कुत्ता और सियार — गुलामी की दावत और आज़ादी की भूख

एक जंगली सियार बहुत दिनों से भूखा था। जंगल में उसे शिकार नहीं मिल रहा था, इसलिए वह कमज़ोर होकर सूख कर कांटा हो गया था। भोजन की तलाश में वह भटकता हुआ एक गाँव के किनारे पहुँच गया।
वहाँ उसकी मुलाकात एक 'पालतू कुत्ते' से हुई। कुत्ता बहुत ही मोटा-ताज़ा, हट्टा-कट्टा और चमकदार था।
सियार ने कुत्ते को देखकर पूछा: "भाई! तुम तो बहुत स्वस्थ और मज़बूत लग रहे हो। तुम्हें यहाँ खाने के लिए क्या मिलता है?"
कुत्ते ने घमंड से जवाब दिया: "मैं इंसानों के घर की रखवाली करता हूँ। मेरा मालिक मुझे रोज़ ताज़ा मांस, दूध और रोटियां खाने को देता है। मुझे तुम्हारी तरह जंगल में शिकार के लिए भटकना नहीं पड़ता। तुम भी मेरे साथ चलो, मैं मालिक से कहकर तुम्हें भी काम दिला दूँगा।"
सियार यह सुनकर बहुत खुश हुआ। उसने सोचा कि अब उसे जीवन भर बिना मेहनत किए स्वादिष्ट खाना मिलेगा।
गले का निशान और आज़ादी: दोनों साथ-साथ गाँव की तरफ चलने लगे। चलते-चलते अचानक सियार की नज़र कुत्ते की 'गर्दन' पर पड़ी। कुत्ते की गर्दन पर एक बहुत गहरा और बिना बालों वाला 'निशान' था।
सियार ने हैरानी से पूछा: "मित्र! तुम्हारी गर्दन पर यह कैसा निशान है? यहाँ के बाल क्यों उड़े हुए हैं?"
कुत्ते ने बहुत ही साधारण तरीके से जवाब दिया: "अरे कुछ नहीं! यह तो 'पट्टे और लोहे की ज़ंजीर' का निशान है। दिन के समय मेरा मालिक मुझे घर के बाहर एक भारी ज़ंजीर से बांध कर रखता है, ताकि मैं कहीं भाग न जाऊँ। मैं केवल रात को ही खुल सकता हूँ।"
सियार के कदम वहीं रुक गए। उसका सारा लालच खत्म हो गया।
सियार ने पीछे मुड़ते हुए कुत्ते से कहा: "मित्र! तुम्हारी यह दावत और आराम तुम्हें ही मुबारक हो। मुझे तुम्हारा यह काम नहीं चाहिए। मैं जंगल में भूखा रहना पसंद करूँगा, लेकिन अपने गले में 'गुलामी की ज़ंजीर' नहीं बाँधूँगा!"
यह कहकर सियार अपनी 'आज़ादी' की ओर, वापस जंगल में लौट गया।
नीति / सीख: आज़ादी दुनिया की सबसे कीमती चीज़ है। गुलामी में मिलने वाले सोने के पिंजरे और छप्पन भोग से कहीं बेहतर, आज़ादी में मिलने वाली सूखी रोटी है।
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