लालची कुत्ता और हड्डी — परछाई का धोखा और लालच का फल

एक गांव में एक कुत्ता रहता था। वह बहुत ही लालची था। उसे हमेशा यही लगता था कि उसे दूसरों से ज़्यादा और अच्छा खाना मिलना चाहिए।
एक दिन उसे बहुत ज़ोरों की भूख लगी थी। वह भोजन की तलाश में एक कसाई की दुकान के पास से गुज़रा। वहाँ उसे मांस से लिपटी हुई एक बहुत ही स्वादिष्ट और बड़ी सी 'हड्डी' मिल गई।
कुत्ता बहुत खुश हुआ। उसने हड्डी को अपने मुँह में दबाया और सोचा, "अगर मैं इसे यहीं खाऊंगा, तो दूसरे कुत्ते आ जाएंगे और मुझे उनके साथ बांटना पड़ेगा। मैं इसे लेकर नदी के पार जंगल में जाता हूँ और वहाँ अकेले शांति से बैठकर खाऊंगा।"
नदी का पुल और परछाई: कुत्ता हड्डी मुँह में दबाए गांव से बाहर निकला। रास्ते में एक नदी आई। नदी को पार करने के लिए एक लकड़ी का छोटा सा पुल बना हुआ था।
जब कुत्ता उस पुल को पार कर रहा था, तो अचानक उसकी नज़र नीचे नदी के शांत पानी पर पड़ी। पानी शीशे की तरह साफ था। कुत्ते को पानी के अंदर अपनी ही 'परछाई' दिखाई दी।
लालच का अंधापन: कुत्ता इतना मूर्ख और लालची था कि वह अपनी ही परछाई को नहीं पहचान पाया। उसने सोचा कि पानी के अंदर 'कोई दूसरा कुत्ता' है, जिसके मुँह में भी एक बहुत बड़ी हड्डी है!
कुत्ते के मन में लालच आ गया। उसने सोचा, "अगर मैं इस कुत्ते को डरा कर भगा दूँ, तो इसकी हड्डी भी मुझे मिल जाएगी। फिर मेरे पास दो हड्डियां हो जाएंगी और मैं दावत उड़ाऊंगा!"
उस 'दूसरे कुत्ते' को डराने के लिए, लालची कुत्ते ने ज़ोर से भोंकने के लिए जैसे ही अपना 'मुँह खोला'... छपाक!
मुँह खुलते ही उसके मुँह में दबी हुई असली हड्डी सीधा नीचे नदी के गहरे पानी में जा गिरी और बह गई। पानी में हलचल होने के कारण वह 'दूसरा कुत्ता' (परछाई) भी गायब हो गया।
लालची कुत्ता पुल पर खड़ा-खड़ा नदी को देखता रह गया। अपनी ही लालच के कारण उसने वह हड्डी भी खो दी जो उसके पास पहले से थी, और उसे भूखे पेट ही घर लौटना पड़ा।
नीति / सीख: लालच बुरी बला है। इंसान को अपने पास मौजूद चीज़ों में संतुष्ट रहना चाहिए। दूसरों की चीज़ें छीनने के लालच में इंसान हमेशा अपना सब कुछ खो बैठता है।
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