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📜 पंचतंत्र

भेड़िया और मेमना — दुष्ट के बहाने और कमज़ोर की बेबसी

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा4 मिनट का पठन
भेड़िया और मेमना — दुष्ट के बहाने और कमज़ोर की बेबसी

एक जंगल से होकर एक बहुत ही साफ पानी की नदी बहती थी। एक दिन गर्मियों की दोपहर में एक छोटा सा, भोला-भाला 'मेमना' (भेड़ का बच्चा) अपने झुंड से अलग होकर नदी पर पानी पीने आया।

तभी नदी के ऊपरी हिस्से की तरफ से एक खूंखार और भूखा 'भेड़िया' वहाँ आ पहुँचा।

भेड़िए ने जब उस छोटे से गोल-मटोल मेमने को देखा, तो उसके मुँह में पानी आ गया। उसने मेमने को मारकर खाने का फैसला कर लिया। परंतु भेड़िया नहीं चाहता था कि जंगल के दूसरे जानवर उसे बिना किसी वजह के क्रूर कहें। इसलिए उसने मेमने को मारने के लिए एक 'झूठा बहाना' ढूंढने की तरकीब सोची।

भेड़िए के झूठे आरोप: भेड़िया गुस्से का नाटक करते हुए मेमने के पास गया और ज़ोर से गुर्राकर बोला: "अरे ओ मूर्ख मेमने! तेरी इतनी हिम्मत कि तू मेरे पीने के पानी को गंदा कर रहा है? तू अपने गंदे पैरों से कीचड़ उछाल रहा है और मुझे पीने के लिए गंदा पानी मिल रहा है!"

बेचारा मेमना बहुत डर गया। उसने कांपते हुए बहुत विनम्रता से कहा: "श्रीमान जी, आप शायद गलत समझ रहे हैं। आप नदी के ऊपरी हिस्से (ऊंचाई) पर खड़े हैं और मैं आपसे नीचे खड़ा हूँ। पानी आपकी तरफ से बहकर 'नीचे' मेरी तरफ आ रहा है। मैं आपके पानी को कैसे गंदा कर सकता हूँ?"

मेमने का तर्क बिल्कुल सही था। भेड़िया थोड़ा झेंप गया, लेकिन वह रुकने वाला नहीं था। उसने तुरंत दूसरा बहाना बनाया: "अच्छा! तो तू बहुत समझदार बनता है? मुझे याद आ गया! आज से ठीक एक साल पहले, तूने इसी जगह पर खड़े होकर मुझे गालियां दी थीं और मेरा अपमान किया था!"

मेमना अब और भी हैरान हो गया। उसने रोते हुए कहा: "हुज़ूर! यह कैसे हो सकता है? मेरी उम्र तो अभी केवल छह महीने है। एक साल पहले तो मेरा जन्म भी नहीं हुआ था, मैं आपको गालियां कैसे दे सकता हूँ?"

दुष्ट का न्याय: भेड़िया समझ गया कि तर्कों में वह इस मेमने से नहीं जीत सकता। दुष्ट लोग अंततः अपनी क्रूरता पर ही उतर आते हैं।

भेड़िया ने अपनी भयानक आंखें लाल कीं, अपने दांत दिखाए और दहाड़ते हुए कहा: "अगर वह तू नहीं था, तो पक्का तेरा बाप रहा होगा! और बेटे को अपने बाप के किए गए अपराधों की सज़ा तो भुगतनी ही पड़ेगी!"

यह कहकर भेड़िए ने बिना कोई और बात सुने उस बेकसूर और छोटे से मेमने पर छलांग लगा दी और एक ही झटके में उसे चीर-फाड़ कर खा गया।

नीति / सीख: जो लोग जन्म से दुष्ट होते हैं, वे अपनी क्रूरता और अत्याचार को सही ठहराने के लिए हमेशा कोई न कोई झूठा 'बहाना' ढूंढ ही लेते हैं। दुष्टों के सामने मासूमियत और सही तर्क का कोई मोल नहीं होता।

🎉 कहानी समाप्त

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