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📜 पंचतंत्र

गधा और घोड़ा — स्वार्थ का बोझ और भारी परिणाम

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा4 मिनट का पठन
गधा और घोड़ा — स्वार्थ का बोझ और भारी परिणाम

एक व्यापारी के पास दो जानवर थे— एक बहुत ही सुंदर और हट्टा-कट्टा 'घोड़ा' और एक कमज़ोर सा 'गधा' ।

व्यापारी घोड़े से बहुत प्यार करता था, क्योंकि वह उसकी सवारी के काम आता था। वहीं गधे से वह केवल भारी सामान ढुलवाता था।

एक दिन व्यापारी को किसी दूसरे शहर सामान बेचने जाना था। उसने गधे की पीठ पर सामान से भरे बहुत भारी-भारी बोरे लाद दिए। गधा बोझ के मारे दबा जा रहा था। दूसरी तरफ, घोड़े की पीठ पर कोई सामान नहीं था; उस पर केवल व्यापारी बैठा था।

गधे की गुहार: रास्ता बहुत लंबा और पहाड़ी था। तेज़ धूप और भारी बोझ के कारण गधा थक कर चूर हो गया। उसकी सांसें फूलने लगीं और पैर डगमगाने लगे।

गधे ने घोड़े से मिन्नतें करते हुए कहा: "घोड़े भाई! मेरी पीठ पर बहुत ज़्यादा बोझ है और मैं अब एक कदम भी नहीं चल पा रहा हूँ। तुम्हारी पीठ खाली है। कृपया मेरा आधा बोझ अपनी पीठ पर ले लो, वरना मैं मर जाऊँगा।"

घोड़ा बहुत घमंडी और स्वार्थी था। उसने गधे को झिड़कते हुए कहा: "मैं एक कुलीन और शानदार घोड़ा हूँ! मेरा काम बोरे ढोना नहीं है। यह तुम्हारा काम है। तुम मरते हो तो मरो, मैं तुम्हारा बोझ बिल्कुल नहीं उठाऊँगा।"

गधा चुपचाप सिर झुकाकर चलने लगा।

स्वार्थ की सज़ा: कुछ मील और चलने के बाद, गधा उस भारी बोझ को बर्दाश्त नहीं कर सका। वह चक्कर खाकर ज़मीन पर गिरा और वहीं उसके प्राण निकल गए (वह मर गया)।

व्यापारी नीचे उतरा। उसने देखा कि गधा मर चुका है। अब व्यापारी के सामने समस्या थी कि वह अपना सारा कीमती सामान शहर तक कैसे ले जाए।

व्यापारी ने बिना कुछ सोचे, गधे की पीठ से वह सारा 'भारी बोझ' उतारा और उसे 'घोड़े की पीठ' पर लाद दिया! इतना ही नहीं, व्यापारी ने मरे हुए गधे की खाल भी निकाली और उसे भी घोड़े की पीठ पर रख दिया।

अब जो घोड़ा खाली पीठ शान से चल रहा था, उसे वह पूरा भयानक बोझ ढोना पड़ा, जिसके कारण गधे की मौत हुई थी।

घोड़ा उस भारी बोझ के नीचे पसीने से नहा गया और कराहते हुए मन ही मन सोचने लगा: "काश! मैंने अपने घमंड को किनारे रखकर गधे का 'आधा बोझ' बांट लिया होता। आज मेरी स्वार्थपरता के कारण मुझे उसका 'पूरा बोझ' और उसकी खाल भी ढोनी पड़ रही है।"

नीति / सीख: मुसीबत में पड़े अपने साथियों की हमेशा मदद करनी चाहिए। जो लोग दूसरों की मदद करने से मुँह मोड़ते हैं, अंत में दूसरों की मुसीबत का 'पूरा बोझ' उन्हीं के कंधों पर आ गिरता है।

🎉 कहानी समाप्त

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