भालू और सियार — झूठी तारीफ और खोया हुआ शिकार

एक भालू बहुत ही ताक़तवर था, लेकिन वह स्वभाव से थोड़ा सीधा और चापलूसों की बातों में जल्दी आने वाला था।
एक दिन भालू ने बहुत मेहनत करके एक बड़े से सुअर का शिकार किया। वह एक पेड़ के नीचे बैठकर आराम से अपनी दावत खाने की तैयारी कर रहा था।
तभी वहाँ से एक बहुत ही चालाक और भूखा सियार गुज़रा। सियार ने भालू के पास इतना बड़ा और ताज़ा शिकार देखा तो उसके मुँह में पानी आ गया। सियार जानता था कि वह भालू से लड़कर शिकार नहीं छीन सकता, इसलिए उसने अपनी कूटनीति का इस्तेमाल किया।
सियार की मीठी बातें: सियार हाथ जोड़कर भालू के पास गया और उसकी झूठी तारीफों के पुल बांधने लगा: "महाराज की जय हो! भालू जी, आप तो इस जंगल के सबसे महान और ताक़तवर योद्धा हैं। आपके बाहुबल की चर्चा तो पूरे जंगल में है।"
भालू अपनी तारीफ सुनकर बहुत खुश हुआ और उसका सीना चौड़ा हो गया।
सियार ने अपना जाल फेंकते हुए कहा: "परंतु महाराज, मुझे एक बात समझ नहीं आई। आप जैसा महान और विशालकाय योद्धा इस छोटे से सुअर का शिकार करके क्यों बैठा है? यह शिकार तो आपके रुतबे के हिसाब से बहुत छोटा है!"
भालू ने पूछा: "तो मुझे क्या करना चाहिए?"
लालच का दांव: सियार ने एक झाड़ी की तरफ इशारा करते हुए कहा: "महाराज! मैंने अभी-अभी उस झाड़ी के पीछे एक बहुत ही विशालकाय और मोटे-ताज़े 'हिरण' को फंसा हुआ देखा है। वह शिकार आपके लायक है। आप तुरंत जाकर उसे पकड़ लीजिए, तब तक मैं आपके इस 'छोटे' शिकार की रखवाली करता हूँ।"
भालू सियार की झूठी तारीफों और बड़े शिकार के लालच में अंधा हो गया। उसने बिना सोचे-समझे सुअर के शिकार को वहीं ज़मीन पर छोड़ दिया और उस झाड़ी की तरफ दौड़ पड़ा।
भालू ने पूरी झाड़ी छान मारी, लेकिन वहाँ कोई हिरण नहीं था। जब भालू वापस उस पेड़ के नीचे आया, तो उसके होश उड़ गए!
वहाँ न तो वह चालाक सियार था और न ही उसका शिकार किया हुआ सुअर। सियार अपनी मीठी बातों से भालू को बेवकूफ बनाकर उसका सारा खाना लेकर भाग चुका था।
नीति / सीख: जो लोग आपकी बहुत ज़्यादा और बिना बात की तारीफ करते हैं, वे अक्सर आपको धोखा देने की फिराक में होते हैं। लालच और झूठी तारीफों में आकर इंसान अपने हाथ में मौजूद चीज़ भी गँवा बैठता है।
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