हिन्दी कहानियाँ
📜 पंचतंत्र

गधा और भेड़िया — कांटा निकालने वाला वैद्य और दुलत्ती का वार

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा3 मिनट का पठन
गधा और भेड़िया — कांटा निकालने वाला वैद्य और दुलत्ती का वार

एक दिन एक गधा जंगल के किनारे एक मैदान में हरी-हरी घास चर रहा था। अचानक उसने देखा कि कुछ ही दूरी पर एक खूंखार भेड़िया उसे घूर रहा है और धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ रहा है।

गधा जानता था कि वह दौड़कर इस तेज़ भेड़िए से नहीं बच सकता। इसलिए उसने घबराने के बजाय अपनी अक्ल लगाने का फैसला किया।

जैसे ही भेड़िया पास आया, गधा अचानक बहुत ज़ोर-ज़ोर से 'लंगड़ाने' लगा और दर्द से कराहने का नाटक करने लगा।

गधे की तरकीब: भेड़िए ने हैरान होकर पूछा: "अरे गधे! तू इस तरह लंगड़ा कर क्यों चल रहा है? वैसे भी मैं तुझे खाने ही वाला हूँ।"

गधे ने रोते हुए कहा: "भेड़िए भाई! आप मुझे खुशी से खा लेना, यह तो मेरा सौभाग्य है। लेकिन मेरी एक छोटी सी विनती है। घास चरते समय मेरे पिछले पैर में एक बहुत बड़ा और नुकीला 'कांटा' चुभ गया है।"

भेड़िए ने गुर्राकर कहा: "तो मैं क्या करूँ?"

गधे ने बहुत ही मासूमियत से कहा: "हुज़ूर! आप जब मुझे खाएँगे, तो वह कांटा आपके गले में 'फँस' सकता है और आपकी जान जा सकती है। मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से आपकी मौत हो। इसलिए कृपया पहले आप मेरे पैर से वह कांटा निकाल दीजिए, फिर मुझे आराम से खा लेना।"

भेड़िया लालच और गधे की मीठी बातों में आ गया। उसने सोचा कि गधा तो वैसे भी कहीं नहीं भाग सकता, इसलिए पहले कांटा निकाल लेना ही समझदारी है।

दुलत्ती का वार: भेड़िया कांटा निकालने के लिए गधे के पिछले पैरों के बिल्कुल पास गया। उसने गधे का पैर उठाया और अपनी आँखें गड़ाकर कांटा ढूँढने लगा।

गधा तो इसी सही मौके का इंतज़ार कर रहा था!

जैसे ही भेड़िए का चेहरा गधे के खुरों के बिल्कुल सामने आया, गधे ने अपनी पूरी ताक़त समेटी और भेड़िए के मुँह पर एक इतनी भयंकर 'दुलत्ती' मारी कि भेड़िए के होश उड़ गए!

खट्ट! की आवाज़ के साथ भेड़िए के सारे 'आगे के दांत' टूट कर ज़मीन पर गिर पड़े। भेड़िया दर्द से चीखता हुआ कई फीट दूर जाकर गिरा।

भेड़िया मुँह से खून बहता हुआ ज़मीन पर पड़ा कराह रहा था, और गधा अपनी जान बचाकर खुशी-खुशी सुरक्षित गाँव की तरफ भाग गया।

नीति / सीख: शत्रु की मीठी बातों या उसकी 'फर्जी चिंता' पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए। जो दुश्मन आपकी जान लेने आया हो, वह कभी आपका हितैषी नहीं हो सकता। मुसीबत के समय अक्ल से काम लेने पर कमज़ोर भी ताक़तवर को हरा सकता है।

🎉 कहानी समाप्त

📜 पंचतंत्र की और कहानियाँ

📜 पंचतंत्र4 मिनट

बंदर और लकड़ी का खूंटा — बिना बुलाए मेहमान और बेवकूफी का परिणाम

एक बंदर ने बढ़ई के छोड़े हुए आधे चिरे लट्ठे में फंसे खूंटे को निकालने की कोशिश की। खूंटा निकलते ही लकड़ी के दोनों हिस्से जुड़ गए और बंदर की पूंछ दबकर उसकी मृत्यु हो गई।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र4 मिनट

सियार और युद्ध का ढोल — अनजाने डर का सामना और हकीकत

एक सियार ने युद्ध के मैदान में पड़े ढोल की आवाज़ सुनकर डरकर भागने की सोची, परंतु जब उसने साहस करके देखा तो पाया कि वह केवल एक खोखला ढोल था जिस पर टहनियाँ टकरा रही थीं।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र5 मिनट

बगुला और केकड़ा — लालच का अंत और केकड़े की समझदारी

एक बूढ़े बगुले ने मछलियों को धोखा देकर उन्हें एक काल्पनिक तालाब में ले जाने का वादा किया। लेकिन चालाक केकड़े ने बगुले की पतली गर्दन को अपने पंजों से कसकर जकड़ लिया और उसकी हत्या करके सबको बचा लिया।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र5 मिनट

चतुर खरगोश और मूर्ख शेर — बुद्धि का बल और कुएं की परछाई

एक खूंखार शेर रोज़ जानवरों को मारता था। खरगोश ने उसे एक कुएं में ले जाकर दिखाया कि वहाँ 'दूसरा शेर' है। शेर ने अपनी ही परछाई को दूसरा शेर समझकर उस पर झपटा और कुएं में गिरकर मर गया।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र4 मिनट

खटमल और जूं की कहानी — बिना सोचे-समझे दी गई शरण और मौत

एक समझदार जूं राजा के बिस्तर पर चुपचाप रहती थी। एक खटमल ने जूं को बहकाया और बिस्तर पर शरण मांगी, फिर राजा को दर्दनाक डंक मार दिया। सेवकों ने बिस्तर छाना, खटमल तो नहीं मिला, लेकिन बेचारी जूं मारी गई।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र4 मिनट

नीला सियार — झूठा दिखावा और असलियत का पर्दाफाश

एक सियार नीले रंग में नहाकर जंगल का राजा बन गया। उसने दूसरे सियारों को तिरस्कार किया। एक रात अपनी बिरादरी की आवाज़ सुनकर उसने सियारों की तरह रेंकना शुरू कर दिया और शेर उसकी असलियत जानकर उसे मार डाला।

पढ़ें →