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📜 पंचतंत्र

गधा और कुत्ता — झूठी नकल और डंडों की मार

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा4 मिनट का पठन
गधा और कुत्ता — झूठी नकल और डंडों की मार

एक गांव में एक व्यापारी रहता था। उसके पास दो जानवर थे— सामान ढोने के लिए एक गधा और घर में खेलने के लिए एक छोटा सा पालतू 'कुत्ता'।

कुत्ता बहुत ही प्यारा और चंचल था। वह सारा दिन घर के अंदर रहता, अपने मालिक के साथ खेलता और जब मालिक घर लौटता, तो कुत्ता दौड़कर उसकी 'गोद' में चढ़ जाता और उसका चेहरा चाटने लगता। मालिक भी खुश होकर कुत्ते को प्यार करता और उसे अपने साथ बैठकर स्वादिष्ट खाना खिलाता।

दूसरी ओर, गधे को सारा दिन घर के बाहर खूंटे से बंधा रहना पड़ता था। वह दिन भर कड़ी धूप में भारी सामान ढोता और शाम को उसे खाने के लिए केवल सूखी घास ही मिलती थी।

गधे की गलत सोच: गधा रोज़ खिड़की से कुत्ते को मालिक की गोद में खेलते और अच्छा खाना खाते हुए देखता था। उसे कुत्ते से बहुत जलन होने लगी।

गधे ने सोचा: "यह कुत्ता कोई काम नहीं करता, फिर भी मालिक इसे इतना प्यार करता है। अगर मैं भी इस कुत्ते की तरह बर्ताव करूँ— दौड़कर मालिक की गोद में चढ़ जाऊँ और उसे चाटूँ— तो मालिक मुझे भी बहुत प्यार करेगा और अच्छा खाना देगा!"

अंधी नकल का परिणाम: एक दिन शाम को जब मालिक थका-हारा घर लौटा और कुर्सी पर बैठा, तो गधे ने अपनी योजना पर अमल करने की ठानी। गधा अपनी रस्सी तुड़वाकर तेज़ी से घर के अंदर घुसा।

मालिक कुछ समझ पाता, उससे पहले ही गधे ने अपने 'दोनों भारी अगले पैर' मालिक के कंधों पर रख दिए और उसे चाटने की कोशिश करने लगा!

गधा इतना भारी था कि कुर्सी टूट गई और मालिक ज़मीन पर गिर पड़ा। गधे के खुरों से मालिक को बहुत चोट लगी और वह डर के मारे ज़ोर से चिल्लाने लगा— "बचाओ! बचाओ! यह गधा पागल हो गया है!"

मालिक की आवाज़ सुनकर नौकर डंडे लेकर दौड़े आए। उन्होंने देखा कि गधा मालिक के ऊपर चढ़ा हुआ है। नौकरों ने गधे को वहां से घसीट कर बाहर निकाला और उसकी डंडों से इतनी बुरी तरह पिटाई की कि गधा कई दिनों तक खड़ा नहीं हो पाया।

नीति / सीख: दूसरों की 'अंधी नकल' कभी नहीं करनी चाहिए। ईश्वर ने सबको अलग-अलग काम और स्वभाव दिया है। जो काम किसी एक के लिए अच्छा है, वह दूसरे के लिए विनाशकारी भी हो सकता है।

🎉 कहानी समाप्त

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