल गया, हाथी फँस गया। फिर हँसते हुए बोला — अब हम तेरे मरने का इंतज़ार करेंगे!
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📜 पंचतंत्र99. हाथी और अंधे आदमी — अधूरा सच और नज़रिया
छह नेत्रहीन आदमियों ने हाथी को छूकर पहचाना — किसी को दीवार लगी, किसी को भाला, किसी को सांप, किसी को पेड़, किसी को पंखा, किसी को रस्सी। सब आपस में लड़ने लगे। एक समझदार इंसान ने समझाया — तुम सब सही हो, बस एक-एक हिस्सा देखा है!
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