घी का घड़ा और सोने के सिक्के — एक बेईमान दोस्त का पर्दाफाश

आगरा शहर में रामू नाम का एक व्यापारी रहता था। एक बार उसने तीर्थयात्रा पर मक्का जाने का फैसला किया। यात्रा लंबी थी और रास्ते में लुटेरों का डर था, इसलिए उसने अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई— 50 सोने के सिक्के—अपने साथ न ले जाने का निर्णय लिया।
रामू ने एक तरकीब सोची। उसने एक बड़ा सा मिट्टी का घड़ा लिया। उसमें नीचे वे 50 सोने के सिक्के डाल दिए और ऊपर से घड़े को बिल्कुल शुद्ध 'देसी घी' से लबालब भर दिया।
इसके बाद रामू अपने एक पुराने और भरोसेमंद दोस्त, शामल (जो एक किराने का व्यापारी था), के पास गया। रामू ने कहा, "दोस्त, मैं तीर्थ पर जा रहा हूँ। यह मेरे घर का शुद्ध घी है। इसे अमानत समझकर अपने गोदाम में सुरक्षित रख लो। वापसी में मैं इसे ले लूँगा।" शामल ने खुशी-खुशी वह घड़ा अपने गोदाम के एक कोने में रखवा दिया।
दोस्त की बेईमानी: कई महीने बीत गए। रामू अभी तीर्थ से नहीं लौटा था। एक दिन शामल के घर कुछ मेहमान आ गए और घर में घी खत्म हो गया। शामल ने सोचा कि रामू के घड़े से थोड़ा सा घी निकाल लेता हूँ, बाद में नया घी डालकर भर दूँगा।
जैसे ही शामल ने घड़े के अंदर अपना हाथ गहरा डाला, उसकी उंगलियों से कोई कठोर चीज़ टकराई। उसने घी के अंदर से मुट्ठी भर कर निकाला, तो देखा कि वे चमकते हुए सोने के सिक्के थे!
शामल के मन में लालच आ गया। उसने घड़े का सारा घी पलटा, 50 सोने के सिक्के निकाल कर अपनी तिजोरी में छिपा लिए। चोरी पकड़ी न जाए, इसलिए उसने बाज़ार से साधारण नया घी खरीदा और रामू के घड़े को वापस ऊपर तक भरकर गोदाम में रख दिया।
रामू की वापसी और दरबार में गुहार: लगभग एक साल बाद रामू तीर्थ से लौटा। वह शामल के पास गया और अपना घी का घड़ा वापस ले आया। घर आकर जब उसने सिक्के निकालने के लिए घड़ा खाली किया, तो उसमें केवल घी था, सोने का एक भी सिक्का नहीं था!
रामू रोता हुआ शामल के पास गया और अपने सिक्के मांगे। परंतु शामल तो पक्का बेईमान हो चुका था। उसने ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाते हुए कहा, "कौन से सिक्के? तुम तो मुझे सिर्फ 'घी' का घड़ा देकर गए थे, जो मैंने तुम्हें सुरक्षित वापस कर दिया। अब तुम मुझ पर चोरी का इल्ज़ाम लगा रहे हो?"
कोई गवाह न होने के कारण रामू न्याय मांगने सीधा शहंशाह अकबर के दरबार में पहुँचा। मामला पेचीदा था, क्योंकि रामू ने घी देते समय सिक्कों का ज़िक्र किसी से नहीं किया था। अकबर ने यह गुत्थी बीरबल को सौंप दी।
बीरबल की वैज्ञानिक जांच: बीरबल ने शामल और रामू, दोनों को दरबार में बुलवाया। घड़ा भी दरबार में लाया गया।
बीरबल ने शहर के दो सबसे पुराने और अनुभवी 'घी के व्यापारियों' को दरबार में बुलाया। बीरबल ने उन दोनों विशेषज्ञों से कहा, "इस घड़े के घी को सूंघो, चखो और मुझे बताओ कि यह घी कितना पुराना है?"
दोनों विशेषज्ञों ने घी को सूंघा, उंगली से थोड़ा सा चखा और उसकी बनावट देखी।
विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा: "हुज़ूर! यह घी बिल्कुल ताज़ा है। यह मुश्किल से एक या दो महीने पुराना है।"
बेईमान का पर्दाफाश: बीरबल ने शामल की ओर अत्यंत कठोर नज़रों से देखा और कहा: "शामल! रामू तो अपना घड़ा एक साल पहले तुम्हारे पास रखकर गया था! यदि तुमने घड़े को हाथ नहीं लगाया था, तो इसके अंदर का घी एक साल पुराना होना चाहिए था। परंतु विशेषज्ञों के अनुसार यह घी केवल दो महीने पुराना है! इसका साफ अर्थ है कि तुमने घड़े का पुराना घी (और उसके नीचे छिपे सिक्के) निकाल लिए और इसमें नया घी भर दिया!"
शामल का चेहरा पीला पड़ गया। उसका झूठ पूरी तरह से वैज्ञानिक तर्क के सामने पकड़ा गया था। पकड़े जाने के खौफ से वह बीरबल के पैरों में गिर पड़ा और अपना गुनाह कबूल कर लिया।
शहंशाह अकबर ने शामल को उसकी बेईमानी के लिए कोड़े लगाने की सज़ा दी और रामू को उसके 50 सोने के सिक्के वापस दिलवा दिए गए।
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