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📜 पंचतंत्र

सियार और मुर्गा — शांति का झूठा संदेश और शिकारी कुत्तों का खौफ

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा3 मिनट का पठन
सियार और मुर्गा — शांति का झूठा संदेश और शिकारी कुत्तों का खौफ

एक शाम एक मुर्गा एक पेड़ की बहुत ऊँची डाल पर बैठा था। तभी वहाँ एक भूखा और चालाक सियार आ गया। सियार की नज़र मुर्गे पर पड़ी, तो उसके मुँह में पानी आ गया।

परंतु मुर्गा इतनी ऊँचाई पर था कि सियार वहाँ तक नहीं पहुँच सकता था। इसलिए सियार ने मुर्गे को नीचे बुलाने के लिए अपनी 'कूटनीति' का इस्तेमाल किया।

सियार ने पेड़ के नीचे से बहुत ही मीठी आवाज़ में कहा: "अरे मुर्गे भाई! तुम वहाँ ऊपर क्यों बैठे हो? क्या तुमने जंगल का नया और सबसे बड़ा समाचार नहीं सुना?"

मुर्गे ने पूछा: "कैसा समाचार?"

शांति का झूठा नाटक: सियार ने एक झूठी कहानी गढ़ते हुए कहा: "आज सुबह ही जंगल के सभी जानवरों ने मिलकर एक 'शांति समझौता' किया है। अब कोई भी जानवर किसी दूसरे जानवर को नहीं मारेगा। शेर अब हिरण को नहीं खाएगा, और मैं अब मुर्गों को नहीं खाऊँगा। हम सब भाई-भाई बन गए हैं। इसलिए नीचे आ जाओ, हम गले मिलकर इस शांति का जश्न मनाते हैं।"

मुर्गा बहुत होशियार था। वह सियार की इस चालाकी को तुरंत समझ गया कि यह उसे नीचे बुलाकर खाने की एक चाल है।

मुर्गे का पलटवार: मुर्गे ने सियार की बात पर भरोसा करने का नाटक किया और अपनी गर्दन को ऊँचा करके 'दूर जंगल की तरफ' देखने लगा, जैसे उसे कुछ दिखाई दे रहा हो।

सियार ने उत्सुकता से पूछा: "क्या देख रहे हो भाई?"

मुर्गे ने बहुत ही खुशी से जवाब दिया: "मित्र! यह शांति समझौते वाली बात सचमुच बहुत अद्भुत है। देखो, इसी खुशी में जश्न मनाने के लिए सामने से चार भयानक 'शिकारी कुत्ते' बहुत तेज़ी से दौड़ते हुए हमारी ही तरफ आ रहे हैं!"

'शिकारी कुत्ते' का नाम सुनते ही सियार के रोंगटे खड़े हो गए। वह डर के मारे काँपने लगा और अपनी जान बचाने के लिए पीछे मुड़कर सरपट भागने लगा।

मुर्गे ने ऊपर से हँसते हुए आवाज़ दी: "अरे सियार भाई! तुम क्यों भाग रहे हो? अब तो 'शांति समझौता' हो गया है ना? कुत्ते तुम्हें नहीं मारेंगे।"

सियार ने भागते-भागते पीछे मुड़कर जवाब दिया: "हाँ भाई! समझौता तो हो गया है, लेकिन मुझे लगता है कि इन मूर्ख कुत्तों ने 'अभी तक यह समाचार नहीं सुना है!'"

यह कहकर सियार जंगल में गायब हो गया और मुर्गे ने अपनी अक्ल से अपनी जान बचा ली।

नीति / सीख: अपने जन्मजात दुश्मन की मीठी और लुभावनी बातों पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए। जो इंसान अक्ल का इस्तेमाल करता है, वह धोखेबाज़ों की चाल को उन्हीं पर भारी कर सकता है।

🎉 कहानी समाप्त

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