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📜 पंचतंत्र

भालू और चींटी — बालों का घमंड और कान का दर्द

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा4 मिनट का पठन
भालू और चींटी — बालों का घमंड और कान का दर्द

एक जंगल में एक भालू रहता था। उसे अपने शरीर के 'घने और मोटे बालों' पर बहुत घमंड था। वह हमेशा सोचता था कि उसके बाल इतने घने हैं कि जंगल का कोई भी कीड़ा, कांटा या मौसम उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

एक दिन भालू जंगल में घूमते हुए थक गया और उसने आराम करने की सोची। उसने एक ऊंचे और नर्म मिट्टी के ढेर को देखा और बिना सोचे-समझे उसके ऊपर लेट गया।

दरअसल, वह मिट्टी का ढेर एक 'चींटियों का बिल' था, जिसमें हज़ारों चींटियाँ रहती थीं। भालू के भारी शरीर से बिल टूटने लगा।

एक छोटी सी चींटी ने बाहर आकर भालू से कहा: "भालू भाई! कृपया यहाँ से उठ जाइए। यह हमारा घर है और आपके भारी शरीर से हमारा घर टूट रहा है।"

भालू का अहंकार: भालू ज़ोर से हंसा और बोला: "अरे ओ छोटी सी चींटी! तुम मेरा क्या बिगाड़ लोगी? मेरे शरीर पर इतने घने बाल हैं कि तुम्हारा डंक मुझ तक पहुँच ही नहीं सकता। मैं तो यहीं सोऊँगा, जो करना है कर लो!"

चींटियों को भालू की इस गुंडागर्दी पर बहुत गुस्सा आया। उन्होंने भालू को सबक सिखाने की ठानी।

चींटी का वार: भालू आँखें बंद करके सो गया। तभी एक बहुत ही चालाक चींटी धीरे-धीरे रेंगती हुई भालू के चेहरे तक पहुँची। उसने भालू के घने बालों को निशाना नहीं बनाया, बल्कि वह भालू के 'कान के अंदर' घुस गई!

कान के अंदर बाल नहीं होते और त्वचा बहुत ही कोमल होती है। चींटी ने कान के अंदर जाकर अपने तेज़ दांतों से भालू को ज़ोर-ज़ोर से काटना शुरू कर दिया।

भालू दर्द के मारे एकदम उछल पड़ा! उसने अपने सिर को ज़ोर-ज़ोर से हिलाया, अपने पंजों से अपने ही कानों पर मारा, लेकिन चींटी बाहर नहीं निकली। वह अंदर और ज़ोर से काटती रही।

भालू का सारा घमंड पल भर में टूट गया। वह दर्द से रोता हुआ और अपना सिर पीटता हुआ जंगल में पागलों की तरह भागने लगा।

अंततः भालू ने गिड़गिड़ा कर माफ़ी मांगी: "मुझे माफ़ कर दो! मैं अब कभी तुम्हारे घर पर नहीं बैठूंगा। मुझे छोड़ दो!" चींटी कान से बाहर आ गई और भालू ने फिर कभी अपनी ताक़त और घने बालों का घमंड नहीं किया।

नीति / सीख: किसी भी प्राणी को उसके छोटे आकार के कारण कमज़ोर नहीं समझना चाहिए। आपका रक्षा-कवच चाहे कितना भी मज़बूत हो, एक छोटी सी कमज़ोरी (जैसे कान) आपके पतन का कारण बन सकती है।

🎉 कहानी समाप्त

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