गधा और भेड़िया — कांटा निकालने वाला वैद्य और दुलत्ती का वार

एक दिन एक गधा जंगल के किनारे एक मैदान में हरी-हरी घास चर रहा था। अचानक उसने देखा कि कुछ ही दूरी पर एक खूंखार भेड़िया उसे घूर रहा है और धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ रहा है।
गधा जानता था कि वह दौड़कर इस तेज़ भेड़िए से नहीं बच सकता। इसलिए उसने घबराने के बजाय अपनी अक्ल लगाने का फैसला किया।
जैसे ही भेड़िया पास आया, गधा अचानक बहुत ज़ोर-ज़ोर से 'लंगड़ाने' लगा और दर्द से कराहने का नाटक करने लगा।
गधे की तरकीब: भेड़िए ने हैरान होकर पूछा: "अरे गधे! तू इस तरह लंगड़ा कर क्यों चल रहा है? वैसे भी मैं तुझे खाने ही वाला हूँ।"
गधे ने रोते हुए कहा: "भेड़िए भाई! आप मुझे खुशी से खा लेना, यह तो मेरा सौभाग्य है। लेकिन मेरी एक छोटी सी विनती है। घास चरते समय मेरे पिछले पैर में एक बहुत बड़ा और नुकीला 'कांटा' चुभ गया है।"
भेड़िए ने गुर्राकर कहा: "तो मैं क्या करूँ?"
गधे ने बहुत ही मासूमियत से कहा: "हुज़ूर! आप जब मुझे खाएँगे, तो वह कांटा आपके गले में 'फँस' सकता है और आपकी जान जा सकती है। मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से आपकी मौत हो। इसलिए कृपया पहले आप मेरे पैर से वह कांटा निकाल दीजिए, फिर मुझे आराम से खा लेना।"
भेड़िया लालच और गधे की मीठी बातों में आ गया। उसने सोचा कि गधा तो वैसे भी कहीं नहीं भाग सकता, इसलिए पहले कांटा निकाल लेना ही समझदारी है।
दुलत्ती का वार: भेड़िया कांटा निकालने के लिए गधे के पिछले पैरों के बिल्कुल पास गया। उसने गधे का पैर उठाया और अपनी आँखें गड़ाकर कांटा ढूँढने लगा।
गधा तो इसी सही मौके का इंतज़ार कर रहा था!
जैसे ही भेड़िए का चेहरा गधे के खुरों के बिल्कुल सामने आया, गधे ने अपनी पूरी ताक़त समेटी और भेड़िए के मुँह पर एक इतनी भयंकर 'दुलत्ती' मारी कि भेड़िए के होश उड़ गए!
खट्ट! की आवाज़ के साथ भेड़िए के सारे 'आगे के दांत' टूट कर ज़मीन पर गिर पड़े। भेड़िया दर्द से चीखता हुआ कई फीट दूर जाकर गिरा।
भेड़िया मुँह से खून बहता हुआ ज़मीन पर पड़ा कराह रहा था, और गधा अपनी जान बचाकर खुशी-खुशी सुरक्षित गाँव की तरफ भाग गया।
नीति / सीख: शत्रु की मीठी बातों या उसकी 'फर्जी चिंता' पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए। जो दुश्मन आपकी जान लेने आया हो, वह कभी आपका हितैषी नहीं हो सकता। मुसीबत के समय अक्ल से काम लेने पर कमज़ोर भी ताक़तवर को हरा सकता है।
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