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📜 पंचतंत्र

कौवा और पानी का घड़ा — जल्दबाज़ी (शॉर्टकट) और धैर्य का अंतर

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा4 मिनट का पठन
कौवा और पानी का घड़ा — जल्दबाज़ी (शॉर्टकट) और धैर्य का अंतर

भयंकर गर्मी के दिन थे। 'कालू' नाम का एक कौवा पानी की तलाश में भटक रहा था। वह जानता था कि उसके एक समझदार मित्र ने कुछ दिन पहले एक घड़े में कंकड़ डालकर पानी पिया था।

कालू को भी एक बाग में पानी से आधा भरा हुआ एक 'घड़ा' मिल गया। कालू की चोंच पानी तक नहीं पहुँच रही थी।

कालू बहुत ही आलसी और जल्दबाज़ था। उसने घड़े के पास पड़े कंकड़ देखे और सोचा: "अरे बाप रे! एक-एक कंकड़ उठाकर घड़े में डालने में तो बहुत मेहनत और समय लगेगा। मैं इतना इंतज़ार नहीं कर सकता। मुझे कोई 'शॉर्टकट' अपनाना चाहिए।"

कालू की बेवकूफी: कालू ने अपना दिमाग लगाया। उसने सोचा कि अगर वह इस घड़े को धक्का देकर थोड़ा सा 'टेढ़ा' कर दे, तो पानी आसानी से ऊपर तक आ जाएगा और वह बिना कंकड़ डाले पानी पी लेगा।

कालू ने घड़े के किनारे पर बैठकर उसे अपने पंजों और चोंच से ज़ोर से धक्का देना शुरू किया। घड़ा भारी था, लेकिन कालू ज़ोर लगाता रहा।

अचानक घड़े का संतुलन बिगड़ गया। घड़ा टेढ़ा होने के बजाय ज़मीन पर 'लुढ़क गया'!

घड़ा ज़मीन पर गिरा और उसका सारा पानी सूखी मिट्टी में बह गया। मिट्टी ने कुछ ही सेकंड में सारा पानी सोख लिया।

कालू कौवा हैरान होकर देखता रह गया। शॉर्टकट और जल्दबाज़ी के चक्कर में उसने अपनी मेहनत तो बचा ली, लेकिन अपनी प्यास नहीं बुझा सका और उसे प्यासा ही वहां से उड़ना पड़ा।

नीति / सीख: सफलता का कोई 'शॉर्टकट' नहीं होता। जो काम धैर्य और सही तरीके (मेहनत) से किया जाना चाहिए, उसमें जल्दबाज़ी करने से हमेशा बना-बनाया काम भी बिगड़ जाता है।

🎉 कहानी समाप्त

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