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📜 पंचतंत्र

भालू और कुत्ता — शिकार का शौक और असली परीक्षा

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा4 मिनट का पठन
भालू और कुत्ता — शिकार का शौक और असली परीक्षा

एक शिकारी के पास एक बहुत ही तेज़ दौड़ने वाला 'शिकारी कुत्ता' था। वह कुत्ता अक्सर खरगोशों और हिरणों का पीछा करने में बहुत माहिर था। उसे अपनी इस रफ़्तार और शिकार करने की कला पर बहुत घमंड था।

एक दिन शिकारी और उसका कुत्ता घने जंगल में गए। अचानक कुत्ते ने देखा कि कुछ दूरी पर एक विशालकाय 'भालू' आराम से चल रहा है।

कुत्ते ने सोचा कि आज इस बड़े जानवर का शिकार करके वह अपने मालिक को खुश कर देगा। कुत्ता ज़ोर-ज़ोर से भोंकता हुआ पूरी ताकत से भालू के पीछे दौड़ पड़ा।

भालू का पलटवार: भालू को लगा कि कोई छोटा-मोटा जानवर पीछे आ रहा है, इसलिए वह पहले तो थोड़ा सा दौड़ा। कुत्ते को लगा कि भालू उससे डर कर भाग रहा है। कुत्ते का हौसला और बढ़ गया और वह और ज़ोर से भोंकने लगा।

परंतु कुछ दूर भागने के बाद भालू को चिढ़ होने लगी। भालू अचानक रुक गया। वह पीछे मुड़ा और अपने पिछले दोनों पैरों पर 'खड़ा' हो गया।

अपने विशालकाय शरीर को फैलाकर भालू ने अपने भयानक पंजे उठाए और कुत्ते की आँखों में आँखें डालकर एक इतनी खूंखार 'दहाड़' मारी कि पूरा जंगल गूंज उठा!

भालू का वह भयानक और विशाल रूप देखकर कुत्ते की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। उसका सारा घमंड और शिकार का शौक पल भर में उड़ गया।

कुत्ते ने अपनी पूंछ दोनों पैरों के बीच में दबाई, मुँह बंद किया और जिस रफ़्तार से वह भालू के पीछे भागा था, उससे 'दोगुनी रफ़्तार' से वह वापस अपने मालिक के पास भाग गया।

मालिक ने कुत्ते की यह हालत देखकर हंसते हुए कहा: "जो दुश्मन तुमसे डर कर भाग रहा हो, उस पर भौंकना बहुत आसान है। असली परीक्षा तो तब होती है जब दुश्मन पलट कर तुम्हारी आँखों में देखे।"

नीति / सीख: कमज़ोर या भागते हुए दुश्मन पर बहादुरी दिखाना बहुत आसान है। इंसान के असली साहस की परीक्षा केवल तभी होती है, जब मुसीबत पलटकर उसका आमना-सामना करती है।

🎉 कहानी समाप्त

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