शाही बैंगन की चोरी — एक जादुई बारिश और बच्चे की गवाही

विजयनगर के शाही महल के पीछे एक बहुत ही सुरक्षित और सुंदर बाग था। उस बाग में एक विशेष प्रकार के 'शाही बैंगन' उगाए जाते थे। ये बैंगन इतने स्वादिष्ट होते थे कि इनकी सब्ज़ी केवल महाराजा कृष्णदेवराय के दस्तरख्वान पर ही परोसी जाती थी। किसी और को इसे तोड़ने या खाने की सख्त मनाही थी।
तेनालीरामा को इस बात का पता था। एक दिन तेनालीरामा का मन उन शाही बैंगनों को चखने का हुआ। रात के अंधेरे में, वे चुपके से शाही बाग में घुसे और कुछ बैंगन चुरा लाए।
घर आकर उनकी पत्नी ने उन बैंगनों की अत्यंत स्वादिष्ट सब्ज़ी बनाई। तेनालीरामा और उनकी पत्नी ने सब्ज़ी खाई। उनका एक छोटा बेटा था जो उस समय गहरी नींद में सो रहा था। तेनालीरामा ने सोचा, "यह सब्ज़ी इतनी लज़ीज़ है, मुझे अपने बेटे को भी खिलानी चाहिए।"
परंतु तेनाली जानते थे कि बच्चे बहुत भोले होते हैं और उनके पेट में कोई बात नहीं पचती। यदि बेटे ने बाहर जाकर किसी को बता दिया कि उसने शाही बैंगन खाए हैं, तो वे राजा के सामने पकड़े जाएंगे। इसलिए तेनाली ने एक चतुर योजना बनाई।
जादुई बारिश का नाटक: तेनालीरामा ने एक बाल्टी पानी लिया और छत पर चले गए। उन्होंने अपने सोए हुए बेटे के ऊपर ज़ोर से पानी डाल दिया।
बेटा अचानक नींद से जाग गया। तेनालीरामा ने उससे कहा: "बेटा, जल्दी उठो! देखो कितनी ज़ोरदार बारिश हो रही है। तुम बाहर आकर मेरे साथ शाही बैंगन की सब्ज़ी खा लो, तुम्हारी माँ ने बहुत स्वादिष्ट खाना बनाया है।"
बेटे ने देखा कि उसके कपड़े भीगे हुए हैं और छत से पानी टपक रहा है। उसे लगा कि सचमुच बारिश हो रही है। उसने आराम से बैंगन की सब्ज़ी खाई और वापस सो गया।
दरबार में पेशी और गवाही: अगले दिन सुबह शाही माली ने देखा कि बाग से बैंगन चोरी हो गए हैं। उसने महाराज से शिकायत की। महाराज को तुरंत शक हुआ कि यह किसी और का नहीं, बल्कि तेनालीरामा का ही काम हो सकता है।
महाराज ने तेनालीरामा को दरबार में बुलाया और कड़क आवाज़ में पूछा, "तेनालीरामा! क्या तुमने मेरे बाग से बैंगन चुराए हैं?" तेनालीरामा ने हाथ जोड़कर कहा, "महाराज, मैंने कोई बैंगन नहीं चुराए। कोई मुझे फंसाने की कोशिश कर रहा है।"
महाराज को विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने तेनालीरामा के छोटे बेटे को दरबार में बुलवाया, क्योंकि बच्चे झूठ नहीं बोलते।
महाराज ने बच्चे से प्यार से पूछा: "बेटा, तुम मुझे सच-सच बताओ। क्या कल रात तुम्हारे घर में शाही बैंगन की सब्ज़ी बनी थी?"
बच्चे ने पूरे उत्साह के साथ कहा: "जी महाराज! कल रात पिताजी ने मुझे जगाया था और हमने बहुत ही स्वादिष्ट शाही बैंगन की सब्ज़ी खाई थी।"
यह सुनते ही दरबारियों में कानाफूसी शुरू हो गई। महाराज ने गुस्से से तेनालीरामा की ओर देखा।
तेनाली की चतुराई और बच्चे का जवाब: तेनालीरामा बिल्कुल नहीं घबराए। उन्होंने मुस्कुराते हुए महाराज से कहा: "महाराज! बच्चे अक्सर सपने देखते हैं और उन्हें सच मान लेते हैं। आप मेरे बेटे से यह भी पूछिए कि जब उसने बैंगन खाए थे, तब रात का मौसम कैसा था?"
महाराज ने बच्चे से पूछा: "बेटा, कल रात जब तुम सब्ज़ी खा रहे थे, तब मौसम कैसा था?"
बच्चे ने तुरंत कहा: "महाराज! कल रात तो बहुत ज़ोरों की बारिश हो रही थी! मैं तो बारिश में भीग भी गया था।"
यह सुनते ही पूरा दरबार चौंक गया। कल रात तो पूरे विजयनगर में आसमान बिल्कुल साफ था और एक बूंद भी बारिश नहीं हुई थी!
महाराज समझ गए कि बच्चा बारिश की बात कर रहा है जो बिल्कुल असंभव है। उन्होंने हंसते हुए कहा: "तेनालीरामा! तुम सही कह रहे थे। कल रात कोई बारिश नहीं हुई। यह बच्चा ज़रूर कोई सपना देख रहा था और इसने सपने में ही बैंगन खाए होंगे।"
महाराज ने तेनालीरामा को बाइज्ज़त बरी कर दिया। तेनालीरामा अपनी चतुराई और मनोवैज्ञानिक सूझबूझ से अपने परिवार को सज़ा से बचा ले गए।
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