कबूतरों का राजा और बहेलिया — एकता की उड़ान

एक जंगल में एक बहुत बड़ा बरगद का पेड़ था। उस पेड़ पर सैकड़ों कबूतर अपने राजा 'चित्रग्रीव' के साथ रहते थे। चित्रग्रीव बहुत ही बुद्धिमान और दूरदर्शी नेता था।
एक दिन सुबह-सुबह सारे कबूतर भोजन की तलाश में उड़े। काफी दूर उड़ने के बाद, छोटे कबूतरों ने ज़मीन पर बहुत सारा 'अनाज' बिखरा हुआ देखा।
लालच में आकर सभी कबूतर अनाज खाने के लिए नीचे उतरने की ज़िद करने लगे। राजा चित्रग्रीव ने उन्हें चेतावनी दी: "रुको! इस सुनसान जंगल में इतना सारा अनाज कहाँ से आया? मुझे इसमें कोई बहुत बड़ा खतरा महसूस हो रहा है। नीचे मत उतरो।"
परंतु कबूतर भूख से बेहाल थे। उन्होंने अपने राजा की बात नहीं मानी और अनाज खाने के लिए ज़मीन पर उतर गए। चित्रग्रीव को भी मजबूरन अपने दल के साथ नीचे उतरना पड़ा।
बहेलिए का जाल: जैसे ही वे अनाज खाने लगे, अचानक उनके ऊपर एक बहुत बड़ा 'जाल' आ गिरा! एक बहेलिए ने उन्हें पकड़ने के लिए वह अनाज का दाना डाला था।
सभी कबूतर जाल में बुरी तरह फंस गए। बहेलिए को अपनी ओर आता देख वे डर के मारे फड़फड़ाने लगे। कोई दाईं ओर उड़ने की कोशिश कर रहा था, तो कोई बाईं ओर। सब अलग-अलग दिशाओं में ज़ोर लगा रहे थे, जिससे जाल और उलझता जा रहा था। वे रोने लगे कि अब बहेलिया उन्हें मार डालेगा।
एकता का बल: राजा चित्रग्रीव ने ज़ोर से चिल्लाकर कहा: "शांत हो जाओ! अगर तुम सब अलग-अलग दिशाओं में भागोगे, तो कभी नहीं बच पाओगे। मेरी बात ध्यान से सुनो। हमें अपनी पूरी ताकत एक ही दिशा में लगानी होगी। जब मैं 'उड़ो' कहूँगा, तो तुम सब एक साथ अपने पूरे ज़ोर से ऊपर की ओर आसमान में उड़ना!"
कबूतरों ने बात मान ली। चित्रग्रीव ने ज़ोर से आवाज़ दी: "एक... दो... तीन... उड़ो!"
सैकड़ों कबूतरों ने जब एक साथ ऊपर की ओर ज़ोर लगाया, तो उनकी 'सामूहिक ताकत' के सामने भारी जाल भी हल्का पड़ गया। वे सभी उस भारी जाल को लेकर एक साथ आसमान में उड़ गए!
बहेलिया यह चमत्कार देखकर हैरान रह गया। वह कुछ दूर तक उनके पीछे भागा, परंतु कबूतर बादलों के पार निकल गए।
राजा चित्रग्रीव उन्हें लेकर अपने एक पुराने मित्र 'हिरण्यक' (एक चूहे) के पास गया। चूहे ने अपने तेज़ दांतों से वह सारा जाल कुतर दिया और सभी कबूतरों को आज़ाद कर दिया।
नीति / सीख: "एकता में ही बल है"। अगर परिवार या टीम आपस में लड़कर अलग-अलग दिशा में भागे, तो विनाश तय है। परंतु यदि सब मिलकर एक साथ संकट का सामना करें, तो बड़ी से बड़ी मुसीबत के जाल को भी उखाड़ कर फेंका जा सकता है।
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