कौवा और सांप — बुद्धि का बल और दुश्मन का अंत

एक घने जंगल में एक बहुत बड़ा बरगद का पेड़ था। उस पेड़ की सबसे ऊंची डाली पर कौवा और उसकी पत्नी (कौवी) घोंसला बनाकर रहते थे। वे बहुत खुश थे।
परंतु उसी बरगद के पेड़ की जड़ों में एक बहुत ही 'गहरा बिल' था, जिसमें एक भयानक और ज़हरीला काला सांप रहता था।
जब भी कौवी अपने घोंसले में अंडे देती और कौवा-कौवी दोनों भोजन की तलाश में बाहर जाते, तो वह दुष्ट सांप पेड़ पर चढ़ जाता और उनके सारे 'अंडे' खा जाता। कई बार ऐसा ही हुआ। अपने बच्चों को खोकर कौवा और कौवी बहुत रोते।
बुद्धिमान सियार की सलाह: कौवे ने इस समस्या को सुलझाने के लिए अपने एक बुद्धिमान मित्र 'सियार' से सलाह ली। सियार ने कौवे को एक बहुत ही शानदार कूटनीतिक योजना बताई।
सियार ने कहा: "मित्र, जो दुश्मन शरीर से ताक़तवर हो, उसे 'बुद्धि' से हराना चाहिए। तुम पास ही राजा के महल में जाओ। वहां राजकुमारी रोज़ नदी में नहाने आती है। तुम उसका कोई कीमती ज़ेवर उठाकर ले आना।"
सोने का हार और सांप का अंत: अगले दिन कौवा उड़कर महल के पास बहने वाली नदी पर गया। वहां राजकुमारी अपनी सहेलियों के साथ नहा रही थी। उसने अपने सारे कपड़े और कीमती ज़ेवर नदी के किनारे रख छोड़े थे, और राजा के सैनिक दूर खड़े पहरा दे रहे थे।
कौवे ने मौका देखा और झपट्टा मारकर राजकुमारी का सबसे कीमती 'सोने का हार' अपनी चोंच में दबा लिया।
कौवा ज़ोर-ज़ोर से 'कांव-कांव' करते हुए जानबूझकर धीरे-धीरे उड़ने लगा, ताकि सैनिक उसे देख लें। सैनिकों ने देखा कि एक कौवा राजकुमारी का हार लेकर उड़ रहा है। उन्होंने लाठियां उठाईं और कौवे के पीछे-पीछे दौड़ने लगे।
कौवा उड़ते हुए सीधा अपने बरगद के पेड़ के पास पहुँचा। सैनिक उसके पीछे-पीछे आ रहे थे। कौवे ने वह 'सोने का हार' ठीक उस 'सांप के बिल' के अंदर डाल दिया और खुद उड़कर एक ऊंची डाली पर बैठ गया।
जब सैनिक उस पेड़ के पास पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि हार एक बिल के अंदर पड़ा है। जैसे ही एक सैनिक ने हार निकालने के लिए बिल में लाठी डाली, अंदर बैठा वह भयानक काला सांप फुफकारता हुआ बाहर निकल आया!
सांप को देखते ही सैनिकों ने तुरंत अपनी लाठियों और भालों से उस दुष्ट सांप को पीट-पीट कर वहीं 'मार डाला'। सैनिकों ने अपना हार निकाला और महल लौट गए।
सांप के मरते ही कौवा और कौवी की जान में जान आई और वे खुशी-खुशी अपने घोंसले में रहने लगे।
नीति / सीख: जो काम शारीरिक ताक़त से न हो सके, वह अक्ल (बुद्धि) से आसानी से किया जा सकता है। अक्लमंदी से बड़े से बड़े और खूंखार दुश्मन का भी अंत किया जा सकता है।
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