घोड़े का व्यापारी — मूर्खों की सूची और राजा का अहंकार

विजयनगर की सेना के लिए अक्सर अच्छी नस्ल के घोड़ों की आवश्यकता पड़ती थी। एक दिन अरब देश से एक व्यापारी महाराज कृष्णदेवराय के दरबार में आया। उसके पास एक बहुत ही शानदार और तेज़ दौड़ने वाला अरबी घोड़ा था।
व्यापारी ने वह घोड़ा महाराज को दिखाया और कहा: "महाराज! यह अरबी नस्ल का सबसे बेहतरीन घोड़ा है। यदि आप चाहें, तो मैं आपके अस्तबल के लिए ऐसे ही 50 और शानदार घोड़े ला सकता हूँ।"
महाराज उस घोड़े की सुंदरता और ताकत देखकर इतने प्रभावित हुए कि वे बिना कुछ सोचे-समझे उस व्यापारी की बातों में आ गए।
महाराज ने कहा, "मुझे ऐसे 50 घोड़े और चाहिए। तुम्हें कितने पैसे चाहिए?" व्यापारी ने अपनी चालाकी दिखाते हुए कहा, "हुज़ूर! मुझे उन घोड़ों को खरीदने और यहाँ तक लाने के लिए 5,000 सोने के सिक्कों की अग्रिम राशि चाहिए। मैं दो महीने के भीतर घोड़े लेकर लौट आऊँगा।"
महाराज ने बिना व्यापारी की कोई पृष्ठभूमि जाने, तुरंत खजांची को आदेश दिया और उस अजनबी व्यापारी को 5,000 सोने के सिक्के दे दिए। व्यापारी सिक्के लेकर खुशी-खुशी वहां से चला गया।
मूर्खों की सूची: कुछ दिनों बाद, महाराज अपने शाही बाग में टहल रहे थे। उन्होंने देखा कि तेनालीरामा एक कागज़ पर बहुत ही ध्यान से कुछ लिख रहे हैं।
महाराज उत्सुकता वश तेनाली के पास गए और पूछा, "तेनालीरामा! तुम इतनी तल्लीनता से इस कागज़ पर क्या लिख रहे हो?"
तेनालीरामा ने बिना महाराज की ओर देखे, कागज़ पर लिखते हुए कहा: "महाराज, मैं विजयनगर साम्राज्य के 'सबसे बड़े मूर्खों की सूची' तैयार कर रहा हूँ।"
महाराज को यह सुनकर मज़ा आया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "ज़रा मुझे भी तो दिखाओ कि इस साम्राज्य में सबसे बड़ा मूर्ख कौन है?"
तेनालीरामा ने वह कागज़ महाराज के हाथ में थमा दिया।
राजा का नाम और तेनाली का तर्क: महाराज ने जैसे ही उस सूची को पढ़ा, उनका चेहरा गुस्से से लाल हो गया। उस सूची में सबसे पहला नाम 'महाराजा कृष्णदेवराय' का लिखा हुआ था!
महाराज ने गरजते हुए कहा: "तेनाली! तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तुमने अपने ही राजा का नाम मूर्खों की सूची में सबसे ऊपर लिखा है? इसका क्या कारण है? यदि तुम मुझे कोई ठोस वजह नहीं बता पाए, तो आज ही तुम्हारा सिर कलम कर दिया जाएगा!"
तेनालीरामा ज़रा भी नहीं घबराए। उन्होंने अत्यंत शांति से कहा: "क्षमा करें महाराज! परंतु जो इंसान किसी बिल्कुल अजनबी व्यक्ति को, जिसका न कोई ठिकाना है और न कोई गारंटी, बिना कुछ सोचे-समझे 5,000 सोने के सिक्के दे दे... उसे मूर्ख नहीं तो और क्या कहा जाएगा? वह व्यापारी अब कभी वापस नहीं आएगा।"
महाराज को अपनी गलती का एहसास तो हुआ, परंतु अपने अहंकार को बचाने के लिए उन्होंने कहा: "परंतु तेनालीरामा! क्या पता वह व्यापारी ईमानदार हो? यदि वह सचमुच दो महीने बाद 50 घोड़े लेकर वापस आ गया, तब तुम क्या करोगे?"
अंतिम वार: तेनालीरामा ने तुरंत मुस्कुराकर अपनी कलम उठाई और कहा: "महाराज! यदि वह व्यापारी इतना बड़ा बेवकूफ निकला कि इतने सारे सोने के सिक्के मिलने के बाद भी वह वापस आ गया... तो मैं इस कागज़ से आपका नाम काट दूँगा, और उस मूर्खों की सूची में सबसे ऊपर 'उस व्यापारी' का नाम लिख दूँगा!"
यह अचूक और व्यंग्यात्मक जवाब सुनकर महाराज का सारा गुस्सा छूमंतर हो गया और वे अपनी हंसी नहीं रोक पाए। वे समझ गए कि तेनालीरामा ने बहुत ही चतुराई से उन्हें यह बात समझा दी है कि राजा को कभी भी इतने महत्वपूर्ण वित्तीय फैसले जल्दबाज़ी या किसी अजनबी पर विश्वास करके नहीं लेने चाहिए।
🎭 तेनाली राम की और कहानियाँ
सोने के आम — पंडितों का लालच और तेनाली का अचूक इलाज
पंडितों ने महाराज कृष्णदेवराय से सोने के आम बनवाने को कहा। तेनालीरामा ने गर्म लोहे की सलाखें दिखाकर उनकी पोल खोली और पंडितों को सबक सिखाया।
पढ़ें →शाही बैंगन की चोरी — एक जादुई बारिश और बच्चे की गवाही
तेनालीरामा ने शाही बाग से बैंगन चुराए। जब महाराज ने पूछताछ की, तो तेनाली ने अपने बेटे की 'जादुई बारिश' वाली गवाही से बचा लिया।
पढ़ें →तेनालीरामा और बिल्लियों की भूख — चूहों का आतंक और उबलता हुआ दूध
चूहों के आतंक से निपटने के लिए महाराज ने हर घर को बिल्ली और गाय दी। तेनालीरामा ने बिल्ली को खौलता दूध पिलाकर उसकी भूख बढ़ा दी और सारे चूहे खत्म कर दिए।
पढ़ें →आधी इनाम का हिस्सेदार — दरबान का लालच और कोड़ों की सज़ा
दरबान ने तेनालीरामा से इनाम का आधा हिस्सा मांगा। तेनाली ने इनाम में 100 कोड़े मांगकर दरबान को ही 50 कोड़े लगवा दिए।
पढ़ें →राजा की पेंटिंग — तस्वीर का दूसरा पहलू और तेनाली की 'अमूर्त' कला
महाराज ने चित्रकार की घोड़े की पेंटिंग की प्रशंसा की। तेनालीरामा ने खाली कैनवास पर 'घोड़े की पूंछ' बनाकर महाराज के ही तर्क से उन्हें चुप करा दिया।
पढ़ें →मातृभाषा की पहचान — महाविद्वान की हार और इंसानी फितरत
एक विद्वान ने मातृभाषा पहचानने की चुनौती दी। तेनालीरामा ने आधी रात को कांटा चुभाकर उसकी असली मातृभाषा 'तेलुगु' पता लगा ली।
पढ़ें →