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📜 पंचतंत्र

शेर और लोमड़ी — गुफा के निशान और चतुर दिमाग

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा4 मिनट का पठन
शेर और लोमड़ी — गुफा के निशान और चतुर दिमाग

जंगल का राजा शेर अब बहुत बूढ़ा हो चला था। उसके पंजों में अब वह ताक़त नहीं बची थी कि वह जंगल में दौड़कर शिकार कर सके। भूख के मारे उसकी हालत खराब होने लगी थी।

भूख से बचने के लिए उस बूढ़े शेर ने एक तरकीब सोची। वह अपनी गहरी और अंधेरी 'गुफा' के अंदर जाकर लेट गया और उसने पूरे जंगल में यह खबर फैला दी कि "शेर बहुत गंभीर रूप से बीमार है और अपने अंतिम दिन गिन रहा है।"

यह खबर सुनकर जंगल के कई जानवर (बकरी, भेड़, सुअर आदि) अपने राजा का हालचाल पूछने और उसके प्रति सम्मान दिखाने के लिए उसकी गुफा में आने लगे।

लेकिन जो भी जानवर गुफा के अंदर जाता, वह खूंखार शेर एक ही झपट्टे में उसे मारकर खा जाता। शेर आराम से गुफा में लेटा रहता और उसका पेट भरता रहता।

लोमड़ी की सतर्कता: एक दिन चतुर लोमड़ी की बारी आई। वह भी शेर का हालचाल पूछने गुफा के पास पहुँची। परंतु लोमड़ी बहुत होशियार थी, उसने बिना सोचे-समझे गुफा के अंदर पैर नहीं रखा।

लोमड़ी गुफा के बाहर एक सुरक्षित दूरी पर खड़ी हो गई और उसने बाहर से ही आवाज़ दी: "महाराज! आपकी तबीयत कैसी है? मुझे सुनकर बहुत दुख हुआ कि आप बीमार हैं।"

शेर ने गुफा के अंदर से अपनी मीठी और कमज़ोर आवाज़ में कहा: "आओ लोमड़ी, अंदर आ जाओ। मैं बहुत कमज़ोर हो गया हूँ, मुझे ठीक से दिखाई भी नहीं दे रहा। पास आकर मुझसे बात करो।"

लोमड़ी ने गुफा के बाहर की 'मिट्टी' पर ध्यान से देखा। उसने शेर को जवाब दिया: "महाराज! मैं अंदर ज़रूर आती, लेकिन मैं देख रही हूँ कि गुफा के बाहर मिट्टी पर बहुत सारे जानवरों के 'पैरों के निशान' बने हुए हैं, जो गुफा के 'अंदर' की तरफ जा रहे हैं... परंतु मुझे एक भी ऐसा निशान नहीं दिखा जो गुफा से 'बाहर' की तरफ आ रहा हो! इसका मतलब है कि जो भी आपके पास अंदर गया, वह कभी लौटकर बाहर नहीं आया। इसलिए मैं यहीं बाहर से ही ठीक हूँ!"

यह कहकर लोमड़ी वहाँ से सुरक्षित भाग गई और शेर गुफा के अंदर अपना माथा पीटता रह गया।

नीति / सीख: चतुर इंसान दूसरों की गलतियों और विनाश से सबक सीख लेता है। किसी भी अनजान या खतरनाक जगह पर जाने से पहले, आगे-पीछे का अच्छी तरह निरीक्षण कर लेना चाहिए।

🎉 कहानी समाप्त

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