सोने का अंडा देने वाली मुर्गी — रातों-रात अमीर बनने का लालच

एक गाँव में एक गरीब किसान रहता था। वह अपनी पत्नी के साथ छोटी सी झोपड़ी में रहता था और बड़ी मुश्किल से गुज़ारा करता था।
एक दिन वह बाज़ार गया और वहाँ से एक साधारण सी मुर्गी खरीद कर लाया। अगले दिन सुबह जब किसान मुर्गी के दड़बे में गया, तो वह खुशी से उछल पड़ा!
मुर्गी ने एक अंडा दिया था, लेकिन वह कोई साधारण अंडा नहीं था। वह 'ठोस सोने का अंडा' था, जो सूरज की रोशनी में चमक रहा था।
किसान ने वह अंडा बाज़ार में सुनार को बेचा और उसे बहुत सारा पैसा मिला। अब वह मुर्गी रोज़ सुबह एक 'सोने का अंडा' देने लगी। कुछ ही महीनों में किसान ने एक बड़ा घर बनवा लिया, बहुत सारी ज़मीन खरीद ली और गाँव का सबसे अमीर आदमी बन गया।
लालच का पर्दा: अमीर होने के बाद किसान के मन में लालच आ गया। उसका संतोष खत्म हो गया।
एक रात उसने अपनी पत्नी से कहा: "यह मुर्गी रोज़ सिर्फ 'एक' ही अंडा देती है, जिससे हमें रोज़ इंतज़ार करना पड़ता है। ज़रा सोचो, इसके 'पेट के अंदर' कितने सारे सोने के अंडे भरे होंगे! अगर हम इसके पेट को चीर कर सारे अंडे एक साथ निकाल लें, तो हम एक ही दिन में दुनिया के सबसे अमीर इंसान बन जाएंगे!"
पत्नी भी लालची थी, उसने तुरंत हाँ कर दी।
मुर्गी का अंत: अगली सुबह, किसान ने सोने के अंडे का इंतज़ार नहीं किया। वह एक तेज़ 'चाकू' लेकर गया और उसने उस जादुई मुर्गी को पकड़ कर उसका पेट बीच से चीर डाला!
परंतु जब उसने मुर्गी के पेट के अंदर देखा, तो उसके होश उड़ गए। मुर्गी के पेट में कोई सोने का अंडा नहीं था। वह अंदर से बिल्कुल किसी भी 'साधारण मुर्गी' जैसी ही थी।
लालच में अंधे होकर किसान ने अपनी वह 'सोने का अंडा देने वाली मुर्गी' भी मार डाली। अब न तो मुर्गी ज़िंदा बची थी और न ही भविष्य में मिलने वाले सोने के अंडे। किसान अपना सिर पकड़ कर फूट-फूट कर रोने लगा, लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता था। वह वापस गरीब हो गया।
नीति / सीख: इंसान को जो मिल रहा है, उसमें संतुष्ट रहना चाहिए। रातों-रात अमीर बनने का 'लालच' हमेशा इंसान की बची-खुची दौलत और सुख-शांति भी नष्ट कर देता है।
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