कौवे और उल्लुओं का युद्ध — कूटनीति, धोखा और दुश्मन का विनाश

जंगल में कौवों और उल्लुओं के बीच बहुत पुरानी और पुश्तैनी दुश्मनी थी। उल्लू रात में ताकतवर होते थे और कौवे दिन में।
उल्लुओं ने एक रात कौवों के बरगद के पेड़ पर अचानक हमला कर दिया और सैकड़ों कौवों को मार डाला। कौवों का राजा 'मेघवर्ण' बहुत दुखी हुआ। वह समझ गया कि अगर ऐसा ही चलता रहा, तो उल्लू पूरी कौवा प्रजाति को खत्म कर देंगे।
राजा मेघवर्ण ने अपने सबसे बूढ़े और चतुर मंत्री 'स्थिरजीवी' से सलाह मांगी। स्थिरजीवी ने कूटनीति की एक बहुत ही शानदार योजना बनाई।
स्थिरजीवी का नाटक: योजना के अनुसार, कौवों ने अपने ही मंत्री स्थिरजीवी को चोंच मार-मार कर खून से लथपथ कर दिया और उसे पेड़ के नीचे फेंक कर सारे कौवे दूर एक पहाड़ पर जाकर छिप गए।
रात को जब उल्लू फिर से हमला करने आए, तो उन्हें पेड़ पर कोई कौवा नहीं मिला। पेड़ के नीचे उन्हें घायल स्थिरजीवी पड़ा मिला।
स्थिरजीवी ने उल्लुओं के राजा से रोते हुए झूठ कहा: "महाराज! मैंने अपने राजा मेघवर्ण को सलाह दी थी कि वह आपकी अधीनता स्वीकार कर ले, इसी बात पर उसने मुझे पीट कर यहाँ फेंक दिया। आप मुझे अपनी शरण में ले लीजिए, मैं आपको कौवों के छिपने की जगह बता दूँगा।"
उल्लुओं का राजा मूर्ख था। उसने अपने मंत्रियों की चेतावनी को अनसुना कर दिया और उस बूढ़े कौवे (स्थिरजीवी) को अपने साथ अपनी 'गुफा' में ले गया।
तैयारी और विनाश: स्थिरजीवी अब उल्लुओं की गुफा के बाहर रहने लगा। उसने उल्लुओं का भरोसा जीत लिया। उसने उल्लुओं से कहा: "मैं बूढ़ा हूँ, मुझे ठंड लगती है। मैं गुफा के दरवाज़े पर अपने लिए लकड़ियों और सूखी घास का एक छोटा सा घोंसला बनाना चाहता हूँ।"
उल्लुओं ने उसे अनुमति दे दी। स्थिरजीवी रोज़ जंगल से सूखी लकड़ियां और घास लाता और धीरे-धीरे उसने उल्लुओं की गुफा के दरवाज़े पर लकड़ियों का एक बहुत बड़ा 'पहाड़' खड़ा कर दिया।
जब गुफा का दरवाज़ा लकड़ियों से पूरी तरह घिर गया, तो एक दिन 'दोपहर' के समय (जब उल्लू अंधे होने के कारण गुफा से बाहर नहीं निकल सकते थे), स्थिरजीवी उड़कर अपने राजा मेघवर्ण के पास गया।
उसने कहा: "महाराज! समय आ गया है। सारे कौवे अपनी चोंच में 'जलती हुई लकड़ियां' लेकर मेरे पीछे आएं!"
सैकड़ों कौवे अपनी चोंच में आग लेकर आए और उन्होंने गुफा के दरवाज़े पर रखी सूखी लकड़ियों में आग लगा दी। कुछ ही पलों में आग भड़क उठी और पूरी गुफा धू-धू कर जलने लगी। गुफा के अंदर सो रहे सारे उल्लू जलकर राख हो गए, क्योंकि वे दिन के उजाले में बाहर नहीं भाग सकते थे।
स्थिरजीवी की कूटनीति से कौवों ने अपने सबसे बड़े दुश्मन को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।
नीति / सीख: जो दुश्मन एक बार हार मानकर आपकी शरण में आ जाए, उस पर कभी भी आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। पुराने दुश्मन द्वारा की गई 'मीठी बातें' हमेशा किसी बड़े धोखे और विनाश की तैयारी होती हैं।
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