हिन्दी कहानियाँ
📜 पंचतंत्र

लोमड़ी और खट्टे अंगूर — अपनी नाकामी और झूठा बहाना

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा4 मिनट का पठन
लोमड़ी और खट्टे अंगूर — अपनी नाकामी और झूठा बहाना

गर्मियों की एक चिलचिलाती दोपहर थी। एक लोमड़ी जंगल में भोजन की तलाश में भटक रही थी। उसे बहुत ज़ोरों की भूख और प्यास लगी थी, लेकिन काफी दूर तक भटकने के बाद भी उसे खाने को कुछ नहीं मिला।

चलते-चलते लोमड़ी एक बाग में पहुँची। वहाँ उसने अंगूरों की एक बहुत बड़ी बेल देखी। बेल पर रसीले और ताज़े 'अंगूरों के बड़े-बड़े गुच्छे' लटक रहे थे।

अंगूरों को देखकर लोमड़ी के मुँह में पानी आ गया। उसने सोचा, "वाह! अगर ये रसीले अंगूर मुझे खाने को मिल जाएं, तो मेरी भूख और प्यास दोनों मिट जाएंगी।"

अंगूरों तक पहुँचने की कोशिश: लोमड़ी अंगूर की बेल के ठीक नीचे गई। उसने देखा कि अंगूर के गुच्छे थोड़ी 'ऊंचाई' पर लटक रहे थे।

लोमड़ी ने अपने पिछले पैरों पर खड़े होकर अंगूर तोड़ने की कोशिश की, लेकिन वह पहुँच नहीं पाई।

फिर उसने पीछे जाकर थोड़ी दौड़ लगाई और एक ऊंची 'छलांग' मारी। परंतु अंगूर अभी भी उसकी पहुँच से थोड़ा ऊपर थे। लोमड़ी ने बार-बार छलांग लगाई। वह पसीने से तर-बतर हो गई, बुरी तरह थक गई और हांफने लगी, लेकिन वह एक भी अंगूर का गुच्छा नहीं तोड़ पाई।

अंगूर खट्टे हैं: जब लोमड़ी को यह पूरा यकीन हो गया कि वह किसी भी तरह से अंगूरों तक नहीं पहुँच सकती, तो उसने हार मान ली।

वह वहाँ से मुड़ी और जाते-जाते मुँह बनाते हुए बड़बड़ाने लगी: "मुझे ये अंगूर नहीं खाने! ये 'अंगूर तो खट्टे हैं'। अगर मैं इन्हें खाऊंगी तो बीमार पड़ जाऊँगी। अच्छा ही हुआ जो मैंने इन्हें नहीं तोड़ा!"

यह कहकर लोमड़ी अपनी नाकामी को छिपाने के लिए एक झूठा बहाना बनाकर वहाँ से चली गई।

नीति / सीख: जो चीज़ इंसान को अपनी कमज़ोरी के कारण हासिल नहीं हो पाती, वह अक्सर उसी चीज़ में 'कमियां' निकालने लगता है। अपनी नाकामी को स्वीकार न करके चीज़ों को बुरा कहना कायरता की निशानी है।

🎉 कहानी समाप्त

📜 पंचतंत्र की और कहानियाँ

📜 पंचतंत्र4 मिनट

बंदर और लकड़ी का खूंटा — बिना बुलाए मेहमान और बेवकूफी का परिणाम

एक बंदर ने बढ़ई के छोड़े हुए आधे चिरे लट्ठे में फंसे खूंटे को निकालने की कोशिश की। खूंटा निकलते ही लकड़ी के दोनों हिस्से जुड़ गए और बंदर की पूंछ दबकर उसकी मृत्यु हो गई।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र4 मिनट

सियार और युद्ध का ढोल — अनजाने डर का सामना और हकीकत

एक सियार ने युद्ध के मैदान में पड़े ढोल की आवाज़ सुनकर डरकर भागने की सोची, परंतु जब उसने साहस करके देखा तो पाया कि वह केवल एक खोखला ढोल था जिस पर टहनियाँ टकरा रही थीं।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र5 मिनट

बगुला और केकड़ा — लालच का अंत और केकड़े की समझदारी

एक बूढ़े बगुले ने मछलियों को धोखा देकर उन्हें एक काल्पनिक तालाब में ले जाने का वादा किया। लेकिन चालाक केकड़े ने बगुले की पतली गर्दन को अपने पंजों से कसकर जकड़ लिया और उसकी हत्या करके सबको बचा लिया।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र5 मिनट

चतुर खरगोश और मूर्ख शेर — बुद्धि का बल और कुएं की परछाई

एक खूंखार शेर रोज़ जानवरों को मारता था। खरगोश ने उसे एक कुएं में ले जाकर दिखाया कि वहाँ 'दूसरा शेर' है। शेर ने अपनी ही परछाई को दूसरा शेर समझकर उस पर झपटा और कुएं में गिरकर मर गया।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र4 मिनट

खटमल और जूं की कहानी — बिना सोचे-समझे दी गई शरण और मौत

एक समझदार जूं राजा के बिस्तर पर चुपचाप रहती थी। एक खटमल ने जूं को बहकाया और बिस्तर पर शरण मांगी, फिर राजा को दर्दनाक डंक मार दिया। सेवकों ने बिस्तर छाना, खटमल तो नहीं मिला, लेकिन बेचारी जूं मारी गई।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र4 मिनट

नीला सियार — झूठा दिखावा और असलियत का पर्दाफाश

एक सियार नीले रंग में नहाकर जंगल का राजा बन गया। उसने दूसरे सियारों को तिरस्कार किया। एक रात अपनी बिरादरी की आवाज़ सुनकर उसने सियारों की तरह रेंकना शुरू कर दिया और शेर उसकी असलियत जानकर उसे मार डाला।

पढ़ें →