शेरनी और सियार का बच्चा — स्वभाव की सच्चाई और परवरिश

एक घने जंगल में एक शेर और शेरनी रहते थे। उनके दो छोटे-छोटे बच्चे (शावक) थे। शेर रोज़ शिकार पर जाता और शेरनी बच्चों की देखभाल करती।
एक दिन शेर को कोई शिकार नहीं मिला। लौटते समय उसे रास्ते में एक 'सियार का बच्चा' लावारिस हालत में मिला। शेर को उस छोटे से बच्चे पर दया आ गई और वह उसे ज़िंदा ही शेरनी के पास ले आया।
शेरनी भी एक माँ थी। उसका हृदय पिघल गया। उसने उस सियार के बच्चे को मारने के बजाय, उसे अपने बच्चों के साथ दूध पिलाकर पालने का फैसला किया। शेरनी ने तीनों बच्चों को बिल्कुल एक समान प्यार दिया। सियार का बच्चा यह सोचकर बड़ा होने लगा कि वह भी एक 'शेर' है। तीनों बच्चे एक साथ खेलते-कूदते और बड़े होते।
हाथी से सामना: समय बीता और तीनों बड़े हो गए। एक दिन तीनों भाई (दो शेर और एक सियार) जंगल में घूम रहे थे कि अचानक उनके सामने एक बहुत बड़ा और 'पागल हाथी' आ गया।
शेर के दोनों बच्चों का खून खौल उठा। उनकी रगों में शेर का खून था। उन्होंने हाथी पर हमला करने के लिए दहाड़ मारी और आगे बढ़े।
परंतु जैसे ही सियार के बच्चे (जो खुद को शेर समझता था) ने हाथी का वह विशाल आकार देखा, उसका जन्मजात 'कायर स्वभाव' जाग गया। वह डर के मारे कांपने लगा। उसने अपने दोनों 'शेर भाइयों' से चिल्लाकर कहा: "अरे मूर्खों! यह हाथी बहुत बड़ा है, यह हमें कुचल देगा। जल्दी यहाँ से भाग चलो!"
यह कहकर सियार का बच्चा पूंछ दबाकर सबसे पहले वहाँ से भाग गया और घर जाकर छिप गया। शेर के दोनों बच्चे इस बात से बहुत हैरान और शर्मिंदा हुए कि उनका 'बड़ा भाई' एक हाथी से डरकर भाग गया! उन्होंने घर लौटकर यह बात अपनी माँ (शेरनी) को बताई।
शेरनी की चेतावनी: शेरनी समझ गई कि अब सच्चाई छुपाने का कोई फायदा नहीं है। उसने सियार के बच्चे को अकेले में बुलाया और कहा: "बेटा! तूने मेरी कोख से जन्म नहीं लिया है। तू एक सियार है। मैंने तुझे केवल ममता के कारण पाला है। तेरे अंदर 'शेर' का साहस नहीं, बल्कि 'सियार' का डरपोक स्वभाव है। आज तेरे भाइयों ने तेरा यह रूप देख लिया है। जिस दिन उन्हें यह पता चल गया कि तू एक सियार है, वे तुझे पल भर में चीर कर खा जाएंगे!"
शेरनी ने उसे आखिरी सलाह दी: "इससे पहले कि वे तुझे मारें, तू रात के अंधेरे में चुपचाप यहाँ से भाग जा और अपनी 'सियार बिरादरी' में शामिल हो जा।"
सियार का बच्चा सच्चाई जानकर घबरा गया। वह समझ गया कि परवरिश चाहे शेरों के बीच हुई हो, लेकिन वह एक शेर कभी नहीं बन सकता। वह उसी रात चुपचाप अपनी जान बचाकर वहाँ से भाग गया।
नीति / सीख: संगति और परवरिश से आदतें तो बदल सकती हैं, परंतु इंसान या जानवर का 'मूल स्वभाव' कभी नहीं बदलता। जो अंदर से कायर है, वह शेरों के बीच रहकर भी शूरवीर नहीं बन सकता।
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