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📜 पंचतंत्र

शेर और चार गाएं — एकता की ढाल और फूट का परिणाम

पंचतंत्र — विश्नु शर्मा4 मिनट का पठन
शेर और चार गाएं — एकता की ढाल और फूट का परिणाम

एक बड़े से चरागाह में चार गाएं रहती थीं। चारों में बहुत गहरी दोस्ती थी। वे हमेशा एक साथ घास चरती थीं, एक साथ पानी पीती थीं और एक साथ आराम करती थीं।

उसी इलाके में एक खूंखार शेर भी रहता था। उसकी नज़र हमेशा उन चारों गायों पर रहती थी। वह रोज़ सोचता था कि किसी तरह उन्हें अपना शिकार बना ले।

परंतु जब भी शेर उन पर हमला करने की कोशिश करता, तो वे चारों गाएं अपनी 'पूंछ से पूंछ मिलाकर' एक गोल घेरा बना लेती थीं। इस तरह उनके नुकीले सींग चारों दिशाओं में हो जाते थे। शेर जिस तरफ से भी हमला करने जाता, उसे नुकीले सींगों का सामना करना पड़ता। इस 'एकता' के कारण शेर उन्हें कभी मार नहीं पाया।

शेर की कूटनीति: शेर समझ गया कि जब तक ये चारों एक साथ हैं, इन्हें मारना असंभव है। इसलिए शेर ने एक चालाकी चली।

उसने एक सियार को भेजा, जिसने जाकर गायों के बीच 'झूठी अफवाहें' फैलानी शुरू कर दीं।

सियार ने एक गाय से कहा: "बाकी तीन गाएं तुम्हें बेवकूफ बना रही हैं, वे सारा अच्छा और मीठा घास खुद खा जाती हैं।" दूसरी गाय से कहा: "वे सब तुम्हारी बुराई कर रही थीं।"

एकता का टूटना: सियार की इन झूठी बातों में आकर गायों के बीच ग़लतफ़हमी पैदा हो गई। उन्होंने एक-दूसरे से बात करना बंद कर दिया और उनमें भयंकर झगड़ा हो गया।

गुस्से में आकर चारों गायों ने तय किया कि अब वे एक साथ नहीं रहेंगी। वे चारों चरागाह के 'चार अलग-अलग कोनों' में जाकर 'अकेले' घास चरने लगीं।

शेर तो इसी मौके की तलाश में था! जब शेर ने देखा कि अब गाएं अकेली हैं और उनकी एकता की ढाल टूट चुकी है, तो उसने बिना कोई समय बर्बाद किए उन पर हमला कर दिया।

शेर पहले दिन पहली गाय के पास गया और उसे आसानी से मारकर खा गया। फिर उसने दूसरी, तीसरी और अंत में चौथी गाय का भी शिकार कर लिया। चारों गाएं अपनी मूर्खता और आपसी फूट के कारण मारी गईं।

नीति / सीख: संगठन में ही शक्ति है। जब तक आप अपने परिवार या दोस्तों के साथ एकजुट रहते हैं, कोई दुश्मन आपका बाल भी बांका नहीं कर सकता। लेकिन जहां 'फूट' पड़ती है, वहां विनाश निश्चित होता है।

🎉 कहानी समाप्त

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