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📜 पंचतंत्र

गधा और शेर — झूठा दिखावा और असली पहचान

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा4 मिनट का पठन
गधा और शेर — झूठा दिखावा और असली पहचान

एक बार जंगल के राजा शेर ने शिकार करने की एक नई योजना बनाई। उसने सोचा कि अगर शिकार को डराकर एक ही दिशा में भगाया जाए, तो उन्हें पकड़ना बहुत आसान हो जाएगा।

इस काम के लिए शेर ने एक 'गधे' को अपना साझीदार बनाया। शेर ने गधे से कहा: "मित्र! तुम उस घनी झाड़ी के पीछे छिप जाओ। जब मैं इशारा करूँ, तो अपनी पूरी ताकत से सबसे भयानक आवाज़ निकालना। तुम्हारी अजीब आवाज़ सुनकर जानवर डर के मारे मेरी तरफ भागेंगे, और मैं उन्हें पकड़ लूँगा।"

गधा शेर के साथ काम करने का मौका पाकर बहुत खुश और घमंडी हो गया।

शिकार की योजना: योजना के अनुसार गधा झाड़ियों में छिप गया और शेर दूसरी तरफ घात लगाकर बैठ गया। शेर के इशारा करते ही, गधे ने अपनी पूरी ताकत लगाकर भयानक और कर्कश आवाज़ में रेंकना शुरू कर दिया— "ढेंचू! ढेंचू! ढेंचू!"

जंगल के जानवर (हिरण, नीलगाय आदि) अचानक इस अजीब और भयानक शोर को सुनकर घबरा गए। वे बिना सोचे-समझे विपरीत दिशा में भागने लगे, जहाँ शेर पहले से ही उनका इंतज़ार कर रहा था। शेर ने आसानी से कई जानवरों का शिकार कर लिया और उनकी दावत पक्की हो गई।

गधे का अहंकार: शिकार पूरा होने के बाद गधा झाड़ियों से बाहर आया। वह घमंड से फूलकर कुप्पा हो चुका था। उसे लगने लगा कि वह शेर से भी ज़्यादा ताक़तवर और भयानक है।

गधे ने अपनी छाती चौड़ी करते हुए शेर से पूछा: "कहो महाराज! देखा मेरा कमाल? मेरी भयानक आवाज़ से पूरे जंगल में कैसा खौफ फैल गया था! सच-सच बताना, क्या मेरी उस खूंखार आवाज़ को सुनकर तुम भी डर गए थे?"

शेर ने गधे की इस मूर्खतापूर्ण बात पर ज़ोर से ठहाका लगाया।

शेर ने व्यंग्य करते हुए कहा: "अरे मूर्ख गधे! तेरी आवाज़ सचमुच बहुत भयानक थी। अगर मुझे पहले से यह न पता होता कि झाड़ियों के पीछे एक 'गधा' रेंक रहा है, तो शायद मैं भी डर जाता! लेकिन जो तेरी असलियत जानता है, वह तेरी आवाज़ से कभी नहीं डरेगा।"

गधे का सारा घमंड पल भर में टूट गया और उसे अपनी असली औकात समझ में आ गई।

नीति / सीख: झूठा दिखावा करके इंसान कुछ अनजान लोगों को तो बेवकूफ बना सकता है, लेकिन जो लोग आपकी 'असली पहचान' और क्षमता को जानते हैं, वे आपके दिखावे पर सिर्फ हंसते हैं।

🎉 कहानी समाप्त

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