धोबी का गधा और कुत्ता — दूसरे के काम में दखल और डंडों की मार

एक धोबी के पास दो जानवर थे— कपड़े ढोने के लिए एक गधा और घर की रखवाली के लिए एक कुत्ता। गधा दिन भर काम करता था, लेकिन कुत्ता सारा दिन आंगन में सोता रहता था।
धोबी बहुत कंजूस था। वह कुत्ते को पेट भर खाना भी नहीं देता था। कुत्ते के मन में अपने मालिक के प्रति कोई वफादारी नहीं बची थी।
एक रात सर्दियों का समय था। धोबी गहरी नींद में सो रहा था। तभी उसके घर की दीवार फांदकर एक चोर अंदर घुस आया।
कुत्ता जाग रहा था। उसने चोर को देखा, लेकिन वह बिल्कुल चुप रहा। उसने 'भोंकना' शुरू नहीं किया।
गधे की नसीहत: गधे ने कुत्ते से कहा: "अरे मित्र! तुम भोंक क्यों नहीं रहे हो? घर में चोर घुस आया है। जल्दी से भोंक कर मालिक को जगाओ, वरना वह सब कुछ लूट कर ले जाएगा।"
कुत्ते ने बहुत ही रूखे स्वर में जवाब दिया: "तुम अपना काम करो, मुझे मेरा काम मत सिखाओ। मालिक मुझे ठीक से खाना नहीं देता, न ही मेरी कोई परवाह करता है। जब कल सुबह उसका सामान चोरी हो जाएगा, तब उसे मेरी कीमत (अहमियत) समझ आएगी। मैं तो नहीं भोंकूंगा।"
गधे को यह बात अच्छी नहीं लगी। उसने कहा: "तुम बहुत नमकहराम हो। मुसीबत के समय मालिक की रक्षा करना हमारा फर्ज़ है। अगर तुम नहीं भोंकोगे, तो मैं ही मालिक को जगाऊँगा!"
गधे का 'अलार्म': गधे ने अपनी पूरी ताकत लगाई और रात के सन्नाटे में ज़ोर-ज़ोर से रेंकना शुरू कर दिया— "ढेंचू! ढेंचू! ढेंचू!"
गधे की उस भयानक और तेज़ आवाज़ को सुनकर चोर डर गया कि कहीं लोग न जाग जाएं। वह दीवार फांदकर बिना कुछ चुराए भाग गया।
इतने शोर से धोबी की नींद टूट गई। रात के बीचों-बीच अपनी नींद खराब होने से धोबी का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उसने बाहर आकर देखा तो कोई चोर नहीं था, बस गधा ज़ोर-ज़ोर से रेंक रहा था।
धोबी ने पास पड़ा एक बहुत भारी 'मोटा डंडा' उठाया और बिना कुछ सोचे-समझे उस बेकसूर गधे की इतनी भयंकर पिटाई की कि गधा अधमरा होकर ज़मीन पर गिर पड़ा।
कुत्ते ने दूर से यह सब देखा और मन ही मन सोचा: "जो इंसान दूसरे का काम अपने सिर लेता है, उसका यही हाल होता है।"
नीति / सीख: "जिसका काम उसी को साजे, और करे तो डंडा बाजे।" यानी, जो काम आपका नहीं है, उसमें बिना मांगे दखल नहीं देना चाहिए। दूसरे की ज़िम्मेदारी अपने सिर पर लेने से अक्सर बिना वजह का नुकसान ही भुगतना पड़ता है।
📜 पंचतंत्र की और कहानियाँ
बंदर और लकड़ी का खूंटा — बिना बुलाए मेहमान और बेवकूफी का परिणाम
एक बंदर ने बढ़ई के छोड़े हुए आधे चिरे लट्ठे में फंसे खूंटे को निकालने की कोशिश की। खूंटा निकलते ही लकड़ी के दोनों हिस्से जुड़ गए और बंदर की पूंछ दबकर उसकी मृत्यु हो गई।
पढ़ें →सियार और युद्ध का ढोल — अनजाने डर का सामना और हकीकत
एक सियार ने युद्ध के मैदान में पड़े ढोल की आवाज़ सुनकर डरकर भागने की सोची, परंतु जब उसने साहस करके देखा तो पाया कि वह केवल एक खोखला ढोल था जिस पर टहनियाँ टकरा रही थीं।
पढ़ें →बगुला और केकड़ा — लालच का अंत और केकड़े की समझदारी
एक बूढ़े बगुले ने मछलियों को धोखा देकर उन्हें एक काल्पनिक तालाब में ले जाने का वादा किया। लेकिन चालाक केकड़े ने बगुले की पतली गर्दन को अपने पंजों से कसकर जकड़ लिया और उसकी हत्या करके सबको बचा लिया।
पढ़ें →चतुर खरगोश और मूर्ख शेर — बुद्धि का बल और कुएं की परछाई
एक खूंखार शेर रोज़ जानवरों को मारता था। खरगोश ने उसे एक कुएं में ले जाकर दिखाया कि वहाँ 'दूसरा शेर' है। शेर ने अपनी ही परछाई को दूसरा शेर समझकर उस पर झपटा और कुएं में गिरकर मर गया।
पढ़ें →खटमल और जूं की कहानी — बिना सोचे-समझे दी गई शरण और मौत
एक समझदार जूं राजा के बिस्तर पर चुपचाप रहती थी। एक खटमल ने जूं को बहकाया और बिस्तर पर शरण मांगी, फिर राजा को दर्दनाक डंक मार दिया। सेवकों ने बिस्तर छाना, खटमल तो नहीं मिला, लेकिन बेचारी जूं मारी गई।
पढ़ें →नीला सियार — झूठा दिखावा और असलियत का पर्दाफाश
एक सियार नीले रंग में नहाकर जंगल का राजा बन गया। उसने दूसरे सियारों को तिरस्कार किया। एक रात अपनी बिरादरी की आवाज़ सुनकर उसने सियारों की तरह रेंकना शुरू कर दिया और शेर उसकी असलियत जानकर उसे मार डाला।
पढ़ें →