बातूनी कछुआ और दो हंस — बिना मांगे सलाह और मूर्खता

एक झील के किनारे 'कम्बुग्रीव' नाम का एक कछुआ रहता था। वह स्वभाव से बहुत अच्छा था, परंतु उसकी एक बहुत बड़ी कमज़ोरी थी— वह 'बहुत बातूनी' था। वह बिना रुके घंटों तक बोल सकता था।
उसी झील में 'संकट' और 'विकट' नाम के दो हंस भी रहते थे, जो कछुए के बहुत अच्छे दोस्त थे।
एक साल बारिश बिल्कुल नहीं हुई और भयंकर सूखा पड़ गया। झील का पानी सूखने लगा। हंसों ने फैसला किया कि वे उड़कर किसी दूर स्थित बड़ी झील में चले जाएंगे। कछुआ यह सुनकर रोने लगा। उसने कहा: "दोस्तो! अगर तुम मुझे यहाँ छोड़कर चले गए, तो मैं बिना पानी के मर जाऊँगा। मुझे भी अपने साथ ले चलो!"
हंसों ने कहा: "मित्र! हम तो हवा में उड़ सकते हैं, लेकिन तुम तो रेंगते हो और बहुत भारी भी हो। हम तुम्हें आसमान में उड़ाकर कैसे ले जा सकते हैं?"
उड़ने की अनोखी तरकीब: कछुए ने एक तरकीब सुझाई। उसने कहा: "तुम दोनों एक मज़बूत 'लकड़ी की छड़ी' लेकर आओ। तुम दोनों अपनी चोंच से उस छड़ी के दोनों सिरों को पकड़ लेना, और मैं बीच में से उस छड़ी को अपने 'मुँह' से कसकर पकड़ लूँगा। इस तरह मैं भी तुम्हारे साथ उड़ सकूँगा!"
हंसों को तरकीब अच्छी लगी, परंतु वे कछुए की बातूनी आदत को जानते थे। उन्होंने चेतावनी दी: "हम तुम्हें ले चलेंगे, परंतु याद रखना— जब तक हम हवा में उड़ते रहेंगे, तुम्हें अपना मुँह बिल्कुल बंद रखना होगा! अगर तुमने बोलने के लिए मुँह खोला, तो तुम गिरकर मर जाओगे।"
कछुए ने कसम खाई कि वह एक शब्द भी नहीं बोलेगा।
आसमान की सैर और बेवकूफी: अगले दिन योजना के अनुसार, हंसों ने लकड़ी पकड़ी, कछुए ने बीच से मुँह में लकड़ी दबाई और तीनों हवा में उड़ चले। कछुआ आसमान से ज़मीन को देखकर बहुत रोमांचित था।
उड़ते-उड़ते वे एक गाँव के ऊपर से गुज़रे। गाँव वालों ने जब आसमान में यह अजीब नज़ारा देखा— कि दो पक्षी एक कछुए को लकड़ी के सहारे उड़ा कर ले जा रहे हैं— तो वे हैरानी से चिल्लाने लगे: "अरे देखो! देखो! आसमान में क्या अजूबा हो रहा है! ये हंस एक कछुए को कैसे उड़ा कर ले जा रहे हैं! अगर यह कछुआ नीचे गिर जाए, तो हम इसे पका कर खाएंगे!"
गाँव वालों का शोर और उनकी बातें सुनकर बातूनी कछुए को बहुत गुस्सा आ गया। वह भूल गया कि वह हवा में है। उसने गाँव वालों को डांटने के लिए जैसे ही अपना 'मुँह खोला': "तुम मूर्ख लोग क्या बक..."
मुँह खुलते ही लकड़ी उसके दांतों से छूट गई! कछुआ आसमान से सीधे ज़मीन पर पत्थरों के बीच आ गिरा और उसके टुकड़े-टुकड़े हो गए। हंस अपने मूर्ख दोस्त की मौत पर दुखी होते हुए आगे उड़ गए।
नीति / सीख: सच्चे मित्रों की दी हुई अच्छी सलाह को हमेशा मानना चाहिए। जो इंसान यह नहीं जानता कि 'कब चुप रहना है', उसकी बेवकूफी ही उसकी जान ले लेती है।
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