लोहे की तराजू — जैसे को तैसा और चूहे का कमाल

'जीर्णधन' नाम का एक व्यापारी था। व्यापार में बहुत बड़ा घाटा होने के कारण वह बिल्कुल कंगाल हो गया था। उसने फैसला किया कि वह पैसे कमाने के लिए किसी दूसरे शहर जाएगा।
उसके पास अपनी संपत्ति के नाम पर केवल एक बहुत भारी और कीमती 'लोहे की तराजू' बची थी। जाने से पहले, वह अपनी वह तराजू अपने एक दोस्त 'लक्ष्मण' के पास अमानत के तौर पर रख गया। जीर्णधन ने कहा: "मित्र! जब मैं पैसे कमाकर वापस लौटूँगा, तो अपनी तराजू ले लूँगा।"
कई सालों बाद, जीर्णधन बहुत सारा धन कमाकर वापस अपने शहर लौटा। वह सीधा लक्ष्मण के घर गया और अपनी लोहे की तराजू मांगी।
लक्ष्मण का झूठ: लक्ष्मण के मन में बेईमानी आ गई थी। उसने वह भारी लोहे की तराजू बाज़ार में बेच दी थी।
लक्ष्मण ने बहुत ही मासूम सा चेहरा बनाकर कहा: "अरे मित्र जीर्णधन! मुझे बहुत अफ़सोस है। तुम्हारी लोहे की तराजू तो मैंने स्टोररूम में रखी थी, परंतु वहाँ बहुत सारे 'चूहे' आ गए और उन्होंने तुम्हारी वह पूरी भारी तराजू 'खा' ली!"
जीर्णधन समझ गया कि उसका दोस्त झूठ बोल रहा है। लोहे को चूहे कैसे खा सकते हैं? परंतु वह बिल्कुल शांत रहा। उसने मुस्कुराकर कहा: "कोई बात नहीं मित्र! इसमें तुम्हारी क्या गलती? चूहों का तो स्वभाव ही कुतरना है। जाने दो।"
लक्ष्मण खुश हो गया कि जीर्णधन बेवकूफ बन गया। तब जीर्णधन ने कहा: "मित्र! मैं नदी पर नहाने जा रहा हूँ। तुम अपने 'बेटे' को मेरे साथ भेज दो, वह मेरे कपड़े पकड़ लेगा।" लक्ष्मण ने बिना सोचे अपने बेटे को जीर्णधन के साथ भेज दिया।
बाज और बच्चे की कहानी: जीर्णधन नहाने गया, और उसने लक्ष्मण के बेटे को पास की एक 'गुफा' में छिपा दिया और गुफा का मुँह एक बड़े पत्थर से बंद कर दिया।
जब जीर्णधन अकेला वापस लौटा, तो लक्ष्मण ने घबराकर पूछा: "मेरा बेटा कहाँ है?"
जीर्णधन ने बहुत ही शांत और दुखी स्वर में कहा: "मित्र! मैं क्या बताऊँ? जब हम नदी पर थे, तो अचानक आसमान से एक बहुत बड़ा 'बाज' आया और वह तुम्हारे 10 साल के बेटे को अपने पंजों में उठाकर आसमान में उड़ गया!"
लक्ष्मण का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने चिल्लाकर कहा: "तू झूठा है! क्या कोई बाज इतने बड़े लड़के को उठाकर उड़ सकता है? मैं अभी तुझे राजा के दरबार में ले चलता हूँ।"
दोनों राजा के दरबार में पहुँचे। लक्ष्मण ने रोते हुए शिकायत की कि जीर्णधन ने उसका बेटा चुरा लिया है।
राजा ने गुस्से से जीर्णधन से पूछा: "क्या तुमने सचमुच इसके बेटे को छिपाया है? एक बाज बच्चे को कैसे उठा सकता है?"
जीर्णधन ने हाथ जोड़कर राजा से कहा: "महाराज! इस दुनिया में कुछ भी हो सकता है। जब इस शहर में छोटे-छोटे 'चूहे सौ किलो की लोहे की तराजू खा सकते हैं', तो क्या एक बाज़ 10 साल के लड़के को नहीं उठा सकता?"
राजा हैरान रह गया। उसने जीर्णधन से पूरी बात पूछी। जब जीर्णधन ने तराजू वाली बात बताई, तो पूरा दरबार ठहाकों से गूंज उठा।
राजा ने तुरंत लक्ष्मण को डांट लगाई। लक्ष्मण शर्मिंदा हो गया। उसने जीर्णधन की तराजू के पैसे वापस किए, और बदले में जीर्णधन ने उसका बेटा उसे सुरक्षित लौटा दिया।
नीति / सीख: जैसे को तैसा। जो इंसान आपके साथ झूठ बोले या बेईमानी करे, उसे उसी की भाषा में जवाब देकर ही सबक सिखाया जा सकता है।
📜 पंचतंत्र की और कहानियाँ
बंदर और लकड़ी का खूंटा — बिना बुलाए मेहमान और बेवकूफी का परिणाम
एक बंदर ने बढ़ई के छोड़े हुए आधे चिरे लट्ठे में फंसे खूंटे को निकालने की कोशिश की। खूंटा निकलते ही लकड़ी के दोनों हिस्से जुड़ गए और बंदर की पूंछ दबकर उसकी मृत्यु हो गई।
पढ़ें →सियार और युद्ध का ढोल — अनजाने डर का सामना और हकीकत
एक सियार ने युद्ध के मैदान में पड़े ढोल की आवाज़ सुनकर डरकर भागने की सोची, परंतु जब उसने साहस करके देखा तो पाया कि वह केवल एक खोखला ढोल था जिस पर टहनियाँ टकरा रही थीं।
पढ़ें →बगुला और केकड़ा — लालच का अंत और केकड़े की समझदारी
एक बूढ़े बगुले ने मछलियों को धोखा देकर उन्हें एक काल्पनिक तालाब में ले जाने का वादा किया। लेकिन चालाक केकड़े ने बगुले की पतली गर्दन को अपने पंजों से कसकर जकड़ लिया और उसकी हत्या करके सबको बचा लिया।
पढ़ें →चतुर खरगोश और मूर्ख शेर — बुद्धि का बल और कुएं की परछाई
एक खूंखार शेर रोज़ जानवरों को मारता था। खरगोश ने उसे एक कुएं में ले जाकर दिखाया कि वहाँ 'दूसरा शेर' है। शेर ने अपनी ही परछाई को दूसरा शेर समझकर उस पर झपटा और कुएं में गिरकर मर गया।
पढ़ें →खटमल और जूं की कहानी — बिना सोचे-समझे दी गई शरण और मौत
एक समझदार जूं राजा के बिस्तर पर चुपचाप रहती थी। एक खटमल ने जूं को बहकाया और बिस्तर पर शरण मांगी, फिर राजा को दर्दनाक डंक मार दिया। सेवकों ने बिस्तर छाना, खटमल तो नहीं मिला, लेकिन बेचारी जूं मारी गई।
पढ़ें →नीला सियार — झूठा दिखावा और असलियत का पर्दाफाश
एक सियार नीले रंग में नहाकर जंगल का राजा बन गया। उसने दूसरे सियारों को तिरस्कार किया। एक रात अपनी बिरादरी की आवाज़ सुनकर उसने सियारों की तरह रेंकना शुरू कर दिया और शेर उसकी असलियत जानकर उसे मार डाला।
पढ़ें →