शेर, सियार और गधा — बिना दिल और दिमाग का जानवर

एक जंगल में एक शेर रहता था। उसका एक चालाक सियार सेवक था। एक बार किसी हाथी से लड़ाई में शेर बुरी तरह घायल हो गया। वह इतना कमज़ोर हो गया कि शिकार करने के लायक नहीं रहा। शेर भूखा था, और उसके छोड़े हुए शिकार पर पलने वाला सियार भी भूख से मर रहा था।
शेर ने सियार से कहा: "मित्र! मेरी हालत बहुत खराब है। तुम अपनी चालाकी से किसी जानवर को फुसलाकर यहाँ ले आओ, ताकि मैं उसे मारकर हम दोनों की भूख मिटा सकूँ।"
सियार शिकार की तलाश में गाँव की तरफ गया। वहाँ उसे एक धोबी का बहुत ही कमज़ोर और दुबला-पतला 'गधा' घास चरता हुआ मिला।
सियार का धोखा और गधे की मूर्खता: सियार गधे के पास गया और मीठी-मीठी बातें करते हुए बोला: "गधे भाई! तुम यहाँ इतनी सूखी घास क्यों खा रहे हो? तुम्हारा मालिक तुम्हें बहुत मारता है। तुम मेरे साथ जंगल चलो। वहाँ हरी-भरी घास है और तीन 'जंगली गधियाँ' तुम्हारा इंतज़ार कर रही हैं, जो तुमसे शादी करना चाहती हैं।"
मूर्ख गधा जंगली गधियों की बात सुनकर लालच में आ गया और सियार के पीछे-पीछे जंगल में शेर की गुफा तक चला गया।
जैसे ही गधा गुफा के पास पहुँचा, कमज़ोर शेर ने उस पर झपट्टा मारा! लेकिन शेर कमज़ोर था, इसलिए उसका निशाना चूक गया। शेर का पंजा केवल गधे के कान पर लगा। गधा जान बचाकर पूरी ताकत से वापस गाँव की तरफ भाग गया।
शेर झेंप गया। सियार ने उसे ताना मारा: "महाराज! आप एक गधे को भी नहीं मार सके?" शेर ने कहा: "तुम उसे एक बार फिर ले आओ, इस बार मैं उसे नहीं छोड़ूँगा।"
गधे की दूसरी भूल: सियार फिर से गधे के पास गया। गधे ने गुस्से से कहा: "अरे धोखेबाज़! तूने तो मुझे मौत के मुँह में धकेल दिया था। वह खूंखार जानवर कौन था?"
सियार ने बहुत ही शातिर तरीके से झूठ बोला: "अरे मूर्ख! वह कोई खूंखार जानवर नहीं था, वह तो वही 'जंगली गधी' थी जो तुम्हें देखकर प्यार से गले मिलने के लिए आगे बढ़ी थी। तुम तो डर कर भाग आए! चलो, वह तुम्हारा इंतज़ार कर रही है।"
गधा इतना बेवकूफ था कि वह फिर से सियार की बातों में आ गया और वापस जंगल चला गया। इस बार शेर पूरी तरह तैयार था। उसने एक ही झपट्टे में गधे को मार डाला।
शेर ने सियार से कहा: "मैं नदी पर स्नान करके आता हूँ, तब तक तुम इस शिकार की रखवाली करना।" शेर के जाते ही भूखे सियार ने गधे का 'दिमाग' और 'दिल' निकालकर खा लिया।
जब शेर वापस आया, तो उसने गधे का सिर और सीना कटा हुआ देखा। शेर ने गुस्से से दहाड़ कर पूछा: "अरे दुष्ट सियार! तूने मेरे शिकार का 'दिल और दिमाग' क्यों खा लिया?"
सियार ने हाथ जोड़कर मुस्कुराते हुए कहा: "महाराज! मैंने कुछ नहीं खाया। इस गधे के पास 'दिल और दिमाग' था ही नहीं! ज़रा सोचिए, जिस जानवर के पास दिल और दिमाग होता, क्या वह शेर के पंजे से बाल-बाल बचने के बाद, दोबारा उसी की गुफा में मौत के मुँह में वापस आता?"
शेर को सियार की बात सच लगी और उसने बचा हुआ शिकार खा लिया।
नीति / सीख: जो व्यक्ति एक बार धोखा खाने के बाद भी उसी शत्रु की मीठी बातों में दोबारा फंस जाता है, उसे दुनिया का सबसे बड़ा मूर्ख माना जाता है। मूर्ख इंसान को कोई भी नहीं बचा सकता।
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