इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर

दुनिया भर के वैज्ञानिक इस बात की खोज में लगे थे कि चाँद पर जीवन है या नहीं। भारत सरकार ने भी तय किया कि वह अपना एक प्रतिनिधि चाँद पर भेजेगी। लेकिन भारत सरकार ने किसी वैज्ञानिक को चाँद पर भेजने के बजाय, पुलिस विभाग के एक बहुत ही तेज़-तर्रार और जुगाड़ू अधिकारी को चाँद पर भेजने का फैसला किया, जिसका नाम था— 'इंस्पेक्टर मातादीन'!
इंस्पेक्टर मातादीन को इसलिए चुना गया क्योंकि भारत सरकार का मानना था कि चाँद पर कानून और व्यवस्था की ज़रूरत होगी और मातादीन से बेहतर पुलिसवाला कोई नहीं हो सकता था।
मातादीन ने अपनी पुलिस की वर्दी पहनी, खाकी टोपी लगाई, हाथ में एक मोटा डंडा लिया और अपने पान के डिब्बे के साथ अंतरिक्ष यान में बैठकर 'चाँद' की तरफ रवाना हो गए।
कुछ दिनों बाद मातादीन का यान चाँद पर उतरा। चाँद के राजा और वहाँ के पुलिस अधिकारियों ने मातादीन का बहुत भव्य स्वागत किया।
चाँद के राजा ने कहा, "इंस्पेक्टर मातादीन जी! हमारे चाँद पर सब कुछ बहुत शांतिपूर्ण है। लेकिन हमने सुना है कि पृथ्वी की पुलिस बहुत ही शानदार काम करती है। हम चाहते हैं कि आप हमारी 'चाँद पुलिस' को भी वैसी ही ट्रेनिंग दें।"
मातादीन ने पान की पीक थूकते हुए कहा, "राजा साहब, आप फिक्र मत कीजिए। मैं चाँद की पुलिस को ऐसा 'स्मार्ट' बना दूँगा कि अपराधी यहाँ पैदा होने से पहले ही डरेंगे!"
मातादीन ने चाँद के पुलिस स्टेशन का दौरा किया। उन्होंने चाँद के 'कोतवाल' (थानेदार) से पूछा, "क्यों भई! तुम्हारे थाने में रोज़ कितनी 'एफआईआर' (FIR) दर्ज होती हैं?"
कोतवाल ने हैरानी से पूछा, "एफआईआर क्या होती है साहब?"
मातादीन ने अपना माथा पीट लिया। "अरे मूर्ख! तुम्हें यह भी नहीं पता? जब कोई अपराध होता है, तो सबसे पहले थाने में रपट (FIR) लिखी जाती है। अगर एफआईआर ही नहीं होगी, तो पुलिस पैसे... मेरा मतलब है, पुलिस काम कैसे करेगी?"
तभी थाने में चाँद का एक नागरिक रोता हुआ आया और बोला, "साहब! किसी ने मेरी सोने की घड़ी चुरा ली है।"
मातादीन की आँखें चमक उठीं। "बहुत बढ़िया! अब मैं तुम्हें सिखाता हूँ कि पृथ्वी की पुलिस काम कैसे करती है।"
मातादीन ने चाँद के पुलिस वालों से कहा, "जाओ, शहर के सबसे 'गरीब, बेसहारा और कमज़ोर' आदमी को पकड़ कर ले आओ।"
पुलिस वाले एक बहुत ही गरीब और सीधे-सादे मज़दूर को पकड़ लाए।
मातादीन ने उस गरीब मज़दूर को डंडा दिखाते हुए कहा, "बोल! तूने घड़ी चुराई है ना?" मज़दूर रोने लगा, "नहीं साहब! मैंने कोई घड़ी नहीं देखी।"
मातादीन ने चाँद के पुलिस वालों को आँख मारी और कहा, "अरे यह ऐसे नहीं मानेगा। इसे 'थर्ड डिग्री' दो!"
मातादीन ने उस गरीब मज़दूर को थाने के पीछे ले जाकर ऐसा मारा कि मज़दूर दर्द के मारे चिल्ला उठा, "हाँ साहब! मैंने ही चुराई है, मुझे मत मारिए!"
चाँद के पुलिस वाले हैरान रह गए। कोतवाल ने पूछा, "लेकिन साहब! इसने घड़ी चुराई ही नहीं है, तो हमें घड़ी मिलेगी कहाँ से?"
