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📜 पंचतंत्र

बिल्ली और चूहे — ढोंगी साधु और चूहों का विनाश

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा3 मिनट का पठन
बिल्ली और चूहे — ढोंगी साधु और चूहों का विनाश

एक घर में एक बिल्ली रहती थी। वह बहुत बूढ़ी हो चुकी थी, जिसके कारण अब उसमें चूहों के पीछे दौड़ने और उनका शिकार करने की ताक़त नहीं बची थी।

चूहे अब उससे नहीं डरते थे और उसके सामने से आराम से गुज़र जाते थे। भूखी बिल्ली ने चूहों को फँसाने के लिए एक बहुत ही खतरनाक 'ढोंग' रचा।

एक दिन बिल्ली ने अपने गले में 'तुलसी की माला' पहन ली। वह एक नदी के किनारे (जहाँ चूहे अक्सर आते थे) एक पैर पर खड़ी हो गई, अपनी आँखें बंद कर लीं और सूर्य की तरफ मुँह करके 'तपस्या' करने का नाटक करने लगी।

साधु बनने का नाटक: चूहों ने जब बिल्ली को इस रूप में देखा तो वे हैरान रह गए। चूहों के राजा ने दूर से पूछा: "बिल्ली मौसी! यह आप क्या कर रही हैं?"

बिल्ली ने बहुत ही शांत और साधुओं जैसी आवाज़ में कहा: "बेटा! मैंने अपनी ज़िंदगी में बहुत पाप किए हैं। बहुत जीवों को मारा है। अब मुझे अपने किए पर बहुत पछतावा है। इसलिए मैंने मांस खाना छोड़ दिया है और अब मैं एक 'तपस्विनी' बन गई हूँ। मैं अपना बाकी का जीवन ईश्वर की भक्ति में गुज़ारना चाहती हूँ।"

चूहे बहुत भोले थे। उन्हें लगा कि बिल्ली सच में बदल गई है। धीरे-धीरे चूहों का डर खत्म हो गया। वे रोज़ बिल्ली के पास आकर 'सत्संग' सुनने और उसका आशीर्वाद लेने लगे।

ढोंग का पर्दाफाश: बिल्ली की चाल कामयाब हो गई थी। रोज़ शाम को जब सत्संग खत्म होता और चूहे वापस अपने बिल की तरफ जाने लगते, तो बिल्ली चुपके से आँखें खोलती और 'सबसे पीछे चलने वाले' एक मोटे चूहे को पकड़ कर खा जाती!

बिल्ली फिर से अपनी जगह पर खड़ी होकर तपस्या करने लगती, इसलिए किसी को उस पर शक नहीं होता।

कुछ दिनों बाद, चूहों के राजा ने ध्यान दिया कि चूहों की संख्या लगातार कम हो रही है। राजा समझदार था। उसने बिल्ली के 'मल' की जाँच की और उसे उसमें चूहों के बाल मिले!

राजा समझ गया कि यह बिल्ली कोई साधु नहीं, बल्कि एक पाखंडी है।

अगले दिन जब बिल्ली ने सत्संग के बाद पीछे से झपट्टा मारने की कोशिश की, तो चूहों का राजा पहले से ही सतर्क था। उसने ज़ोर से आवाज़ दी: "भागो मेरे भाइयो! यह कोई तपस्विनी नहीं, मौत का जाल है। माला पहनने से कोई खूंखार जानवर संत नहीं बन जाता!"

सारे चूहे तुरंत अपने बिल में घुस गए और ढोंगी बिल्ली का खेल हमेशा के लिए खत्म हो गया।

नीति / सीख: भेड़ की खाल में छिपे भेड़िए से हमेशा सावधान रहना चाहिए। कोई दुष्ट इंसान केवल अपने 'कपड़े या रूप' बदल लेने से अच्छा नहीं हो जाता। किसी के दिखावे से ज़्यादा उसके 'स्वभाव' पर ध्यान देना चाहिए।

🎉 कहानी समाप्त

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