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📜 पंचतंत्र

नीला सियार — झूठा दिखावा और असलियत का पर्दाफाश

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा4 मिनट का पठन
नीला सियार — झूठा दिखावा और असलियत का पर्दाफाश

चंडराव नाम का एक सियार था। एक दिन वह भोजन की तलाश में जंगल से भटककर पास के एक शहर में पहुँच गया। शहर में घुसते ही आवारा कुत्तों के एक बड़े झुंड ने उसे देख लिया और भौंकते हुए उसके पीछे पड़ गए।

सियार अपनी जान बचाने के लिए गलियों में भागने लगा। भागते-भागते वह एक 'रंगरेज़' (कपड़े रंगने वाले) के घर में घुस गया। वहाँ एक बहुत बड़ा टब रखा था, जिसमें कपड़ों को रंगने के लिए 'नीला रंग' भरा हुआ था। सियार कुत्तों से बचने के लिए उसी नीले रंग के टब में छलांग लगाकर छिप गया।

कुछ देर बाद जब कुत्ते चले गए, तो सियार टब से बाहर निकला। उसने देखा कि उसका पूरा शरीर गहरे नीले रंग का हो गया है!

जंगल का 'नीला राजा': जब वह नीला सियार जंगल में वापस गया, तो उसे देखकर शेर, बाघ, हाथी और अन्य सभी जानवर डर गए। उन्होंने अपनी ज़िंदगी में ऐसा विचित्र 'नीला जानवर' कभी नहीं देखा था। जानवर डर कर भागने लगे।

सियार समझ गया कि सब उससे डर रहे हैं। उसने तुरंत एक चाल चली और ज़ोर से चिल्लाकर कहा: "अरे भाइयो! डरो मत। स्वयं भगवान ब्रह्मा ने मुझे अपने हाथों से यह खास नीला रंग देकर भेजा है। भगवान ने कहा है कि जंगल के जानवर बिना राजा के परेशान हैं, इसलिए आज से मैं, 'ककुद्रुम', तुम्हारा नया राजा हूँ!"

सभी जानवरों ने उसकी बात मान ली। शेर उसका सेनापति बन गया, बाघ पहरेदार और हाथी उसका सेवक। नीले सियार ने सबसे पहला काम यह किया कि उसने अपने सगे संबंधियों यानी 'बाकी सभी सियारों' को बेइज़्ज़त करके अपने दरबार से बाहर निकाल दिया, ताकि कोई उसकी असलियत न पहचान सके। वह शेर और बाघ द्वारा लाए गए शिकार पर मज़े से राज करने लगा।

असलियत का पर्दाफाश: कई महीने बीत गए। एक रात नीला सियार अपने राजसिंहासन पर सो रहा था। अचानक जंगल के बाहर से सियारों के एक बहुत बड़े झुंड के 'हुआँ-हुआँ' करने की आवाज़ आई।

अपनी बिरादरी की आवाज़ सुनकर नीले सियार के अंदर का जन्मजात 'प्राकृतिक स्वभाव' जाग उठा। वह भूल गया कि वह एक 'भगवान का भेजा हुआ राजा' है। वह खुशी के मारे तुरंत अपनी जगह से उठा और अपना सिर ऊपर उठाकर सियारों की तरह ज़ोर-ज़ोर से रेंकने लगा— "हुआँ! हुआँ! हुआँ!"

जैसे ही उसने सियारों वाली आवाज़ निकाली, दरबार में बैठे शेर और बाघ चौंक गए। वे तुरंत समझ गए कि यह कोई भगवान का भेजा हुआ विचित्र जानवर नहीं, बल्कि एक मामूली सियार है जिसने उन्हें रंग लगाकर धोखा दिया है।

शेर ने गुस्से में दहाड़ मारी और एक ही झपट्टे में उस झूठे 'नीले सियार' को फाड़ कर रख दिया।

नीति / सीख: इंसान चाहे कितना भी रूप बदल ले या दिखावा कर ले, उसका 'मूल स्वभाव' कभी नहीं छिपता। जो व्यक्ति अपनों का तिरस्कार करके झूठा दिखावा करता है, उसका अंत नीले सियार जैसा ही होता है।

🎉 कहानी समाप्त

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