हिन्दी कहानियाँ
📜 पंचतंत्र

शेर और चींटी — जंगल के राजा की हार और छोटी सी मुसीबत

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा4 मिनट का पठन
शेर और चींटी — जंगल के राजा की हार और छोटी सी मुसीबत

जंगल का राजा शेर बहुत ही घमंडी था। वह हमेशा सोचता था कि उसके नुकीले दांतों और भारी पंजों के सामने दुनिया का कोई भी जीव नहीं टिक सकता।

एक दिन दोपहर के समय शेर भरपेट शिकार करने के बाद अपनी गुफा के बाहर एक पेड़ की छाँव में गहरी नींद सो रहा था।

तभी ज़मीन पर रेंगती हुई एक छोटी सी लाल चींटी अपना रास्ता भटक गई और वह सोते हुए 'शेर की नाक' के अंदर घुस गई!

नाक का भयंकर दर्द: नाक के अंदर घुसते ही चींटी को घबराहट हुई और उसने खुद को बचाने के लिए शेर की नाक के अंदर की कोमल त्वचा पर ज़ोर से 'डंक' मार दिया।

शेर की नींद अचानक टूट गई। उसे अपनी नाक के अंदर बहुत तेज़ दर्द और खुजली महसूस हुई। शेर ने ज़ोर से 'छींक' मारी, लेकिन चींटी बाहर नहीं निकली, बल्कि वह और अंदर जाकर काटने लगी।

शेर दर्द से बेहाल हो गया। उसने अपने भारी पंजों से अपनी ही नाक पर मारना शुरू किया। लेकिन चींटी तो अंदर थी, इसलिए पंजे मारने से चींटी का तो कुछ नहीं बिगड़ा, उलटा शेर की अपनी ही नाक छिल गई और उससे खून बहने लगा।

राजा की बेबसी: शेर ने अपनी पूरी ताक़त लगा दी। वह ज़ोर-ज़ोर से दहाड़ने लगा, ज़मीन पर लोटपोट होने लगा और पेड़ों से अपना सिर टकराने लगा। पूरा जंगल शेर की दहाड़ से कांप रहा था, लेकिन जंगल का राजा एक छोटी सी चींटी के सामने पूरी तरह बेबस था।

अंततः शेर थक कर ज़मीन पर गिर पड़ा। उसकी आँखों से आँसू आ गए।

जब चींटी को लगा कि अब कोई खतरा नहीं है, तो वह धीरे से शेर की नाक से बाहर निकली और अपने रास्ते चल दी। शेर बस उसे जाते हुए देखता रह गया, क्योंकि उसमें चींटी को मारने की हिम्मत या ताक़त नहीं बची थी।

नीति / सीख: शारीरिक ताक़त ही सब कुछ नहीं होती। कभी भी किसी को उसके छोटे आकार के कारण कमज़ोर नहीं समझना चाहिए, क्योंकि एक छोटी सी मुसीबत भी बड़े से बड़े ताक़तवर इंसान को घुटने टेकने पर मजबूर कर सकती है।

🎉 कहानी समाप्त

📜 पंचतंत्र की और कहानियाँ

📜 पंचतंत्र4 मिनट

बंदर और लकड़ी का खूंटा — बिना बुलाए मेहमान और बेवकूफी का परिणाम

एक बंदर ने बढ़ई के छोड़े हुए आधे चिरे लट्ठे में फंसे खूंटे को निकालने की कोशिश की। खूंटा निकलते ही लकड़ी के दोनों हिस्से जुड़ गए और बंदर की पूंछ दबकर उसकी मृत्यु हो गई।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र4 मिनट

सियार और युद्ध का ढोल — अनजाने डर का सामना और हकीकत

एक सियार ने युद्ध के मैदान में पड़े ढोल की आवाज़ सुनकर डरकर भागने की सोची, परंतु जब उसने साहस करके देखा तो पाया कि वह केवल एक खोखला ढोल था जिस पर टहनियाँ टकरा रही थीं।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र5 मिनट

बगुला और केकड़ा — लालच का अंत और केकड़े की समझदारी

एक बूढ़े बगुले ने मछलियों को धोखा देकर उन्हें एक काल्पनिक तालाब में ले जाने का वादा किया। लेकिन चालाक केकड़े ने बगुले की पतली गर्दन को अपने पंजों से कसकर जकड़ लिया और उसकी हत्या करके सबको बचा लिया।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र5 मिनट

चतुर खरगोश और मूर्ख शेर — बुद्धि का बल और कुएं की परछाई

एक खूंखार शेर रोज़ जानवरों को मारता था। खरगोश ने उसे एक कुएं में ले जाकर दिखाया कि वहाँ 'दूसरा शेर' है। शेर ने अपनी ही परछाई को दूसरा शेर समझकर उस पर झपटा और कुएं में गिरकर मर गया।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र4 मिनट

खटमल और जूं की कहानी — बिना सोचे-समझे दी गई शरण और मौत

एक समझदार जूं राजा के बिस्तर पर चुपचाप रहती थी। एक खटमल ने जूं को बहकाया और बिस्तर पर शरण मांगी, फिर राजा को दर्दनाक डंक मार दिया। सेवकों ने बिस्तर छाना, खटमल तो नहीं मिला, लेकिन बेचारी जूं मारी गई।

पढ़ें →
📜 पंचतंत्र4 मिनट

नीला सियार — झूठा दिखावा और असलियत का पर्दाफाश

एक सियार नीले रंग में नहाकर जंगल का राजा बन गया। उसने दूसरे सियारों को तिरस्कार किया। एक रात अपनी बिरादरी की आवाज़ सुनकर उसने सियारों की तरह रेंकना शुरू कर दिया और शेर उसकी असलियत जानकर उसे मार डाला।

पढ़ें →