हिन्दी कहानियाँ
📜 पंचतंत्र

लोमड़ी और चींटी — मेहनत का मज़ाक और छोटी चींटी का पलटवार

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा4 मिनट का पठन
लोमड़ी और चींटी — मेहनत का मज़ाक और छोटी चींटी का पलटवार

एक जंगल में एक लोमड़ी रहती थी। उसे अपनी चालाकी और अपनी 'तेज़ रफ़्तार' पर बहुत ज़्यादा घमंड था।

उसी जंगल में एक छोटी सी लाल चींटी भी रहती थी। चींटी सारा दिन बिना रुके काम करती थी और अपने बिल में सर्दियों के लिए अनाज जमा करती रहती थी।

एक दिन लोमड़ी वहां से गुज़री। उसने चींटी को एक भारी दाना खींचते हुए देखा। लोमड़ी ने चींटी का मज़ाक उड़ाते हुए कहा: "अरे बेचारी चींटी! तू सारा दिन मिट्टी में रेंगती रहती है। ज़रा मुझे देख, मैं कितनी सुंदर हूँ और कितनी तेज़ दौड़ सकती हूँ। तेरी यह धीमी चाल और यह छोटी सी ज़िंदगी किस काम की? तू कभी मेरे जैसी महान नहीं बन सकती!"

चींटी ने लोमड़ी की इस कड़वी बात का कोई जवाब नहीं दिया। वह शांति से अपना काम करती रही।

मौसम की मार: कुछ महीनों बाद, जंगल में भयंकर बारिश और तूफान आया। लगातार कई दिनों तक बारिश होती रही, जिससे जंगल में पानी भर गया और सारे जानवरों का शिकार या भोजन ढूंढना असंभव हो गया।

चींटी अपने गहरे और सुरक्षित बिल के अंदर अपने परिवार के साथ आराम से बैठी थी। उसने गर्मियों में जो अनाज इकट्ठा किया था, वह उसे मजे से खा रही थी। उसे बारिश या भूख की कोई चिंता नहीं थी।

घमंडी लोमड़ी की दुर्दशा: दूसरी तरफ, घमंडी लोमड़ी की हालत बहुत खराब थी। उसकी तेज़ रफ़्तार और सुंदरता पानी में किसी काम नहीं आ रही थी। वह कई दिनों से भूखी थी और ठंड से कांप रही थी।

भटकते-भटकते लोमड़ी चींटी के बिल के पास पहुँची। उसने बाहर से गिड़गिड़ाते हुए आवाज़ दी: "चींटी बहन! मुझे बहुत जोरों की भूख लगी है। मेरी जान बचा लो, कृपया मुझे अपने पास से थोड़ा सा अनाज दे दो।"

चींटी ने बिल के अंदर से ही बहुत शांत और कड़क आवाज़ में जवाब दिया: "लोमड़ी मौसी! कुछ महीने पहले तो आप अपनी तेज़ रफ़्तार और महानता का बहुत घमंड कर रही थीं। जब मैं मेहनत कर रही थी, तब आप मेरा मज़ाक उड़ा रही थीं। अब जाइए और अपनी उस 'तेज़ रफ़्तार' से दौड़कर अपने लिए शिकार ढूंढ लीजिए! मेरी धीमी चाल की मेहनत का अनाज केवल मेरे परिवार के लिए है।"

लोमड़ी शर्म और पछतावे से पानी-पानी हो गई। उसे अपनी गलती का अहसास हो गया था कि किसी की मेहनत का मज़ाक उड़ाना सबसे बड़ी मूर्खता है। उसे भूखे पेट ही वहां से वापस लौटना पड़ा।

नीति / सीख: घमंड का सिर हमेशा नीचा होता है। जो इंसान दूसरों की मेहनत और छोटे आकार का मज़ाक उड़ाता है, उसे मुसीबत के समय उन्हीं के सामने हाथ फैलाने पड़ते हैं। मेहनत ही बुरे वक्त का सबसे सच्चा साथी है।

🎉 कहानी समाप्त

📜 पंचतंत्र की और कहानियाँ

📜 पंचतंत्र4 मिनट

बंदर और लकड़ी का खूंटा — बिना बुलाए मेहमान और बेवकूफी का परिणाम

एक बंदर ने बढ़ई के छोड़े हुए आधे चिरे लट्ठे में फंसे खूंटे को निकालने की कोशिश की। खूंटा निकलते ही लकड़ी के दोनों हिस्से जुड़ गए और बंदर की पूंछ दबकर उसकी मृत्यु हो गई।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र4 मिनट

सियार और युद्ध का ढोल — अनजाने डर का सामना और हकीकत

एक सियार ने युद्ध के मैदान में पड़े ढोल की आवाज़ सुनकर डरकर भागने की सोची, परंतु जब उसने साहस करके देखा तो पाया कि वह केवल एक खोखला ढोल था जिस पर टहनियाँ टकरा रही थीं।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र5 मिनट

बगुला और केकड़ा — लालच का अंत और केकड़े की समझदारी

एक बूढ़े बगुले ने मछलियों को धोखा देकर उन्हें एक काल्पनिक तालाब में ले जाने का वादा किया। लेकिन चालाक केकड़े ने बगुले की पतली गर्दन को अपने पंजों से कसकर जकड़ लिया और उसकी हत्या करके सबको बचा लिया।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र5 मिनट

चतुर खरगोश और मूर्ख शेर — बुद्धि का बल और कुएं की परछाई

एक खूंखार शेर रोज़ जानवरों को मारता था। खरगोश ने उसे एक कुएं में ले जाकर दिखाया कि वहाँ 'दूसरा शेर' है। शेर ने अपनी ही परछाई को दूसरा शेर समझकर उस पर झपटा और कुएं में गिरकर मर गया।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र4 मिनट

खटमल और जूं की कहानी — बिना सोचे-समझे दी गई शरण और मौत

एक समझदार जूं राजा के बिस्तर पर चुपचाप रहती थी। एक खटमल ने जूं को बहकाया और बिस्तर पर शरण मांगी, फिर राजा को दर्दनाक डंक मार दिया। सेवकों ने बिस्तर छाना, खटमल तो नहीं मिला, लेकिन बेचारी जूं मारी गई।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र4 मिनट

नीला सियार — झूठा दिखावा और असलियत का पर्दाफाश

एक सियार नीले रंग में नहाकर जंगल का राजा बन गया। उसने दूसरे सियारों को तिरस्कार किया। एक रात अपनी बिरादरी की आवाज़ सुनकर उसने सियारों की तरह रेंकना शुरू कर दिया और शेर उसकी असलियत जानकर उसे मार डाला।

पढ़ें →