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📜 पंचतंत्र

तीन मछलियां — भविष्य की सोच और समय का फैसला

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा4 मिनट का पठन
तीन मछलियां — भविष्य की सोच और समय का फैसला

एक बहुत ही सुंदर और गहरे तालाब में तीन मछलियां रहती थीं। वे तीनों पक्की सहेलियां थीं, लेकिन उनका स्वभाव एक-दूसरे से बिल्कुल अलग था।

अनागतविधाता (Proactive): यह बहुत दूरदर्शी थी। यह मुसीबत आने से पहले ही उसका समाधान सोच लेती थी।

प्रत्युत्पन्नमति (Reactive/Presence of mind): यह वर्तमान में जीती थी। मुसीबत आने पर अपनी हाज़िरजवाबी और बुद्धि से तुरंत रास्ता निकाल लेती थी।

यद्भविष्य (Fatalistic): यह भाग्य (किस्मत) के भरोसे रहती थी। इसका मानना था कि 'जो किस्मत में लिखा है, वही होगा, इसलिए मेहनत करने से क्या फायदा।'

एक शाम, कुछ मछुआरे उस तालाब के पास से गुज़रे। उन्होंने तालाब में बहुत सारी मछलियां देखीं और आपस में बात की: "अरे वाह! इस तालाब में तो मछलियां ही मछलियां हैं। कल सुबह हम अपना बड़ा जाल लेकर आएंगे और इन सबको पकड़ लेंगे।"

तीनों का अलग-अलग फैसला: यह बात अनागतविधाता (पहली मछली) ने सुन ली। उसने तुरंत अपनी सहेलियों को बुलाया और कहा: "कल सुबह मछुआरे आएंगे। हमें इसी वक्त इस तालाब को छोड़कर पास की नदी में चले जाना चाहिए।" और वह उसी रात एक छोटी सी नहर के रास्ते दूसरे तालाब में चली गई।

दूसरी मछली (प्रत्युत्पन्नमति) ने कहा: "अभी मुसीबत आई कहाँ है? जब कल मछुआरे जाल डालेंगे, तो मैं अपनी अक्ल का इस्तेमाल करके कोई न कोई रास्ता निकाल ही लूँगी। अभी से क्यों भागना?"

तीसरी मछली (यद्भविष्य) ने हंसते हुए कहा: "तुम दोनों पागल हो। अगर हमारी किस्मत में मरना लिखा है, तो हम कहीं भी चले जाएं, मर ही जाएंगे। और अगर जीना लिखा है, तो यहीं बच जाएंगे। मैं तो अपना घर छोड़कर कहीं नहीं जाऊँगी।"

मछुआरों का जाल: अगली सुबह मछुआरे आए और उन्होंने तालाब में अपना विशाल जाल फेंक दिया। दूसरी और तीसरी, दोनों मछलियां जाल में फंस गईं।

जब मछुआरे जाल को बाहर खींचने लगे, तो दूसरी मछली (प्रत्युत्पन्नमति) ने तुरंत अपनी हाज़िरजवाबी का इस्तेमाल किया। उसने अपनी सांस रोक ली, शरीर को बिल्कुल कड़ा कर लिया और उल्टी होकर पानी में तैरने लगी, मानो वह 'मर चुकी हो'। मछुआरों ने जब उस सड़ी-गली 'मरी हुई' मछली को देखा, तो उन्होंने उसे बेकार समझकर जाल से निकाला और वापस पानी में फेंक दिया। इस तरह उसकी जान बच गई।

परंतु तीसरी मछली (यद्भविष्य), जो किस्मत के भरोसे बैठी थी, जाल में छटपटाती रही। उसने बचने की कोई कोशिश नहीं की। मछुआरों ने उसे पकड़ लिया और वह मारी गई।

नीति / सीख: मुसीबत आने से पहले ही योजना बना लेने वाला (अनागतविधाता) और संकट के समय तुरंत अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करने वाला (प्रत्युत्पन्नमति) हमेशा सुरक्षित रहते हैं। परंतु जो इंसान केवल 'किस्मत' के भरोसे बैठकर आलस करता है, उसका विनाश निश्चित है।

🎉 कहानी समाप्त

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