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मूर्ख विद्वान और नाविक — किताबी ज्ञान बनाम व्यावहारिक ज्ञान

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मूर्ख विद्वान और नाविक — किताबी ज्ञान बनाम व्यावहारिक ज्ञान

एक बार चार बहुत ही पढ़े-लिखे विद्वान किसी दूसरे नगर में जाने के लिए एक नदी पार कर रहे थे। उन्होंने वेदों, शास्त्रों, व्याकरण और ज्योतिष का बहुत गहरा अध्ययन किया था। लेकिन उनके अंदर अपने इस 'किताबी ज्ञान' का बहुत बड़ा घमंड था।

नदी पार करने के लिए वे एक छोटी सी नाव में बैठे। नाव चलाने वाला नाविक बहुत ही साधारण और अनपढ़ इंसान था, जो बस दिन भर नाव चलाकर अपना गुज़ारा करता था।

रास्ते में समय बिताने के लिए विद्वानों ने नाविक का मज़ाक उड़ाने की सोची।

विद्वानों का अहंकार: पहले विद्वान ने नाविक से पूछा: "अरे भाई! क्या तुमने कभी 'व्याकरण' और शास्त्र पढ़े हैं?" नाविक ने सिर हिलाकर कहा: "नहीं महाराज, मैं तो एक गरीब नाविक हूँ। मुझे इन सब का कोई ज्ञान नहीं है।" विद्वान ने हँसते हुए कहा: "अफ़सोस! तब तो तुम्हारी ज़िंदगी का 'एक चौथाई (1/4) हिस्सा' बिल्कुल बेकार चला गया।"

कुछ देर बाद दूसरे विद्वान ने पूछा: "क्या तुम्हें 'भूगोल' या इतिहास के बारे में कुछ पता है?" नाविक ने फिर से विनम्रता से कहा: "जी नहीं, मैंने कभी कोई किताब नहीं देखी।" दूसरे विद्वान ने ताना मारा: "तब तो तुम्हारी ज़िंदगी का 'आधा (1/2) हिस्सा' पानी में बह गया!"

तीसरे विद्वान ने भी अपनी शान दिखाते हुए पूछा: "क्या तुम्हें 'ज्योतिष विद्या' आती है? क्या तुम तारों को देखकर भविष्य बता सकते हो?" नाविक ने दुखी होकर कहा: "नहीं महाराज, मुझे सिर्फ अपनी नाव चलाना आता है।" तीसरे विद्वान ने कहा: "कितने मूर्ख हो तुम! तुम्हारी ज़िंदगी का 'तीन-चौथाई (3/4) हिस्सा' तो पूरी तरह व्यर्थ हो गया!"

नाविक चुपचाप उनकी बातें सुनता रहा और नाव चलाता रहा।

तभी अचानक मौसम खराब हो गया। आसमान में काले बादल छा गए और नदी में भयंकर 'तूफान' आ गया। तेज़ लहरों के कारण नाव ज़ोर-ज़ोर से हिलने लगी और अचानक नाव के एक हिस्से में 'छेद' हो गया। नाव में तेज़ी से पानी भरने लगा।

अब नाविक की बारी थी। नाविक ने उन चारों डरे हुए और काँपते हुए विद्वानों से एक बहुत ही सीधा सा सवाल पूछा: "महाराज! आप लोगों ने दुनिया भर की किताबें पढ़ी हैं, लेकिन क्या आप चारों को 'तैरना' आता है?"

चारों विद्वानों के चेहरे डर के मारे सफेद पड़ गए। उन्होंने घबराकर एक साथ कहा: "नहीं! नहीं! हमने तैरना कभी नहीं सीखा। हमें केवल शास्त्रों का ज्ञान है।"

नाविक ने नदी में छलांग लगाने से पहले मुस्कुराते हुए कहा: "बड़ा अफ़सोस है महाराज! आपने मेरी ज़िंदगी का तीन-चौथाई हिस्सा बेकार बताया था, लेकिन अगर आपको तैरना नहीं आता, तो अब आप चारों की 'पूरी की पूरी (100%) ज़िंदगी' इस नदी में डूबकर बेकार होने वाली है!"

यह कहकर नाविक तैरकर सुरक्षित किनारे पर पहुँच गया, जबकि वे चारों अहंकारी विद्वान अपनी भारी-भरकम किताबों और झूठे घमंड के साथ उस नदी में डूब गए।

🎉 कहानी समाप्त

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