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📜 पंचतंत्र

हाथी और सियार — झूठी प्रशंसा और कीचड़ का जाल

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा3 मिनट का पठन
हाथी और सियार — झूठी प्रशंसा और कीचड़ का जाल

एक जंगल में एक बहुत ही विशाल और घमंडी हाथी रहता था। उसी जंगल में सियारों का एक झुंड भी रहता था। एक दिन एक बूढ़े और चालाक सियार ने उस हाथी को देखा और उसके मुँह में पानी आ गया। उसने सोचा: "अगर यह हाथी मर जाए, तो हमारे पूरे झुंड को महीनों तक बैठे-बिठाए भोजन मिलेगा।"

परंतु सियार जानता था कि वह हाथी को मार नहीं सकता। इसलिए उसने एक बहुत ही भयानक और कूटनीतिक चाल चली।

सियार अकेला हाथी के पास गया और उसके सामने सिर झुकाकर बहुत ही आदर से बोला: "महाराज की जय हो! हे गजराज, मैंने और जंगल के सभी जानवरों ने मिलकर एक बहुत ही अहम फैसला लिया है।"

हाथी ने अहंकार से पूछा: "क्या फैसला लिया है?"

झूठा लालच: सियार ने हाथ जोड़कर कहा: "महाराज! हमारा वर्तमान राजा (शेर) बहुत ही क्रूर है। हम सब चाहते हैं कि आपके जैसा विशाल, शांत और समझदार जानवर ही इस 'जंगल का राजा' बने। जंगल के सभी जानवर मेरा इंतज़ार कर रहे हैं। कृपया मेरे साथ चलिए, आज ही आपका राज्याभिषेक होगा!"

'जंगल का राजा' बनने की बात सुनकर हाथी का अहंकार सातवें आसमान पर पहुँच गया। वह सियार की बातों में इतना अंधा हो गया कि उसने आगे-पीछे कुछ नहीं सोचा और सियार के पीछे-पीछे चल दिया।

कीचड़ का जाल और धोखा: सियार जानबूझकर हाथी को जंगल के उस हिस्से में ले गया, जहाँ एक बहुत ही गहरी और खतरनाक 'दलदल' थी। सियार तो हल्का था, इसलिए वह दलदल के ऊपर से तेज़ी से भाग कर दूसरी तरफ सुरक्षित निकल गया।

परंतु जैसे ही भारी-भरकम हाथी ने दलदल में पैर रखा, वह अपने ही वज़न के कारण कीचड़ में धँसने लगा! हाथी ने बाहर निकलने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह जितना ज़ोर लगाता, उतना ही अंदर धँसता जाता।

जब हाथी का आधा शरीर कीचड़ में डूब गया, तो उसने घबराकर सियार से कहा: "अरे मित्र सियार! मैं तो दलदल में फँस गया हूँ। जल्दी से आकर मेरी सूंड या पूंछ पकड़ो और मुझे बाहर निकालो, वरना मैं मर जाऊँगा!"

सियार दूर सुरक्षित ज़मीन पर बैठा ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगा। उसने व्यंग्य करते हुए कहा: "महाराज! आप तो जंगल के राजा हैं, आप खुद बाहर आ जाइए। और रही बात पूंछ पकड़ने की, तो आप मेरी पूंछ पकड़ लीजिए! अरे मूर्ख हाथी! राजा बनने के लालच और झूठी तारीफों में आकर तूने अपनी अक्ल खो दी थी। अब हम सियारों का झुंड यहीं बैठकर तेरे मरने का इंतज़ार करेगा!"

हाथी दलदल में डूबकर मर गया और सियारों ने महीनों तक उसकी दावत उड़ाई।

नीति / सीख: जो लोग आपकी झूठी तारीफें करते हैं और आपको बड़े-बड़े लालच देते हैं, वे अक्सर आपको किसी 'गहरे दलदल' (विनाश) में धकेलने की योजना बना रहे होते हैं। चापलूसों से हमेशा सावधान रहना चाहिए।

🎉 कहानी समाप्त

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