दो सिर वाला पक्षी (भारुंड पक्षी) — आपसी फूट और प्रतिशोध का ज़हर

एक घने जंगल में एक बहुत बड़ी झील थी। उस झील के किनारे एक बहुत ही विचित्र और जादुई पक्षी रहता था, जिसे 'भारुंड' कहा जाता था। इस पक्षी का शरीर तो एक ही था, परंतु इसके 'दो सिर' थे।
चूँकि शरीर एक था, इसलिए दोनों सिरों का पेट भी एक ही था। दोनों सिर आपस में खूब बातें करते थे, लेकिन कभी-कभी छोटी-छोटी बातों पर लड़ भी पड़ते थे।
एक दिन भारुंड पक्षी झील के किनारे घूम रहा था। अचानक उसके पहले सिर को एक बहुत ही सुंदर और खुशबूदार फल मिला। यह 'अमृत-फल' था।
पहले सिर ने उस फल को चखा और खुशी से झूम उठा: "वाह! मैंने अपनी ज़िंदगी में इतना स्वादिष्ट और मीठा फल कभी नहीं खाया। यह तो स्वर्ग के फल जैसा है!"
दूसरे सिर की इच्छा और अहंकार: फल की मीठी खुशबू सुनकर दूसरे सिर के मुँह में भी पानी आ गया। उसने पहले सिर से कहा: "भाई! मुझे भी यह फल चखने दो। ज़रा मैं भी तो देखूँ कि यह कितना मीठा है।"
परंतु पहले सिर के मन में लालच आ गया। उसने अहंकार से कहा: "अरे भाई! तुम खाओ या मैं खाऊँ, क्या फर्क पड़ता है? हम दोनों का 'पेट' तो एक ही है ना! फल तो उसी पेट में जाएगा और ताकत हम दोनों को मिलेगी। इसलिए यह बचा हुआ फल मैं तुम्हें देने के बजाय, अपनी प्यारी 'पत्नी' को दूँगा।"
यह कहकर पहले सिर ने वह फल भारुंड की पत्नी को दे दिया।
प्रतिशोध: इस बात से दूसरे सिर को बहुत गहरा अपमान महसूस हुआ। वह गुस्से और ईर्ष्या से जलने लगा। उसने सोचा, "इसने मुझे फल नहीं दिया और मेरा मज़ाक उड़ाया। मैं इससे ज़रूर बदला लूँगा!"
कुछ दिन बाद, भारुंड पक्षी जंगल में घूम रहा था कि दूसरे सिर की नज़र एक 'ज़हरीले फल' पर पड़ी। दूसरे सिर ने तुरंत उसे अपनी चोंच में उठा लिया और कहा: "आज मैं यह ज़हरीला फल खाऊँगा और तुम्हें मज़ा चखाऊँगा!"
पहला सिर घबरा गया। उसने गिड़गिड़ाते हुए कहा: "अरे मूर्ख! ऐसा मत करना! हम दोनों का पेट एक ही है। अगर तूने यह ज़हर खा लिया, तो हम दोनों तड़प-तड़प कर मर जाएंगे!"
परंतु दूसरा सिर प्रतिशोध की आग में अंधा हो चुका था। उसने कहा: "मुझे परवाह नहीं है! मुझे तो बस तुझे सज़ा देनी है!"
दूसरे सिर ने ज़िद में आकर वह ज़हरीला फल खा लिया। ज़हर तुरंत उनके एक ही पेट में फैल गया, और कुछ ही पलों में उस जादुई भारुंड पक्षी की तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
नीति / सीख: परिवार या टीम के अंदर की फूट और ईर्ष्या हमेशा विनाश लाती है। जब एक ही परिवार (या संस्था) के लोग एक-दूसरे को नीचा दिखाने या बदला लेने की कोशिश करते हैं, तो अंततः पूरा परिवार ही नष्ट हो जाता है।
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