शेर और कुत्ता — सुरक्षित स्थान और झूठा साहस

एक गांव के बाहरी हिस्से में एक बहुत ऊंचे और सुरक्षित घर की छत पर एक कुत्ता बैठा था। वह घर इतना ऊंचा था कि नीचे से कोई भी जंगली जानवर सीधे छत पर नहीं पहुँच सकता था।
शाम का समय था। तभी कुत्ते ने देखा कि जंगल का राजा 'शेर' शांति से सड़क के रास्ते से गुज़र रहा है।
कुत्ते को यह बात अच्छी तरह पता थी कि वह छत पर बिल्कुल सुरक्षित है और शेर उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इस 'सुरक्षित स्थान' के कारण कुत्ते के अंदर झूठा साहस और अहंकार जाग उठा।
कुत्ते का दुस्साहस: कुत्ते ने छत के किनारे आकर ज़ोर-ज़ोर से शेर पर भोंकना शुरू कर दिया। वह इतने पर ही नहीं रुका, उसने शेर का अपमान करते हुए कहा: "अरे ओ खूंखार जानवर! तू खुद को जंगल का राजा कहता है? हिम्मत है तो यहाँ आ, मैं तुझे तेरी असलियत दिखा दूँगा। तू तो एक डरपोक बिल्ली है!"
शेर ने अचानक यह आवाज़ सुनी। वह रुक गया और उसने शांति से ऊपर छत की तरफ देखा।
शेर का करारा जवाब: शेर बिल्कुल भी क्रोधित नहीं हुआ। उसने एक गहरी सांस ली और बहुत ही शांत लेकिन दमदार आवाज़ में कुत्ते से कहा: "अरे कुत्ते! मैं तेरी इन कड़वी बातों का बुरा नहीं मान रहा हूँ। मैं जानता हूँ कि यह गालियां तू मुझे नहीं दे रहा है, बल्कि यह 'ऊंची और सुरक्षित छत' दे रही है जिस पर तू खड़ा है।"
शेर ने आगे कहा: "अगर तू सच में इतना ही बहादुर है, तो ज़रा नीचे ज़मीन पर आकर यही बातें मेरे सामने बोल। फिर मैं तुझे बताऊँगा कि राजा कौन है। सुरक्षित जगह पर बैठकर दुश्मन को ललकारना कायरों की निशानी है।"
यह सुनकर कुत्ते की बोलती बंद हो गई। शेर शान से अपने रास्ते चला गया और कुत्ता चुपचाप छत के कोने में दुबक कर बैठ गया।
नीति / सीख: किसी भी कायर इंसान को अगर कोई ऊंचा पद या 'सुरक्षित स्थान' मिल जाए, तो वह खुद को बहुत ताक़तवर समझने लगता है। लेकिन असली बहादुरी सुरक्षित जगह पर बैठकर बातें बनाने में नहीं, बल्कि मैदान में सामने खड़े होने में है।
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