गधा और भालू — झूठा खौफ और मूर्खता का अंजाम

एक बार एक गधा अपने मालिक का घर छोड़कर जंगल में भाग गया। जंगल में उसे कोई काम नहीं करना पड़ता था, इसलिए वह खा-खाकर बहुत मोटा-ताज़ा हो गया।
जंगल के कई छोटे जानवर (जैसे खरगोश, गिलहरी) गधे को नहीं जानते थे। जब गधा अपनी पूरी ताकत से ज़ोर-ज़ोर से रेंकता, तो उसकी भयानक और कर्कश आवाज़ सुनकर छोटे जानवर डर कर भागने लगते।
यह देखकर गधे के मन में अहंकार आ गया। उसने सोचा, "वाह! मेरी आवाज़ में तो शेर जैसा खौफ है। जंगल के जानवर मुझसे डरते हैं। मैं तो बहुत ताक़तवर हूँ!"
गधे की घमंडी चाल: एक दिन वह गधा जंगल में अकड़ता हुआ चल रहा था। तभी सामने से एक विशालकाय 'भालू' आता हुआ दिखाई दिया।
गधे ने सोचा कि आज इस भालू को भी डराकर अपनी ताक़त साबित की जाए। जैसे ही भालू पास आया, गधे ने अपना सिर ऊपर उठाया, अपने कान खड़े किए और पूरी ताकत से ज़ोर-ज़ोर से रेंकना शुरू कर दिया— "ढेंचू! ढेंचू!" और भालू की तरफ दौड़ पड़ा।
भालू अपनी धुन में चल रहा था। उसे गधे की इस अजीब और कान फोड़ू आवाज़ से बहुत चिढ़ हुई।
भालू का करारा तमाचा: गधे को लगा कि भालू भी उसकी आवाज़ सुनकर डर जाएगा, इसलिए वह और करीब जाकर रेंकने लगा और उसने अपनी 'दुलत्ती' मारने के लिए पीछे घूमा।
परंतु भालू कोई छोटा जानवर नहीं था। भालू ने गुस्से में गुर्राते हुए अपना भारी 'पंजा' उठाया और गधे के सिर पर एक ज़ोरदार तमाचा जड़ दिया!
तमाचा इतना ज़ोरदार था कि गधा चारों खाने चित होकर ज़मीन पर गिर पड़ा। उसकी सारी अक्ल ठिकाने आ गई।
भालू ने गधे की तरफ देखा और कहा: "अरे मूर्ख! तेरी आवाज़ भले ही तेज़ हो, लेकिन तू है तो एक 'गधा' ही। अपनी औकात भूलकर ताक़तवर लोगों से पंगा लेना बेवकूफी है।" यह कहकर भालू आगे बढ़ गया और गधा अपनी मूर्खता पर पछताता रह गया।
नीति / सीख: ज़ोर से चिल्लाने या दिखावा करने से कोई इंसान ताक़तवर नहीं बन जाता। अपनी असली क्षमता को भूलकर दूसरों को डराने की कोशिश करने वाले मूर्ख लोग अक्सर अपना ही नुकसान करवा बैठते हैं।
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