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📜 पंचतंत्र

भेड़िया और सारस — दुष्ट की मदद और अजीब ईनाम

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा4 मिनट का पठन
भेड़िया और सारस — दुष्ट की मदद और अजीब ईनाम

एक बार एक खूंखार भेड़िया बहुत भूखा था। उसे एक जानवर का शिकार मिल गया और वह लालच में उसे बहुत जल्दी-जल्दी, बिना चबाए खाने लगा।

जल्दी-जल्दी खाने के चक्कर में शिकार की एक बहुत बड़ी और नुकीली 'हड्डी' भेड़िए के गले में बुरी तरह फंस गई।

भेड़िया दर्द से तड़पने लगा। न तो वह हड्डी निगल पा रहा था और न ही उगल पा रहा था। उसे सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी। वह मदद के लिए जंगल में इधर-उधर भागने लगा।

सारस से मदद की गुहार: भागते-भागते उसे एक सारस मिला। सारस की गर्दन और चोंच बहुत लंबी होती है।

भेड़िए ने गिड़गिड़ाते हुए सारस से कहा: "अरे भाई सारस! मेरे गले में एक हड्डी फंस गई है, मैं दर्द से मर रहा हूँ। तुम्हारी चोंच बहुत लंबी है। कृपया अपना सिर मेरे मुँह में डालकर वह हड्डी बाहर निकाल दो। अगर तुम मेरी जान बचाओगे, तो मैं तुम्हें एक बहुत बड़ा 'ईनाम' दूँगा।"

सारस को पहले तो डर लगा कि कहीं भेड़िया उसे ही न खा जाए। लेकिन ईनाम के लालच और भेड़िए की दयनीय हालत देखकर सारस मदद के लिए तैयार हो गया।

अजीब ईनाम: भेड़िए ने अपना मुँह पूरा खोल दिया। सारस ने अपनी लंबी गर्दन और चोंच भेड़िए के खूंखार मुँह के अंदर डाली और बड़ी ही सावधानी से वह फंसी हुई हड्डी पकड़ कर बाहर निकाल ली।

हड्डी निकलते ही भेड़िए की जान में जान आई।

सारस ने खुश होकर कहा: "मैंने तुम्हारी जान बचा ली है। अब लाओ, मेरा ईनाम मुझे दो!"

यह सुनते ही भेड़िए ने अपने भयानक दांत दिखाए, वह ज़ोर से गुर्राया और बोला: "ईनाम? क्या तू पागल हो गया है? एक तो तूने अपना 'सिर' एक खूंखार भेड़िए के मुँह के अंदर डाला, और मैंने उसे बिना चबाए सुरक्षित 'ज़िंदा बाहर निकालने दिया'... क्या यह तेरे लिए सबसे बड़ा ईनाम नहीं है? जा भाग यहाँ से, वरना अभी तुझे खा जाऊँगा!"

सारस घबराकर वहां से उड़ गया। उसे समझ आ गया कि दुष्टों की मदद करना हमेशा खतरे से खाली नहीं होता।

नीति / सीख: दुष्ट और विश्वासघाती लोगों से कभी भी कृतज्ञता या ईनाम की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। दुष्ट इंसान की जान बचाकर भी आप उससे केवल धोखे की ही उम्मीद कर सकते हैं।

🎉 कहानी समाप्त

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