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📜 पंचतंत्र

चतुर खरगोश और मूर्ख शेर — बुद्धि का बल और कुएं की परछाई

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा5 मिनट का पठन
चतुर खरगोश और मूर्ख शेर — बुद्धि का बल और कुएं की परछाई

एक जंगल में 'भासुरक' नाम का एक बहुत ही खूंखार शेर रहता था। वह जंगल का राजा था, परंतु वह बहुत क्रूर था। वह अपनी भूख मिटाने के लिए रोज़ाना दर्जनों जानवरों को बिना वजह मार डालता था।

जंगल के सभी जानवर परेशान हो गए। एक दिन सबने मिलकर शेर के साथ एक समझौता किया। जानवरों ने कहा: "महाराज! आप रोज़ इतनी मेहनत क्यों करते हैं? हमने तय किया है कि रोज़ाना आपके भोजन के लिए 'एक जानवर' खुद चलकर आपकी गुफा में आ जाएगा। इससे जंगल भी पूरी तरह खाली नहीं होगा और आपको भी आराम मिलेगा।"

शेर को बिना मेहनत के खाना मिलने की बात अच्छी लगी, उसने शर्त मान ली।

खरगोश की बारी: कई दिनों तक यह सिलसिला चलता रहा। एक दिन एक छोटे से खरगोश की बारी आई। वह खरगोश बहुत चतुर था। वह नहीं चाहता था कि कोई उसे खाए। इसलिए वह जानबूझकर शेर की गुफा की ओर बहुत 'धीरे-धीरे' और 'देर से' गया।

जब खरगोश शेर के पास पहुँचा, तो दोपहर ढल चुकी थी। शेर भूख से पागल हो रहा था। इतने छोटे से जानवर को और वह भी इतनी देर से आता देख शेर गरजते हुए बोला: "एक तो तू इतना छोटा है कि तुझसे मेरी भूख नहीं मिटेगी, ऊपर से इतनी देर से आया है! आज मैं जंगल के सारे जानवरों को मार डालूँगा!"

खरगोश की चाल और 'दूसरा शेर': खरगोश ने हाथ जोड़कर कहा: "महाराज, मेरी कोई गलती नहीं है! जानवरों ने मेरे साथ 4 और खरगोश भेजे थे। परंतु रास्ते में हमें एक 'दूसरा बहुत बड़ा शेर' मिल गया। उसने मेरे 4 साथियों को पकड़ लिया और कहा कि 'भासुरक शेर कौन है? अब से मैं इस जंगल का राजा हूँ! जाओ अपने उस भासुरक को बुला लाओ, जो जीतेगा वही राजा बनेगा।'"

यह सुनकर भासुरक शेर का अहंकार जाग उठा। उसने गुस्से में दहाड़ मारते हुए कहा: "कहाँ है वह दुष्ट? मुझे तुरंत उसके पास ले चल!"

खरगोश शेर को जंगल के बीचों-बीच बने एक बहुत ही 'गहरे कुएं' के पास ले गया। खरगोश ने कुएं की ओर इशारा करते हुए कहा, "महाराज! वह डर के मारे इस किले (कुएं) के अंदर छिप गया है।"

भासुरक शेर ने जैसे ही कुएं के अंदर झांका, उसे पानी में अपनी ही 'परछाई' दिखाई दी। शेर ने समझा कि पानी के अंदर सचमुच कोई दूसरा शेर बैठा है।

भासुरक ने गुस्से से ज़ोर की दहाड़ मारी: "रौआअअअअर!" कुएं की गहराई से वही दहाड़ गूंज कर दुगनी आवाज़ के साथ वापस आई।

शेर को लगा कि दूसरा शेर उसे ललकार रहा है। वह अपनी परछाई को मारने के लिए तुरंत उस गहरे कुएं में कूद पड़ा! कुएं की दीवारों से टकराकर और पानी में डूबकर उस मूर्ख शेर की वहीं मौत हो गई।

चतुर खरगोश खुशी-खुशी लौट गया और उसने अपनी बुद्धि से पूरे जंगल को उस अत्याचारी शेर से आज़ाद करा दिया।

नीति / सीख: शारीरिक बल से बड़ा 'बुद्धि का बल' होता है। अक्ल के इस्तेमाल से किसी भी बड़ी से बड़ी मुसीबत या ताकतवर दुश्मन को हराया जा सकता है।

🎉 कहानी समाप्त

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