मातादीन हँसे। उन्होंने अपनी जेब से एक पुरानी सस्ती सी घड़ी निकाली और कहा, "अरे बेवकूफ़ो! यह रही घड़ी! हम कहेंगे कि यह घड़ी हमने इस मज़दूर के घर से 'बरामद' की है। बस हो गया केस सॉल्व!"
कोतवाल ने कहा, "लेकिन साहब! अदालत में हमें गवाह भी तो चाहिए होंगे। गवाही कौन देगा कि इसी ने चोरी की है?"
मातादीन ने अपनी मूँछों पर ताव देते हुए कहा, "यही तो पृथ्वी की पुलिस का असली टैलेंट है! गवाह पैदा किए जाते हैं। शहर के दो-चार आवारा और लालची लोगों को पकड़ो, उन्हें थोड़े पैसे दो, और वे अदालत में कसम खाकर कहेंगे कि उन्होंने इसे चोरी करते हुए अपनी आँखों से देखा है!"
चाँद की पुलिस ने बिल्कुल वैसा ही किया। झूठे गवाह तैयार किए गए। उस बेकसूर मज़दूर को जेल में डाल दिया गया और अखबारों में इंस्पेक्टर मातादीन की बहादुरी के चर्चे होने लगे।
चाँद के राजा बहुत खुश हुए। उन्होंने मातादीन को चाँद पुलिस का 'चीफ' बना दिया।
बस, फिर क्या था! इंस्पेक्टर मातादीन ने चाँद पर पृथ्वी की पुलिस व्यवस्था लागू कर दी। अगर कहीं कोई कत्ल होता, तो असली कातिल को पकड़ने के बजाय, मातादीन किसी भी बेकसूर आदमी को पकड़ लेते। उसके कपड़ों पर लाल स्याही लगाकर झूठा खून बना देते, एक चाकू उसके घर में रख देते और उसे फाँसी पर चढ़वा देते।
देखते ही देखते चाँद की 'लॉ एंड ऑर्डर' की रिपोर्ट 100% सही हो गई। सारे केस सॉल्व होने लगे!
लेकिन इसका अंजाम बहुत भयानक हुआ। चाँद के सभी 'असली अपराधी और गुंडे' आज़ाद घूमने लगे क्योंकि उन्हें पता चल गया था कि पुलिस तो सिर्फ बेकसूरों को पकड़ती है। और चाँद के सभी 'ईमानदार, सज्जन और शरीफ लोग' डरे-डरे रहने लगे, क्योंकि मातादीन की पुलिस कभी भी, किसी भी झूठे केस में उन्हें उठाकर जेल में डाल देती थी।
चाँद का पूरा सिस्टम भ्रष्ट हो गया। जो पुलिस पहले लोगों की मदद करती थी, अब वह लोगों को डराकर रिश्वत माँगने लगी। चाँद की जनता त्राहि-त्राहि कर उठी।
एक दिन चाँद की पूरी जनता ने मिलकर चाँद के राजा के महल को घेर लिया।
जनता रोते हुए चिल्लाई, "महाराज! हमें बचाइए! पृथ्वी के इस 'इंस्पेक्टर मातादीन' ने हमारा जीना हराम कर दिया है। हमारी शांति छिन गई है। इसके आने से पहले चाँद पर जो थोड़ा-बहुत न्याय था, वह भी खत्म हो गया है!"
चाँद के राजा को भी समझ आ गया कि पृथ्वी की पुलिस व्यवस्था ने उनके चाँद का सत्यानाश कर दिया है।
राजा ने तुरंत भारत के प्रधानमंत्री को एक आपातकालीन संदेश भेजा: "प्रणाम प्रधानमंत्री जी! हम आपके हाथ जोड़ते हैं। कृपा करके अपने इस 'इंस्पेक्टर मातादीन' को तुरंत वापस पृथ्वी पर बुला लीजिए। हमारा चाँद तो जैसा था वैसा ही ठीक था। हमें आपकी यह 'आधुनिक और होशियार' पुलिस व्यवस्था बिल्कुल नहीं चाहिए!"
भारत सरकार ने मातादीन को वापस बुला लिया। मातादीन चाँद से अपनी पुलिस की वर्दी का कॉलर चढ़ाए, बहुत ही गर्व के साथ पृथ्वी पर वापस लौटे। भारत के पुलिस विभाग में उन्हें 'चाँद पर कानून व्यवस्था स्थापित करने वाले पहले पुलिस अफसर' के रूप में बहुत बड़ा मेडल दिया गया! और इधर चाँद के लोगों ने मातादीन के जाने की खुशी में हफ्तों तक जश्न मनाया।
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