चार सच्चे मित्र — चूहा, कौवा, हिरण और कछुआ (मित्रता की ताकत)

एक घने जंगल में एक बहुत ही सुंदर झील थी। उस झील के किनारे चार पक्के दोस्त रहते थे— हिरण, कौवा, चूहा और कछुआ। चारों का स्वभाव और आकार बिल्कुल अलग था, लेकिन उनकी दोस्ती में बहुत प्यार और एकता थी। वे रोज़ दोपहर को एक पेड़ के नीचे मिलते और सुख-दुख की बातें करते।
एक दिन कौवा, चूहा और कछुआ तो तय समय पर पेड़ के नीचे पहुँच गए, परंतु 'हिरण' नहीं आया। शाम होने लगी, लेकिन हिरण का कोई अता-पता नहीं था। दोस्तों को चिंता होने लगी।
कौवे ने कहा: "मैं आसमान में उड़कर देखता हूँ कि हमारा मित्र किस मुसीबत में है।"
कौवा जंगल के ऊपर उड़ा। कुछ दूर जाने पर उसने देखा कि हिरण एक शिकारी के 'मज़बूत जाल' में बुरी तरह फंसा हुआ है और रो रहा है।
कौवा तुरंत वापस आया और चूहे व कछुए को सारी बात बताई।
दोस्ती का इम्तिहान: चूहे ने कहा: "मुझे तुरंत वहाँ ले चलो, मैं अपने तेज़ दांतों से जाल काट दूँगा।" कौवे ने चूहे को अपनी पीठ पर बिठाया और तुरंत हिरण के पास पहुँच गया। चूहे ने अपने तेज़ दांतों से कुछ ही मिनटों में पूरा जाल कुतर दिया और हिरण को आज़ाद कर दिया।
तीनों दोस्त खुशी से गले मिल रहे थे कि तभी वहाँ 'कछुआ' भी रेंगते-रेंगते पहुँच गया। हिरण ने घबराकर कहा: "कछुए भाई! तुम यहाँ क्यों आए? अगर शिकारी आ गया, तो हम तीनों तो भाग जाएंगे, लेकिन तुम तो बहुत धीरे चलते हो, तुम कैसे बचोगे?"
शिकारी की वापसी और अद्भुत योजना: हिरण की बात सच हो गई। उसी समय शिकारी वहाँ आ पहुँचा।
शिकारी को देखते ही कौवा पेड़ पर उड़ गया, चूहा बिल में घुस गया और हिरण छलांग लगाकर झाड़ियों में भाग गया। बेसहारा कछुआ भाग नहीं सका और शिकारी ने उसे पकड़कर अपने थैले में डाल लिया।
शिकारी अपना जाल कटा हुआ देखकर बहुत गुस्से में था। उसने सोचा, "हिरण तो भाग गया, चलो आज इस कछुए का ही सूप बनाकर पीऊँगा।"
अपने दोस्त को शिकारी के थैले में जाते देख, हिरण, कौवे और चूहे ने तुरंत एक योजना बनाई।
योजना के अनुसार, शिकारी के रास्ते में कुछ दूरी पर 'हिरण' ऐसे लेट गया जैसे वह 'मर गया हो', और कौवा उसके सिर पर बैठकर उसकी आँखें नोंचने का नाटक करने लगा।
जब शिकारी ने मरे हुए हिरण को देखा, तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने सोचा, "वाह! मेरा शिकार खुद ही मरा पड़ा है।" शिकारी ने कछुए वाला 'थैला' ज़मीन पर रखा और हिरण की तरफ दौड़ा।
जैसे ही शिकारी थैले से दूर हुआ, 'चूहे' ने चुपके से आकर थैले की रस्सी कुतर दी। कछुआ तुरंत थैले से बाहर निकला और खिसक कर पास की झील के गहरे पानी में छिप गया।
उधर, जैसे ही शिकारी हिरण के बिल्कुल करीब पहुँचा, कौवा ज़ोर से कांव-कांव करके उड़ गया और हिरण भी बिजली की फुर्ती से उठकर घने जंगल में गायब हो गया!
शिकारी हक्का-बक्का रह गया। वह निराश होकर वापस अपना थैला उठाने आया, तो देखा कि थैला भी कटा हुआ है और कछुआ भी गायब है!
नीति / सीख: सच्चे मित्र मुसीबत के समय कभी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ते। अगर दोस्त मिलकर काम करें और अपनी अलग-अलग योग्यताओं का सही इस्तेमाल करें, तो बड़ी से बड़ी मुसीबत को भी आसानी से मात दी जा सकती है।
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