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📜 पंचतंत्र

चिड़िया और बंदर — मूर्खों को उपदेश और अपना नुकसान

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा3 मिनट का पठन
चिड़िया और बंदर — मूर्खों को उपदेश और अपना नुकसान

सर्दियों का मौसम था। आसमान से ज़ोरदार बारिश हो रही थी और बर्फीली हवाएँ चल रही थीं।

एक पेड़ पर एक 'बया चिड़िया' का बहुत ही सुंदर और मज़बूत घोंसला था। चिड़िया अपने घोंसले के अंदर बिल्कुल सूखी और गर्म बैठी थी।

उसी पेड़ के नीचे कुछ 'बंदरों' का एक झुंड बैठा था। बंदरों के पास रहने के लिए कोई घर नहीं था। वे बारिश में पूरी तरह भीग चुके थे और ठंड से बुरी तरह काँप रहे थे।

आग का भ्रम: तभी एक बंदर की नज़र ज़मीन पर पड़े एक लाल रंग के चमकते हुए दाने (या जुगनू/Firefly) पर पड़ी।

बंदरों को लगा कि वह लाल दाना 'आग की चिंगारी' है। ठंड से बचने के लिए सारे बंदर उस लाल दाने के चारों ओर गोल घेरा बनाकर बैठ गए और उसे 'आग' समझकर उस पर ज़ोर-ज़ोर से 'फूँक' मारने लगे, ताकि आग भड़क जाए और उन्हें गर्मी मिले।

चिड़िया की नेक सलाह: घोंसले में बैठी चिड़िया से बंदरों की यह मूर्खता और उनकी ठंड देखी नहीं गई। उसने नेक नीयत से बंदरों को आवाज़ दी: "अरे बंदर भाइयो! तुम लोग बेवजह अपनी साँस बर्बाद कर रहे हो। वह कोई आग नहीं है, वह तो एक चमकने वाला लाल दाना (गुंजा का फल) है। इस तरह फूँक मारने से वह नहीं जलेगा। इसके बजाय तुम भागकर किसी गुफा में चले जाओ, तो ठंड से बच जाओगे।"

बंदर वैसे ही ठंड से चिड़चिड़े हो रहे थे। एक बंदर ने गुस्से से कहा: "चुप कर छोटी सी चिड़िया! हमें मत सिखा कि हमें क्या करना है।"

उपदेश का भयंकर परिणाम: बंदर फिर से फूँक मारने लगे। चिड़िया को लगा कि शायद इन्हें मेरी बात समझ नहीं आई।

वह पेड़ की निचली डाल पर आई और फिर से समझाने लगी: "भाइयो, मेरी बात मानो। ईश्वर ने तुम्हें इंसानों जैसे हाथ-पैर दिए हैं। तुम मेरी तरह मेहनत करके अपने लिए एक 'घर' क्यों नहीं बना लेते? मूर्खता मत करो।"

यह सुनते ही एक बड़े बंदर का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसे लगा कि यह छोटी सी चिड़िया उनका अपमान कर रही है।

बंदर ने क्रोध में दाँत पीसते हुए कहा: "तू इतनी सी होकर हमें उपदेश दे रही है? ले अपना घर!"

बंदर ने छलांग लगाई और चिड़िया के उस सुंदर और मज़बूत 'घोंसले को पकड़कर बुरी तरह नोच डाला' और ज़मीन पर फेंक दिया! चिड़िया का घर पूरी तरह तबाह हो गया और उसे उस बारिश में बेघर होकर जान बचाने के लिए उड़ना पड़ा।

नीति / सीख: मूर्ख और क्रोधी लोगों को कभी 'बिना माँगी सलाह' या ज्ञान नहीं देना चाहिए। मूर्ख इंसान कभी सही बात नहीं सीखता, बल्कि वह क्रोधित होकर ज्ञान देने वाले का ही नुकसान कर बैठता है।

🎉 कहानी समाप्त

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