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📜 पंचतंत्र

हाथी और अंधे आदमी — अधूरा सच और नज़रिया

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा4 मिनट का पठन
हाथी और अंधे आदमी — अधूरा सच और नज़रिया

एक गाँव में छह 'नेत्रहीन' आदमी रहते थे। उन्होंने ज़िंदगी में कभी कुछ नहीं देखा था, लेकिन वे बहुत जिज्ञासु थे। उन्होंने हमेशा 'हाथी' के बारे में बहुत कुछ सुना था, लेकिन वे यह नहीं जानते थे कि हाथी असल में कैसा होता है।

एक दिन गाँव में एक महावत अपना हाथी लेकर आया। गाँव वालों ने उन छह अंधे आदमियों से कहा: "आओ, आज तुम लोग खुद हाथी को छूकर महसूस कर लो कि वह कैसा होता है।"

छह के छह आदमी बहुत खुश हुए और हाथी के पास गए। उन्होंने अपने हाथ बढ़ाकर हाथी के अलग-अलग हिस्सों को 'छूना' शुरू किया।

छह लोगों का अलग-अलग सच:

पहले आदमी का हाथ हाथी के 'पेट' पर पड़ा। उसने कहा: "अरे! हाथी तो बिल्कुल एक चौड़ी और मज़बूत 'दीवार' की तरह होता है!"

दूसरे आदमी ने हाथी का 'दांत' पकड़ा। उसने कहा: "दीवार? तुम पागल हो! यह तो एकदम गोल, चिकना और नुकीला है। हाथी तो एक 'भाले' की तरह होता है!"

तीसरे आदमी के हाथ में हाथी की 'सूंड' आई। उसने कहा: "तुम दोनों बेवकूफ हो! यह तो मुड़ रहा है। हाथी तो बिल्कुल एक मोटे 'सांप' जैसा है!"

चौथे आदमी ने हाथी का 'पैर' पकड़ा। उसने कहा: "तुम सब झूठ बोल रहे हो! यह एकदम सीधा और खुरदरा है। हाथी तो एक 'पेड़ के तने' की तरह होता है!"

पाँचवें आदमी ने हाथी का 'कान' छुआ। उसने कहा: "यह तो हिल रहा है और चपटा है। अरे, हाथी तो एक बड़े 'पंखे' जैसा होता है!"

छठे आदमी के हाथ में हाथी की 'पूंछ' आई। उसने कहा: "मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा कि तुम लोग क्या कह रहे हो! यह तो पतली और खुरदरी है। हाथी सिर्फ एक 'रस्सी' की तरह होता है!"

विवाद और समझ: थोड़ी ही देर में वे छह अंधे आदमी आपस में बुरी तरह लड़ने-झगड़ने लगे। हर कोई कह रहा था कि "केवल मेरा सच ही सही है और तुम सब गलत हो!" बात हाथापाई तक पहुँच गई।

तभी वहाँ से एक 'समझदार इंसान' गुज़रा। उसने उनका झगड़ा शांत करवाया और पूछा कि वे क्यों लड़ रहे हैं। जब उन्होंने अपनी बात बताई, तो वह इंसान मुस्कुराया और बोला:

"शांत हो जाओ! तुम छह के छह लोग अपनी-अपनी जगह पर 'बिल्कुल सही' हो! हाथी दीवार, भाले, सांप, पेड़, पंखे और रस्सी जैसा ही लगता है। लेकिन तुम सब हाथी को पूरी तरह से नहीं समझ पाए, क्योंकि तुमने केवल उसके 'एक हिस्से' को छुआ है। हाथी इन सब हिस्सों से मिलकर बना एक विशाल जीव है!"

उन छह आदमियों को अपनी गलती का अहसास हुआ कि वे 'अधूरे सच' को ही 'पूरा सच' मानकर लड़ रहे थे।

नीति / सीख: सच बहुत बड़ा और बहुआयामी होता है। हम इंसान अक्सर किसी बात के केवल एक 'पहलू' को देखकर उसे 'पूरा सच' मान लेते हैं और दूसरों से झगड़ने लगते हैं। हमें यह समझना चाहिए कि दूसरों का नज़रिया भी सही हो सकता है, बस वे उसी सच को किसी और दिशा से देख रहे होते हैं।

🎉 कहानी समाप्त

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