लोमड़ी और सियार — बेवकूफी का राग और डंडों की मार

एक जंगल में एक लोमड़ी और एक सियार दोस्त थे। एक रात दोनों भोजन की तलाश में भटकते हुए जंगल के पास वाले गाँव में पहुँच गए। वहाँ उन्हें खरबूज़ों का एक बहुत बड़ा और हरा-भरा खेत दिखाई दिया।
खेत का मालिक (किसान) अपनी झोपड़ी में गहरी नींद सो रहा था। लोमड़ी और सियार चुपके से खेत में घुसे और उन्होंने जी भरकर मीठे-मीठे खरबूज़े खाए।
सियार की मूर्खतापूर्ण ज़िद: पेट भर जाने के बाद सियार बहुत खुश हो गया। उसे मज़ा आने लगा। उसने लोमड़ी से कहा: "मित्र! आज तो बहुत ही शानदार दावत हो गई। मेरा पेट भर गया है और अब खुशी के मारे मेरा 'गाना गाने' का मन कर रहा है।"
लोमड़ी बहुत चतुर थी। वह घबरा गई और उसने सियार को समझाते हुए कहा: "अरे मूर्ख! तुम पागल हो गए हो क्या? हम यहाँ चोरी करने आए हैं। अगर तुम अपनी वह कर्कश आवाज़ निकालोगे, तो किसान जाग जाएगा और हमारी हड्डी-पसली एक कर देगा। चुपचाप यहाँ से खिसक लो।"
परंतु सियार को अपनी 'गायन कला' पर बहुत घमंड था। उसने लोमड़ी की एक न सुनी और बोला: "तुम संगीत के बारे में क्या जानती हो? मैं तो गाऊँगा!"
सियार का राग और किसान का डंडा: लोमड़ी समझ गई कि सियार पिटने वाला है। उसने कहा: "ठीक है, तुम गाओ। लेकिन पहले मुझे खेत के बाहर जाकर छिपने दो, ताकि मैं तुम्हारा संगीत आराम से सुन सकूँ।" लोमड़ी तुरंत खेत के बाहर जाकर एक झाड़ी में छिप गई।
लोमड़ी के जाते ही सियार ने अपना सिर आसमान की तरफ उठाया और ज़ोर-ज़ोर से हुआं-हुआं करके रेंकना शुरू कर दिया।
सियार की उस भयानक आवाज़ से किसान की नींद टूट गई। उसने अपना भारी और 'मोटा डंडा' उठाया और खेत में दौड़ पड़ा। किसान ने सियार को खरबूज़े खाते और शोर मचाते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।
किसान ने सियार की डंडों से इतनी भयंकर पिटाई की कि सियार के पूरे शरीर में सूजन आ गई। वह किसी तरह अपनी जान बचाकर लंगड़ाता हुआ खेत से बाहर आया।
झाड़ी में छिपी लोमड़ी ने मुस्कुराते हुए कहा: "मित्र! तुम्हारा 'संगीत' तो सच में बहुत असरदार था, किसान ने तुम्हें इसका बहुत अच्छा 'ईनाम' दिया है!"
नीति / सीख: समय और जगह देखकर ही कोई काम करना चाहिए। जो इंसान दोस्तों की अच्छी सलाह को अनसुना करके अपनी मूर्खतापूर्ण ज़िद पर अड़ा रहता है, उसे हमेशा सज़ा भुगतनी पड़ती है।
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