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📜 पंचतंत्र

गौरैया और हाथी — कमज़ोरों की एकता और घमंड का अंत

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा5 मिनट का पठन
गौरैया और हाथी — कमज़ोरों की एकता और घमंड का अंत

एक जंगल में एक बहुत बड़े पेड़ पर गौरैया का एक जोड़ा रहता था। पेड़ की एक डाल पर उनका घोंसला था, जिसमें उनके छोटे-छोटे अंडे रखे हुए थे। गौरैया और उसका पति बहुत खुश थे और अपने बच्चों के बाहर आने का इंतज़ार कर रहे थे।

एक दिन दोपहर के समय, वसंत ऋतु की गर्मी से परेशान एक बहुत बड़ा और 'पागल हाथी' उस पेड़ के नीचे आया। हाथी को अपने बल पर बहुत घमंड था। गर्मी और खुजली मिटाने के लिए उसने उस पेड़ की उसी डाली को अपनी सूंड से ज़ोर से हिलाया, जिस पर गौरैया का घोंसला था।

हाथी के झटके से डाली टूट गई। घोंसला नीचे गिर गया और गौरैया के सारे 'अंडे' फूट गए!

बदले की योजना: गौरैया अपने अंडों को टूटा हुआ देखकर फूट-फूट कर रोने लगी। उसका पति भी बहुत दुखी हुआ। उसने कसम खाई कि वह इस घमंडी हाथी से अपने बच्चों की मौत का बदला ज़रूर लेगा।

गौरैया का पति अपने एक बहुत अच्छे दोस्त 'कठफोड़वा' के पास गया। उसने सारी बात बताई। कठफोड़वा ने कहा: "दोस्त, चिंता मत करो। मैं तुम्हारी मदद करूँगा, लेकिन हमें और भी दोस्तों की ज़रूरत होगी।"

कठफोड़वा उन्हें अपनी एक दोस्त 'मक्खी' के पास ले गया, और फिर वे तीनों मिलकर एक 'मेंढक' के पास गए। चारों दोस्तों (गौरैया, कठफोड़वा, मक्खी और मेंढक) ने मिलकर उस विशालकाय हाथी को मारने की एक अचूक योजना बनाई।

एकता का वार: अगले दिन दोपहर में, जब वह हाथी जंगल में आराम कर रहा था, तब योजना शुरू हुई।

सबसे पहले 'मक्खी' उड़कर गई और उसने हाथी के कानों के पास एक बहुत ही सुरीला और मीठा संगीत 'गुनगुनाना' शुरू कर दिया। हाथी उस सुरीली आवाज़ में इतना मगन हो गया कि उसने आनंद में अपनी 'आँखें बंद' कर लीं।

जैसे ही हाथी ने आँखें बंद कीं, 'कठफोड़वा' बिजली की तरह उड़कर आया और उसने अपनी तेज़ और नुकीली चोंच से हाथी की 'दोनों आँखें' फोड़ दीं!

हाथी दर्द से चिंघाड़ने लगा। वह पूरी तरह अंधा हो चुका था। दर्द और प्यास के मारे वह पानी ढूंढने के लिए इधर-उधर भागने लगा, परंतु उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

तभी 'मेंढक' अपने पूरे परिवार के साथ एक 'बहुत गहरे सूखे गड्ढे' के पास जाकर ज़ोर-ज़ोर से टर्राने लगा— "टर्र! टर्र!"

अंधे हाथी ने जब मेंढकों की आवाज़ सुनी, तो उसने सोचा कि वहाँ ज़रूर कोई 'तालाब' होगा। वह पानी की लालच में उस आवाज़ की दिशा में दौड़ा और सीधा उस 'गहरे सूखे गड्ढे' में जा गिरा!

गड्ढा इतना गहरा था कि भारी हाथी वहाँ से बाहर नहीं निकल सका और भूख-प्यास से तड़प-तड़प कर वहीं मर गया।

नीति / सीख: कमज़ोर से कमज़ोर लोग भी अगर एकजुट हो जाएं और अपनी बुद्धि का सही इस्तेमाल करें, तो वे दुनिया के सबसे ताक़तवर और घमंडी दुश्मन को भी मिट्टी में मिला सकते हैं।

🎉 कहानी समाप्त

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